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#CoronaPositive: कोरोना से जंग जीतकर लौटे बेन बोले- इस बीमारी को हल्के में मत लीजिए
Tue, 07 Apr 2020 10:35 AM IST
Rohit Ojha
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Tue, 07 Apr 2020 10:35 AM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : पीटीआई
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कोरोना वायरस की महामारी के संकट से पूरी दुनिया परेशान है, लेकिन इस बीच कुछ राहत की खबरें भी मिल रही हैं। डॉक्टर इस बीमारी को हराने के लिए जुटे हैं, इसका नतीजा दिख भी रहा है। संक्रमित मरीज ठीक होकर अपने घर लौट रहे हैं। इन्हीं लोगों में से एक हैं अमेरिका के टेक्सास के रहने वाले बेन किंग। बेन कोरोना से जंग जीतकर अपने घर लौट आए हैं, लेकिन अभी वो क्वारंटीन में हैं। उनकी पत्नी क्रिस्टिन नर्स हैं।
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बेन किंग कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान अस्पताल में बिताए वक्त को अपनी जिंदगी का सबसे भयावह वक्त बताते हैं। वे कहते हैं कि मैं सभी से, खास तौर पर युवाओं से कहना चाहूंगा कि इस बीमारी को मजाक मत समझिए। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि मैंने जो नर्क भोगा है, वो किसी और को भुगतना नहीं पड़े।
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उन्होंने बताया कि मैं अपने परिवार के साथ पांच दिनों के लिए क्रूज पर घूमने के लिए गया था, इसी दौरान इस बीमारी ने मुझे अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि उस समय मैं काफी फिट था, लेकिन कोरोना का संक्रमण बहुत जोर से मारता है। इलाज के दौरान अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे पहली दो रातों में ही मुझे लगने लगा कि अब मेरा बचना मुश्किल है, लेकिन मेरी किस्मत अच्छी निकली और मैं बच गया।
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बेन ने बताया कि हालत इतनी बिगड़ी कि मैं बोल नहीं पा रहा था, सिर में इतना दर्द था कि मैं अपनी आंखें भी नहीं खोल पा रहा था। कोरोना से लड़ाई मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई रही। मैं हर दिन भगवान से प्रार्थना करता था और कहता कि प्लीज भगवान मुझे मरने मत देना।
उन्होंने कहा कि अगर आपके पास परिवार, बच्चे, दोस्त हैं और ऐसा कुछ है जिसके लिए आप जिंदा रहना चाहते है, तो रिस्क मत लीजिए। महीना गुजर गया, लेकिन अपनी दोनों बेटियों से मैं नहीं मिल पाया हूं और अप्रैल तक मिल भी नहीं पाउंगा।
बेन ने कहा कि हमारी जान बचाने कि लिए डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, कर्मचारी सभी अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। अगर हम अब भी नहीं समझ पा रहे हैं, तो मेरे विचार में हम सबसे बड़े मूर्ख हैं।
लंबे संघर्ष के बाद घर लौटे
बेन जिस अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थे, उनकी पत्नी क्रिस्टिन उस अस्पताल में नर्स हैं। वे बताती हैं कि जब 25 मार्च को बेन को कोरोना से संक्रमित होने का पता चला तो कोई नहीं समझ पाया कि क्या हुआ है। धीरे-धीरे बेन की हालत बिगड़ने लगी, तो इन्हें अस्पताल लेकर गए।
वहां से दवा देकर घर भेज दिया गया, लेकिन उनका बुखार 104 डिग्री से कम ही नहीं हो रहा था, सांस लेने में दिक्कत भी बढ़ रही थी। क्रिस्टिन ने कहा कि बेन एक मुश्किल वक्त और लंबे संघर्ष के बाद घर लौटे हैं।