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पाकिस्तान : वाघा सीमा धमाके में जमात-उल-अहरार के तीन आतंकियों को मृत्युदंड व 300 साल जेल
Thu, 20 Feb 2020 04:34 AM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 20 Feb 2020 04:34 AM IST
सार
पाकिस्तान की तरफ वाघा सीमा पर दो नवंबर 2014 को एक आत्मघाती हमले में महिलाओं और बच्चों सहित 60 से अधिक लोग मारे गए थे। हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित जमात-उल-अहरार से अलग हुए जुंदुल्ला और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने अलग-अलग ली थी।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधक अदालत ने बुधवार को प्रतिबंधित जमात-उल-अहरार के तीन आतंकवादियों को मौत की सजा और 300 साल कैद की सजा सुनाई। ये आतंकी 2014 में वाघा सीमा पर उस बम हमले में दोषी पाए गए जिसमें 60 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वाघा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर का एक गांव है और अटारी भारत-पाक सीमा पर भारत के पंजाब में स्थित है।
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पाकिस्तान की तरफ वाघा सीमा पर दो नवंबर 2014 को एक आत्मघाती हमले में महिलाओं और बच्चों सहित 60 से अधिक लोग मारे गए थे। हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित जमात-उल-अहरार से अलग हुए जुंदुल्ला और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने अलग-अलग ली थी।
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लाहौर में आतंकवाद निरोधक अदालत ने बुधवार को वाघा सीमा बम हमला मामले में फैसले की घोषणा करते हुए तीन संदिग्धों हसीबुल्लाह, सईद जान घना और हुसैनुल्लाह को पांच मामलों में मौत की सजा सुनाई। साथ ही उन्हें 300 वर्ष कैद की सजा भी सुनाई गई। इसके अलावा उनमें से हरेक पर 10 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने तीन अन्य संदिग्धों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। पांच साल तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष के विरुद्ध 100 से ज्यादा लोगों ने गवाही दी।
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हिरासत से भागने में सफल रहा एहसानुल्लाह
वाघा सीमा पर किए गए धमाके के बाद जमात-उल-अहरार के प्रवक्ता एहसानुल्लाह एहसान ने डॉन अखबार को फोन पर इस वारदात की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया लेकिन वह हाल ही में हिरासत से भागने में सफल हो गया। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार की तीखी आलोचना की थी।