Israel Civil War: नेतन्याहू के खिलाफ बढ़ रहा असंतोष; सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बोले- गृहयुद्ध की आशंका
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू नीत सरकार के खिलाफ लोग बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में इस्राइली सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने गृहयुद्ध की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस्राइली सरकार देश के शीर्ष कानूनी और सुरक्षा अधिकारियों को हटाने पर अड़ी रहेगी तो सांविधानिक संकट पैदा हो सकता है।
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पश्चिमी एशियाई देश इस्राइल हमास के साथ 16 महीने से जारी हिंसक संघर्ष के अलावा कुछ अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ तनाव को लेकर लगातार चर्चा में है। कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहे इस देश में अब गृह युद्ध की आशंका है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू नीत सरकार के खिलाफ लोग बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में इस्राइली सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने गृहयुद्ध की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस्राइली सरकार देश के शीर्ष कानूनी और सुरक्षा अधिकारियों को हटाने पर अड़ी रहेगी तो सांविधानिक संकट पैदा हो सकता है।
बता दें कि पीएम नेतन्याहू ने पिछले सप्ताह शिन बेट (आंतरिक सुरक्षा सेवा) के प्रमुख रोनेन बार को बर्खास्त करने का एलान कर चुके हैं। उन्होंने इस कदम को उठाने के पीछे हमास के 7 अक्तूबर, 2023 के हमलों को रोकने में विफलता के कारण का हवाला दिया।
अटॉर्नी जनरल को बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू
नेतन्याहू की सरकार ने अटॉर्नी जनरल को बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। उन पर आरोप लगाया गया है कि वे सरकार के एजेंडे में बाधा डाल रहे हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब शिन बेट नेतन्याहू के कार्यालय में संभावित घुसपैठ की जांच कर रही है। नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार का मुकदमा भी चल रहा है। ऐसे में सरकार और न्यायपालिका के बीच टकराव के कारण इस्राइल में तनाव बढ़ने का खतरा है।
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सरकार और न्यायपालिका के बीच तनाव
नेतन्याहू की सरकार ने 2023 की शुरुआत में न्यायपालिका में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी, जिससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। आलोचकों का कहना है कि नेतन्याहू को बहुत अधिक शक्ति प्रदान करके इस बदलाव से देश की नियंत्रण और संतुलन प्रणाली को कमजोर किया जाएगा। वहीं, समर्थकों का कहना है कि न्यायपालिका ने बहुत अधिक हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है।
हमास के हमले के बाद न्यायपालिका में बदलाव पर लगा ब्रेक
7 अक्तूबर को हमास ने गाजा में हमला कर युद्ध को जन्म दिया, जिसके बाद न्यायपालिका में नेतन्याहू द्वारा किए जा रहे बदलावों पर ब्रेक लग गया। हालांकि देश में इस बात को लेकर विभाजन पैदा हो गया कि हमले को रोकने में विफल रहने के लिए किसे दोषी ठहराया जाए। दूसरी तरफ, नेतन्याहू ने जिम्मेदारी लेने से बचते हुए सेना और शिन बेट के प्रमुखों पर आरोप लगाने की कोशिश की है।
बार को बर्खास्त करने की घोषणा से शुरू हुआ विरोध
पिछले हफ्ते, नेतन्याहू ने बार को बर्खास्त करने की घोषणा की, जिसके बाद व्यापक विरोध शुरू हो गया। आलोचकों का कहना है कि यह कदम इस्राइल की स्वतंत्र संस्थाओं को कमजोर करेगा।
इस्राइल में कोई आधिकारिक संविधान नहीं
बता दें कि इस्राइल में कोई आधिकारिक संविधान नहीं है। संसद का सिर्फ एक सदन है, जिस पर नेतन्याहू के गठबंधन का नियंत्रण है। इस्राइल का सर्वोच्च न्यायालय लंबे समय से सरकारी फैसलों पर नजर रख रहा है। बार को बर्खास्त करने के फैसले को पहले ही न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है। अदालत ने बार की बर्खास्तगी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा रखी है।
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अटॉर्नी जनरल को हटाने की तैयारी
सरकार ने रविवार को एक फैसला पारित किया, जिसमें अटॉर्नी जनरल बहाराव मियारा को बर्खास्त करने की अपील की गई। अब इस मामले की सुनवाई एक समिति करेगी, जिसमें अटॉर्नी जनरल और सरकार का पक्ष सुना जाएगा। इसके बाद ही सरकार अंतिम फैसला ले सकेगी। यदि समिति उन्हें बर्खास्त करने की अनुशंसा करती है तो संभवतः इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
न्यायाधीशों ने बर्खास्तगी पर खड़े किए सवाल
इस्राइल में सांविधानिक संकट की आशंका के बीच 88 वर्षीय कानूनविद् और इस्राइली सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अहरोन बराक ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट के 20 पूर्व न्यायाधीशों के साथ मिलकर एक पत्र लिखा। न्यायाधीशों ने अटॉर्नी जनरल को बर्खास्त करने पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करना कानून के शासन को खतरे में डालता है।
2023 में भी हजारों लोगों ने किया था विरोध प्रदर्शन
विपक्षी नेता यायर लैपिड ने भी सरकार के खिलाफ आदोलन की चेतावनी दी है। बता दें कि 2023 में भी नेतन्याहू सरकार के कानूनी सुधार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे।
2030 तक इस्राइल में युद्ध में घायल एक लाख सैनिक होंगे
इस्राइल ने बताया कि युद्ध में घायल उसके सैन्य कर्मियों की संख्या में तेज से इजाफा हो रहा है। इस्राइली रक्षा मंत्रालय के पुनर्वास प्रभाग की ओर से रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 78,000 से अधिक घायल सैन्यकर्मी हैं। इनमें से 16,000 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद घायल हुए थे। घायलों में से 66 प्रतिशत रिजर्व सैनिक हैं। इनमें से 51 प्रतिशत की उम्र 18 से 30 वर्ष की है। घायलों में सात प्रतिशत महिलाएं हैं। लगभग 10,900 शारीरिक चोटों से जूझ रहे हैं, जबकि उपचार प्राप्त करने वालों में से आधे मनोवैज्ञानिक आघात से पीड़ित हैं। लगभग 2,900 व्यक्तियों को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की चोटें लगी हैं।
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