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CBP: बंद होगी 58 साल पुरानी अमेरिकी पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग संस्था, ट्रंप प्रशासन की फंडिंग कटौती बनी बड़ी वजह

Sat, 02 Aug 2025 03:49 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 02 Aug 2025 03:49 AM IST
सार

अमेरिका की 58 साल पुरानी सार्वजनिक प्रसारण संस्था 'कॉरपोरेशन फॉर पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग' (सीपीबी) ने फंडिंग बंद होने के बाद अपने कार्यों को समाप्त करने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन की आलोचना के बीच कांग्रेस और सीनेट ने संस्था को बजट से बाहर कर दिया। 

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Corporation for Public Broadcasting to shut down after being defunded by Congress targeted by Trump
अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था कॉरपोरेशन फॉर पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग (सीपीबी) ने शुक्रवार को एक बड़ा ऐलान किया कि वह अब अपने कार्यों को बंद करने की दिशा में कदम उठाने जा रही है। इसका कारण है अमेरिकी कांग्रेस द्वारा उसकी फंडिंग पूरी तरह से बंद किया जाना। बता दें कि लगभग 58 वर्षों से यह संस्था देशभर में शैक्षिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक कंटेंट और आपातकालीन सूचनाओं के प्रसारण में अहम भूमिका निभा रही थी।

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देखा जाए सीपीबी के जरिए ही पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (पीबीएस) और नेशनल पब्लिक रेडियो (एनपीआर) जैसे मंचों को फंडिंग मिलती थी। वहीं मामले में संस्था की अध्यक्ष और सीईओ पेट्रीशिया हैरिसन ने कहा कि लाखों अमेरिकियों ने कांग्रेस से सीपीबी की फंडिंग बचाने की अपील की, लेकिन अब हमें अपनी सेवाएं समाप्त करने की कठिन सच्चाई को स्वीकार करना पड़ रहा है।
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ट्रंप प्रशासन का सार्वजनिक मीडिया पर हमला
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से सार्वजनिक मीडिया के आलोचक रहे हैं। उनका मानना है कि यह मीडिया सरकारी विरोधी राजनीतिक और सांस्कृतिक विचार फैलाता है। उनकी सरकार ने पहले ही सीपीबी के बजट में कटौती की शुरुआत कर दी थी और अब कांग्रेस के बजट पैकेज में इसे पूरी तरह हटा दिया गया है। इस सप्ताह सीनेट की अप्रूप्रियेशन कमेटी ने भी 50 वर्षों में पहली बार सीपीबी को फंड देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद संस्था ने अपने समापन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया।

छोटे शहरों की मीडिया पर बड़ा असर
सीपीबी के बंद होने से अमेरिका के छोटे और दूरदराज इलाकों में स्थित सार्वजनिक रेडियो और टीवी स्टेशनों पर बड़ा असर पड़ेगा। यही माध्यम इन क्षेत्रों के लिए न्यूज़, शिक्षा, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मुख्य स्रोत थे। गौरतलब है कि सीपीबी की मदद से ही सेसमी स्ट्रीट, मिस्टर रॉजर्स नेबरहुड और केन बर्न्स की डॉक्यूमेंट्री जैसे ऐतिहासिक कार्यक्रमों का निर्माण संभव हो पाया था। ऐसे में अब संस्था सुनियोजित तरीके से अपने कार्यों को समाप्त करने की प्रक्रिया में जुट गई है। इससे एक युग का अंत हो रहा है जिसने अमेरिकी समाज को शिक्षा और संस्कृति के स्तर पर दशकों तक समृद्ध किया।

यहूदी छात्रों के साथ भेदभाव के आरोप में ट्रंप प्रशासन ने यूसीएलए के 339 मिलियन डॉलर के रिसर्च फंड पर रोक लगाई
अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजेलिस (यूसीएलए ) को मिलने वाले 339 मिलियन डॉलर (करीब 2,825 करोड़ रुपये) के रिसर्च फंड पर फ्रीज (रोक) लगा दी है। सरकार का आरोप है कि विश्वविद्यालय में यहूदी और इजरायली छात्रों के साथ भेदभाव, आरक्षण संबंधी नियमों का उल्लंघन और महिला खेलों में लैंगिक भेदभाव हुआ है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने यूसीएलए को बताया कि उसने नागरिक अधिकार कानून और संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन किया है। आरोप है कि यूसीएलए ने जानबूझकर एक ऐसा माहौल बनने दिया जो यहूदी और इजरायली छात्रों के लिए असहज और भेदभावपूर्ण था।

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कौन-कौन सी एजेंसियों ने फंड रोका?
स्वास्थ्य विभाग (एचएचएस) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) ने अकेले $240 मिलियन की फंडिंग रोक दी। नेशनल साइंस फाउंडेशन और ऊर्जा विभाग (डीओई) ने भी फंडिंग रोकने का निर्णय लिया। डीओई ने यह भी कहा कि यूसीएलए ने जातीय पहचान, पारिवारिक आय और जिप कोड को दाखिले में महत्व देकर नस्ल-आधारित आरक्षण को नए तरीके से लागू किया है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले और कैलिफोर्निया के कानून के खिलाफ है।

यूसीएलए की प्रतिक्रिया
चांसलर जूलियो फ्रेंक ने इस फैसले को “बेहद निराशाजनक” बताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से सैकड़ों शोध परियोजनाएं प्रभावित होंगी और हमारे वैज्ञानिकों का जीवन बदलने वाला कार्य खतरे में पड़ जाएगा। यूसीएलए ने हाल ही में यहूदी छात्रों और एक प्रोफेसर के साथ हुए भेदभाव के मामले में 6 मिलियन डॉलर का समझौता किया। आरोप था कि 2024 में प्रोपैलेस्टीनियन प्रदर्शनकारियों ने यहूदी छात्रों को कक्षाओं और कुछ क्षेत्रों में जाने से रोका और यूसीएलए इसे रोकने में असफल रहा।

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