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Hindi News ›   World ›   Coronavirus Case News In Hindi : Herd immunity is also not guaranteed to prevent infection, this is the reason

‘हर्ड इम्युनिटी’ भी संक्रमण रोकने की गारंटी नहीं, यह है वजह

Mon, 11 May 2020 05:53 AM IST
योगेश साहू न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, न्यूयॉर्क।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, न्यूयॉर्क। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 11 May 2020 05:53 AM IST
सार

दुनियाभर में कुछ अरसे से कोरोना से बचाव के लिए कुदरती ‘हर्ड इम्युनिटी’ या सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता का रास्ता अपनाने पर बहस छिड़ी है। एक ओर कई महामारी विशेषज्ञ लॉकडाउन से आर्थिक-सामाजिक नुकसान के चलते इसकी पैरवी कर रहे हैं, तो कुछ वैज्ञानिक इससे बड़ी तादाद में मौत को लेकर चेता रहे हैं। यही वजह है कि अधिकतर देशों ने इससे दूरी बना रखी है। लोगों के जमावड़े के फायदे व नुकसान पर विशेषज्ञों के तर्क समेटे यह रिपोर्ट...

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Coronavirus Case News In Hindi : Herd immunity is also not guaranteed to prevent infection, this is the reason
लंदन में लॉकडाउन के दौरान घरों से बाहर निकले साइकल सवार। - फोटो : PTi

विस्तार

भारत, अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने लॉकडाउन और सामाजिक दूरी जैसे उपायों से ही कोरोना से लड़ने की ठानी है। हालांकि, स्वीडन जैसे देश ने नुकसान झेलते हुए हर्ड इम्युनिटी हासिल करने में कुछ हद तक सफलता भी पाई है।
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इसके चलते विश्व में राजनेताओं और महामारी विशेषज्ञों का एक तबका यह विकल्प चुनने के पक्ष में दिख रहा है। हालांकि कई चिकित्सक और विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि हमें यह नहीं मान लेना चाहिए कि हर्ड इम्युनिटी के बाद वायरस अचानक गायब हो जाएगा। हां, इसकी रफ्तार जरूर धीमी हो जाएगी।
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ऐसे समझें हर्ड इम्युनिटी: कम से कम 60 फीसदी आबादी हो संक्रमित
किसी महामारी से बचने का एकमात्र तरीका है- प्रतिरक्षा। यह प्रतिरक्षा हासिल करने के दो ही रास्ते हैं। पहला, वैक्सीन और दूसरा बीमारी से शरीर में एंटीबॉडी निर्माण। जितने ज्यादा लोगों में प्रतिरक्षा होगी, बीमारी उतनी ही कम फैलेगी या थम जाएगी।
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दूसरे शब्दों में इसी को हर्ड इम्युनिटी कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कोविड-19 की बात करें तो 60 से 85 प्रतिशत आबादी में प्रतिरक्षा आने से हर्ड इम्यूनिटी बन पाएगी। डिप्थीरिया में यह आंकड़ा 75 प्रतिशत, पोलियो में 80 से 85 प्रतिशत और मीजल्स में 95 प्रतिशत है।

वायरस थमेगा, गायब नहीं होगा

कोरोना में अनुमानित तौर पर एक संक्रमित औसतन तीन लोगों को बीमार कर रहा है। इसका मतलब है कि दो तिहाई आबादी में हर्ड इम्युनिटी आने पर ही इेसका प्रसार थमेगा। फिलहाल वैक्सीन न होने से संक्रमित होकर ही प्रतिरक्षा बन सकती है।

यानी भविष्य में संक्रमण से बचने के लिए बड़ी आबादी को अभी संक्रमित होना होगा। लेकिन, वैज्ञानिकों ने हर्ड इम्युनिटी से भविष्य में संक्रमण से पूरी तरह बचाव की पुष्टि नहीं की है। साथ ही, यह भी नहीं पता लगा है कि यह कितनी टिकाऊ होगी।

एक लाख संक्रमित 90 हजार को फिर भी करेंगे बीमार...
वैज्ञानिकों का तर्क है कि एक संक्रमित से वायरस अब कम लोगों में फैलेगा। यानी महामारी जारी रहेगी। मसलन, अगर एक लाख लोग संक्रमित होंगे तो वे कम से कम 90 हजार लोगों को फिर भी संक्रमित कर सकते हैं।

इस प्रकार जब तक महामारी खत्म होगी तब तक अनुमान से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके होंगे। यह आंकड़ा दो तिहाई आबादी में हर्ड इम्युनिटी आने से महामारी रुकने के अनुमान को भी पार कर सकता है।

वैक्सीन से ही मिलते हैं ज्यादा प्रभावी परिणाम

अगर पर्याप्त संख्या में आबादी को वैक्सीन दे दी जाए तो फिर उससे आसानी से रोगाणु नहीं फैलता। मसलन, अगर कोई खसरा से पीड़ित है और उसके संपर्क में आने वाले लोगों को वैक्सीन दे रखी है तो इसका प्रसार नहीं होगा।

स्वीडन ने चुनी यह राह, पर नुकसान भी भुगता

कुछ देशों ने अपनी आबादी में बिना वैक्सीन के सुरक्षित ढंग से प्रतिरक्षा विकसित करने का रास्ता चुना है। मसलन, स्वीडन ने बुजुर्गों और खराब स्वास्थ्य वाले लोगों को घरों में रखा है। वहीं, नौवीं कक्षा तक के स्कूल, रेस्तरां-बार और सार्वजनिक यातायात खुला रखा है।

कुछ विशेषज्ञों ने आर्थिक नुकसान न सह सकने वाले देशों के लिए इस तरीके को अच्छा बताया है। लेकिन अन्य वैज्ञानिकों ने अधिक मौतों की आशंका देखते हुए इसे खारिज किया है। सिर्फ एक करोड़ आबादी वाले स्वीडन में तीन हजार से ज्यादा लोग मर चुके हैं, जो उसके पड़ोसियों से कहीं ज्यादा है।

कहीं ले न डूबे अतिआत्मविश्वास
वैज्ञानिकों का कहना है, अभी से कुदरती हर्ड इन्युनिटी का रास्ता अपनाना जल्दबाजी होगी। उनका मानना है कि इस कदम से संक्रमण के खिलाफ असरदार वैक्सीन आने से पहले ही बहुत बड़ी आबादी संक्रमित हो जाएगी, जिसे संभालना मुश्किल हो सकता है। ज्यादा तादाद में संक्रमितों को नियंत्रित करने को लेकर कुछ देशों को अतिआत्मविश्वास नहीं दिखाना चाहिए।

सामाजिक दूरी से ही संक्रमण थम सकेगा

किसी भी संक्रामक महामारी के इलाज के अभाव में सामाजिक दूरी ही विकल्प होता है। इसी से संक्रमितों की संख्या कम की जा सकती है। इससे स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव कम पड़ता है और वैज्ञानिक बिरादरी को इसकी वैक्सीन या टीके बनाने का समय मिल जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक न्यूजीलैंड और ताइवान ने सामाजिक दूरी जैसे उपाय से सफलता हासिल की है। उनसे अन्य देशों को भी सीखना चाहिए।

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