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Hindi News ›   World ›   COP15 delegate says India can comfortably reach the target of protecting 30 percent of land and water by 2030

COP-15: भारत 2030 तक कर सकता है 30 फीसदी भूमि-जल संरक्षण, सीओपी-15 जैव विविधता सम्मेलन में बोले प्रतिनिधि

Wed, 14 Dec 2022 02:11 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, मॉन्ट्रियल।
एजेंसी, मॉन्ट्रियल। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 14 Dec 2022 02:11 AM IST
सार

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) के सचिव जे. जस्टिन मोहन ने कहा कि भारत 113 देशों के ‘हाई एम्बिशन कोलिशन’ (एचएसी) का सदस्य है जिसका मकसद 30 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को 2030 तक संरक्षित करना है।

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COP15 delegate says India can comfortably reach the target of protecting 30 percent of land and water by 2030
बायोडायवर्सिटी पार्क (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कनाडा में सीओपी-15 जैव विविधता सम्मेलन में भारत की नुमाइंदगी कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत का करीब 27 फीसदी क्षेत्र संरक्षित है। उन्होंने कहा कि भारत 2030 तक 30 प्रतिशत भूमि और जल की रक्षा के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकता है। 

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कनाडा के मॉन्ट्रियल में जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र की संधि के लिए पक्षकारों के सम्मेलन की 15वीं बैठक (सीओपी-15) चल रही है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) के सचिव जे. जस्टिन मोहन ने कहा कि भारत 113 देशों के ‘हाई एम्बिशन कोलिशन’ (एचएसी) का सदस्य है जिसका मकसद 30 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को 2030 तक संरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि संरक्षित वन, राष्ट्रीय उद्यान, मैनग्रोव, वन्यजीव अभयारण्य, रामसर स्थल, पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र और सामुदायिक रूप से संरक्षित क्षेत्र समेत भारत ने पहले ही करीब 27 फीसदी क्षेत्र संरक्षित कर लिया है।
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उन्होंने कहा कि अब हम जैव विविधता धरोहर स्थल और अन्य प्रभावी संरक्षण उपायों (ओईसीएमएस) के जरिए और अधिक इलाकों को संरक्षण के तहत लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ओईसीएमएस वे इलाके होते हैं जो निजी तथा सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा संरक्षित होते हैं। मोहन ने कहा, भारत में ओईसीएमएस के लिए असीम संभावना है और इससे अपने 30 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को संरक्षित करने के हमारे लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
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स्थानीय समुदाय में जागरूकता जरूरी
भारत के राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) के पूर्व अध्यक्ष विनोद माथुर ने कहा कि भारत ने ओईसीएमएस को परिभाषित करने के लिए 14 श्रेणी की वर्गीकरण प्रणाली बनाई है। इन्हें तीन व्यापक समूहों-क्षेत्रीय, जलाशयों और समुद्री इलाकों के तहत वर्गीकृत किया गया है। हालांकि, इन ओईसीएमएस को संरक्षित करने के लिए स्थानीय समुदाय को जागरूक करने की आवश्यकता है।

रोजगार के अवसर पैदा होंगे
एनबीए के सचिव जस्टिन मोहन ने कहा, जैव विविधता धरोहर स्थलों को औषधीय पौधों व पक्षियों से समृद्ध हो सकते हैं। ये इलाके में पारिस्थितिकी प्रबंधन में मदद करेंगे और पर्यटन की संभावना बढ़ाएंगे, जिससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मोहन ने कहा कि 2002 का जैविक विविधता कानून अन्य वन्य कानूनों के साथ सौहार्द्रपूर्ण तरीके से काम करता है जिससे स्वदेशी समुदायों की आजीविका में मदद मिलती है।

शिक्षा, सेहत, पेयजल परियोजनाओं में नेपाल को सहयोग करेगा भारत

नेपाल सरकार के संघीय मामलों के मंत्रालय व सामान्य प्रशासन और भारतीय दूतावास के बीच तीन उच्च प्रभाव वाली विकास योजनाएं शुरू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए गए। भारत सरकार की अनुदान सहायता के तहत नेपाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल क्षेत्र में यह समझौते किए गए हैं। करीबी पड़ोसियों के रूप में भारत और नेपाल व्यापक और बहु-क्षेत्रीय आपसी सहयोग साझा करते हैं।

तीन परियोजनाओं में उदयपुर जिले में श्री जनता बेलाका सेकेंडरी स्कूल भवन का निर्माण, सोलुखुम्बु जिले में नोंगा थेनचौक छोलिंग ध्यान केंद्र का निर्माण, और धाडिंग जिले में लिस्नेखोला टिकासुंग डंगचेत झारलांग जलापूर्ति परियोजना का निर्माण शामिल है। परियोजनाओं की अनुमानित लागत 10.17 करोड़ नेपाली रुपये (लगभग 6.31 करोड़ भारतीय रुपये) आंकी गई है।

नेपाल में भारत के दूतावास ने कहा कि इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन से लोगों के उत्थान में नेपाल सरकार के प्रयासों को मजबूत करने में भारत सरकार के समर्थन का पता चलता है। इन परियोजनाओं के निर्माण से स्थानीय समुदाय के लिए बेहतर शिक्षा सुविधाएं, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं और सुरक्षित पेयजल सुविधाएं उपलब्ध होंगी और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

भारत ने वर्ष 2003 से नेपाल में 532 से अधिक उच्च प्रभाव विकास परियोजनाओं को अपने हाथ में लिया है और नेपाल के सभी सात प्रांतों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कनेक्टिविटी, स्वच्छता और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं के निर्माण के क्षेत्रों में 476 परियोजनाओं को पूरा किया है।

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