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अध्ययन: ब्रिटेन में डेल्टा के मामले बढ़ रहे, लेकिन गंभीर मरीजों की संख्या कम

Sat, 17 Jul 2021 06:11 AM IST
Kuldeep Singh पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 17 Jul 2021 06:11 AM IST
सार

  • पब्लिक हैल्थ इंग्लैंड (पीएचई)’ ने कहा कि संक्रमण के मामले अधिक हैं तथा बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन उसके अनुरूप कोविड-19 के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की उतनी जरूरत नहीं पड़ रही है जो इस बात का संकेत है कि कोरोना वायरस के इस बेहद संक्रामक स्वरूप के खिलाफ भी टीके प्रभावी हैं।

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Delta cases on the rise in the UK but the number of serious patients remains low according to Public health England study
डेल्टा वेरिएंट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

ब्रिटेन में पब्लिक हैल्थ इंग्लैंड द्वारा किए गए अध्ययन के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और शुक्रवार को यहां संक्रमण के और 36,800 मामले दर्ज किए गए हैं जो पिछले सप्ताह के मुकाबले 17 प्रतिशत अधिक हैं।

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‘पब्लिक हैल्थ इंग्लैंड (पीएचई)’ ने कहा कि संक्रमण के मामले अधिक हैं तथा बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन उसके अनुरूप कोविड-19 के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की उतनी जरूरत नहीं पड़ रही है जो इस बात का संकेत है कि कोरोना वायरस के इस बेहद संक्रामक स्वरूप के खिलाफ भी टीके प्रभावी हैं। डेल्टा बी1.617.2 के 36,800 मामलों में से 45 मामले डेल्टा एवाई.1 के हैं जिसके बारे में आशंका है कि इसके खिलाफ टीका उतना प्रभावी नहीं होता।
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ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. जैनी हैरिस ने कहा, मामलों की दर अब भी अधिक है तथा बढ़ रही है लेकिन अच्छी बात यह है कि संक्रमण के मामले बढ़ने के बावजूद अस्पताल में मरीजों के भर्ती होने तथा मौत की संख्या में उतनी वृद्धि नहीं हो रही। यह टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है जिससे गंभीर रोग के कम मामले सामने आ रहे हैं।
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उन्होंने कहा, सबसे अच्छा तरीका है टीके की दोनों खुराक लेकर स्वयं को और अपने आसपास के लोगों को सुरक्षित रखना। टीकों से बढ़िया बचाव हो रहा है लेकिन वे जोखिम को पूरी तरह से खत्म नहीं करते। जैसे जैसे हम पाबंदियों को खत्म करने की दिशा में बढ़ रहे हैं उसके साथ ही सतर्कता बरतना और भी महत्वपूर्ण है।


एक अन्य अध्ययन में यह पता चला कि कोविड रोधी टीके की दूसरी खुराक के 14 या कुछ अधिक दिन बाद लगभग 100 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी बन जाती हैं। यह अध्ययन इम्पीयरिलय कॉलेज लंदन और अनुसंधान संस्था इप्सोस मोरी ने किया जिसमें टीके की दोनों खुराक के महत्व को रेखांकित किया गया।

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