नया खतरा: तालिबानियों के पास पहुंचा लाखों अफगानों का डेटा, अमेरिकी सैन्य संसाधन भी जब्त
पहचान के लिए आतंकी बायोमीट्रिक जांच करते थे। ऐसे में यह आशंका भी बढ़ रही है कि तालिबान के पास हाइड के डाटा से लोगों की पहचान करने की तकनीकी क्षमता है।
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अफगानिस्तान पर कब्जा कर चुके तालिबान आतंकियों के कब्जे में अमेरिकी सैन्य संसाधन आ ही चुके हैं, अब आशंका है कि उनके पास ‘हाइड’ नामक एक उपकरण से जमा किया गया अमेरिका के मददगार रहे अफगान नागरिकों का डाटा भी पहुंच गया है।
हाइड यानी हैंडहेल्ड इंटरएजेंसी आईडेंटिटी डिटेक्शन इक्विपमेंट (एचआईआईडीई)। इसका इस्तेमाल 2007 में अमरीकी सेना ने ऐसे 15 लाख अफगान नागरिकों का बायोमीट्रिक डाटा जुटाने में किया, जो उसके लिए किसी न किसी रूप में मददगार साबित हो रहे थे। वह उन्हें आतंकियों से अलग पहचान देना चाहती थी।
इस बायोमीट्रिक डाटा में नागरिकों की आंखों की पुतली, उंगलियों के निशान, चेहरे के स्कैन आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। अगर तालिबानी आतंकी इस तकनीक का इस्तेमाल करने में सक्षम हुए तो उन अफगान नागरिकों के जीवन पर संकट आ सकता है, जिन्होंने साल 2001 से अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को 20 वर्ष तक किसी न किसी रूप में मदद की। एजेंसी
साल 2016-17 में तालिबानी आतंकियों ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र के हाईवे से गुजर रही बसें रोककर कुछ खास लोगों का अपहरण व हत्या करनी शुरू कर दीं। इन लोगों में सरकार के अधिकारी खासतौर से शामिल थे।
- पहचान के लिए आतंकी बायोमीट्रिक जांच करते थे। ऐसे में यह आशंका भी बढ़ रही है कि तालिबान के पास हाइड के डाटा से लोगों की पहचान करने की तकनीकी क्षमता है।
रोहिंग्याओं के लिए भी खतरा बना यह डाटा
यूएनएचसीआर ने 2018 में रोहिंग्या शरणार्थियों का बायोमीट्रिक डाटा जमा किया। बाद में इसे बांग्लादेश सरकार को सौंप दिया। बांग्लादेश ने यही डाटा म्यांमार को सौंप दिया जहां से हजारों रोहिंग्या जान बचाकर भागे थे। कहा जा रहा है कि अब इन शरणार्थियों पर भी अफगान नागरिकों की तरह ही मौत का खतरा बना रहेगा।
- अधिकतर विशेषज्ञ मानने लगे हैं कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों और संकटकाल से गुजर रहे देशों को शरणार्थियों व नागरिकों का बायोमीट्रिक डाटा जमा नहीं करना चाहिए।
- अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकियों के हमदर्द रहे अफगान नागरिकों का भविष्य क्या होगा, फिलहाल यह बात सभी को चिंतित किए हुए है।
मई 2021 में मानव विज्ञानी नीना टॉफ्ट जानेगरा ने बताया था कि अमेरिकी सेना ने हाइड का उपयोग इराक में किया था। अपदस्थ गनी सरकार भी इसी रास्ते पर चलते हुए अपने नागरिकों के राष्ट्रीय पहचान पत्र बना रही थी।