इतिहास रचकर लौट रहा आर्टेमिस-2: चंद्रमा की सीमा पार, अब पृथ्वी की ओर रफ्तार से बढ़ता ओरियन स्पेसक्राफ्ट
चंद्रमा की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद आर्टेमिस-2 मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री अब पृथ्वी की ओर वापसी कर रहे हैं। ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकल चुका है और अब पृथ्वी के खिंचाव में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में अगले तीन दिन बेहद अहम हैं।आइए जानते हैं क्यों?
चंद्रमा की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद आर्टेमिस-2 मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री अब पृथ्वी की ओर वापसी कर रहे हैं। ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकल चुका है और अब पृथ्वी के खिंचाव में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में अगले तीन दिन बेहद अहम हैं।आइए जानते हैं क्यों?
विस्तार
चंद्रमा की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद आर्टेमिस 2 मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री अब सुरक्षित रूप से पृथ्वी की ओर लौट रहे हैं। मंगलवार रात करीब 10:55 बजे (भारतीय समयानुसार) उनका ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के उस क्षेत्र से बाहर निकल आया, जहां तक चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण प्रभावी रहता है। अब अंतरिक्ष यान पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ज्यादा असर डाल रहा है और यह तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। चंद्रमा से दूर निकलने के बाद आर्टेमिस 2 मिशन के अंतरिक्ष यात्री अब लगभग तीन दिन की वापसी यात्रा पर हैं। इस दौरान उनका सबसे बड़ा लक्ष्य सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटना है।
बता दें कि इसके लिए वे समय-समय पर छोटे-छोटे इंजन फायर करेंगे, जिन्हें ट्राजेक्टरी करेक्शन बर्न कहा जाता है। इनका काम अंतरिक्ष यान की दिशा और गति को सही बनाए रखना होता है, ताकि वह बिल्कुल सही कोण से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर सके। अगर यान का कोण सही नहीं हुआ तो खतरा हो सकता है। बहुत हल्के कोण पर आने से यान वायुमंडल से टकराकर वापस अंतरिक्ष में जा सकता है, जबकि बहुत तेज कोण पर आने से ज्यादा गर्मी के कारण नुकसान हो सकता है।
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समझिए पृथ्वी पर वापसी कैसे होगी?
पृथ्वी पर वापसी का सबसे कठिन और अहम चरण 10 अप्रैल को होगा। इस दिन ओरियन स्पेसक्राफ्ट लगभग 40,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करेगा। इस दौरान तापमान करीब 2,760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
चुनौती से निपटने के लिए क्या करेंगे वैज्ञानिक?
इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक स्किप रीएंट्री तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। इसमें यान पहले थोड़ा वायुमंडल में प्रवेश करेगा, फिर थोड़ी देर के लिए बाहर निकलेगा और उसके बाद दोबारा प्रवेश करेगा। इस प्रक्रिया से अंतरिक्ष यात्रियों पर दबाव कम पड़ता है और लैंडिंग ज्यादा सुरक्षित होती है।
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समझिए कब पूरा होगा मिशन?
यह मिशन 11 अप्रैल को पूरा होगा। सुबह लगभग 5:37 बजे (भारतीय समयानुसार) यान कैलिफ़ोर्निया के सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में उतरेगा। वहां अमेरिकी नौसेना का जहाज यूएसएस जॉन पी. मुर्था पहले से मौजूद रहेगा। जैसे ही कैप्सूल समुद्र में उतरेगा, गोताखोर उसे सुरक्षित करेंगे और अंतरिक्ष यात्रियों को बाहर निकालकर जहाज पर ले जाया जाएगा। गौरतलब है कि यह मिशन बेहद खास है क्योंकि करीब 50 साल बाद इंसान फिर से चंद्रमा के इतना पास तक पहुंचे हैं। यह भविष्य में इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है।
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