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क्यूबा में अमेरिका के खिलाफ विरोध प्रदर्शन: एक साथ सड़कों पर उतरीं सैकड़ों महिलाएं, ट्रंप के खिलाफ लगाए नारे

Wed, 08 Apr 2026 01:29 AM IST
Shubham Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हवाना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हवाना Published by: Shubham Kumar Updated Wed, 08 Apr 2026 01:29 AM IST
सार

क्यूबा की राजधानी हवाना में सैकड़ों महिलाओं ने अमेरिका के ऊर्जा प्रतिबंध और नीतियों के खिलाफ रैली की। क्यूबा महिला संघ ने विल्मा एस्पिन की याद में आयोजन किया। उप प्रधानमंत्री इनेस चैपमैन, उप विदेश मंत्री जोसेफिना विडाल और मारिएला कास्त्रो ने नेतृत्व किया। रैली में ब्लॉकडैड हटाओ जैसे नारे भी लगाए गए।

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Cuba Protests Against US Hundreds of Women Take to the Streets Together Chanting Slogans Against Trump
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एक्स/दियाज-कानेल

विस्तार

पश्चिम एशिया में जहां एक तरफ महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष अब अपने सातवें आसमान पर पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर मंगलवार को क्यूबा की राजधानी हवाना में सैकड़ों महिलाओं ने एक बड़ी रैली की, जिसमें उन्होंने अमेरिका की तरफ से लगाए गए ऊर्जा प्रतिबंधों और अन्य उपायों के खिलाफ जबरदस्त विरोध जताया। यह रैली खास तौर पर यूनाइटेड स्टेट्स के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ थी, जिनके कारण क्यूबा बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहा है। 

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रैली क्यूबा महिला संघ ने आयोजित की, जो देश की सबसे बड़ी महिला संस्था है और सरकार तथा कम्युनिस्ट पार्टी के नजदीक मानी जाती है। यह प्रदर्शन संघ के संस्थापक विल्मा एस्पिन की याद में रखा गया था, जो एक क्रांतिकारी और राउल कास्त्रो की पत्नी भी थीं।  महिलाओं ने क्यूबा के झंडे उठाए, ब्लॉकडैड हटाओ जैसे नारे लिखे पोस्टर दिखाए और फिदेल कास्त्रो तथा विल्मा एस्पिन की तस्वीरें भी थामे रखीं। 

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राजनीतिक नेताओं ने भी दिया समर्थन
रैली का नेतृत्व क्यूबा की उप प्रधानमंत्री इनेस मारिया चैपमैन, उप विदेश मंत्री जोसेफिना विडाल और मारिएला कास्त्रो (विल्मा एस्पिन की बेटी) ने किया। विडाल ने कहा कि यह नीतियां अत्याचार जैसी हैं और इसका भारी असर क्यूबा की जनता पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह एक प्रकार का सामूहिक दंड है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। 

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क्यूबा में ईंधन की भारी कमी
रैली में शामिल लोगों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा बढ़ाए गए प्रतिबंधों के कारण क्यूबा को जरूरी ईंधन नहीं मिल पा रहा, जिससे देश की अस्पताल, बस सेवाएं और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। बता दें कि क्यूबा अपनी जरूरत का करीब 60% ईंधन बाहर से ही लाता है। कुछ लोगों ने कहा कि अगर ट्रंप नीतियाँ नहीं रुकतीं, तो उनका देश और भी बुरा हाल हो जाएगा। कई ग्रामीण और कामकाजी महिलाएं टूटती अर्थव्यवस्था हेतु इसे मुख्य कारण बता रही हैं। हालांकि हाल ही में रूस ने क्यूबा को पेट्रोलियम भेजा है, फिर भी देश को ईंधन संकट से उबरने में समय लगेगा।

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