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ग्वाटेमाला में कंजर्वेटिव उम्मीदवार अलेजांद्रो गियामाटेई ने जीता राष्ट्रपति चुनाव
Tue, 13 Aug 2019 02:37 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 13 Aug 2019 02:37 AM IST
सार
- अलेजांद्रो गियामाटेई को राष्ट्रपति पद के लिए मिले 60 प्रतिशत मत
- देश की बड़ी आबादी गरीबी में जी रही है और पलायन को मजबूर है
- चुनाव पूर्व के अनुमानों से उलट वह सत्ता पर काबिज हुए हैं
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Alejandro Giamatei
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
लेटिन अमेरिकी देश ग्वाटेमाला में इस बार मतदाताओं का उत्साह बेहद ही कम देखा गया। सिर्फ 41 प्रतिशत मतदान के बीच ग्वाटेमाला में राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी के प्रत्याशी अलेजांद्रो गियामाटेई ने जीत दर्ज की है।
गियामाटेई की करीबी प्रतिद्वंद्वी पूर्व प्रथम महिला एवं सोशल डेमोक्रेट सैंड्रा टोरेस को 40 प्रतिशत मत ही मिल सके हैं। निवर्तमान राष्ट्रपति जिमी मोराल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और इस चुनाव में यही प्रमुख मुद्दा रहा क्योंकि देश की बड़ी आबादी गरीबी में जी रही है और पलायन को मजबूर है।
अपनी जीत का दावा करते हुए गियामाटेई ने कहा कि लक्ष्य पूरा हुआ। पूर्व जेल डायरेक्टर गियामाटेई के आलोचकों का कहना है कि गरीबी, भ्रष्टाचार और अवैध प्रवासी संकट से देश को निकालने के लिए गियामाटेई के पास पर्याप्त अनुभव नहीं है। हालांकि, चुनाव पूर्व के अनुमानों से उलट वह सत्ता पर काबिज हुए हैं।
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भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एकजुटता
इससे पहले वर्ष 2015 में ग्वाटेमाला में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हजारों लोग एकजुट हुए थे और तत्कालीन सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। यही कारण है कि इस बार मतदाताओं का रुझान चुनाव को लेकर काफी घटा हुआ रहा। इस लेटिन अमेरिकी देश की आर्थिक रफ्तार स्थिर जरूर है, लेकिन देश के कुछ हिस्से बेहद गरीबी में हैं।
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गियामाटेई की करीबी प्रतिद्वंद्वी पूर्व प्रथम महिला एवं सोशल डेमोक्रेट सैंड्रा टोरेस को 40 प्रतिशत मत ही मिल सके हैं। निवर्तमान राष्ट्रपति जिमी मोराल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और इस चुनाव में यही प्रमुख मुद्दा रहा क्योंकि देश की बड़ी आबादी गरीबी में जी रही है और पलायन को मजबूर है।
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अपनी जीत का दावा करते हुए गियामाटेई ने कहा कि लक्ष्य पूरा हुआ। पूर्व जेल डायरेक्टर गियामाटेई के आलोचकों का कहना है कि गरीबी, भ्रष्टाचार और अवैध प्रवासी संकट से देश को निकालने के लिए गियामाटेई के पास पर्याप्त अनुभव नहीं है। हालांकि, चुनाव पूर्व के अनुमानों से उलट वह सत्ता पर काबिज हुए हैं।
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भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एकजुटता
इससे पहले वर्ष 2015 में ग्वाटेमाला में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हजारों लोग एकजुट हुए थे और तत्कालीन सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। यही कारण है कि इस बार मतदाताओं का रुझान चुनाव को लेकर काफी घटा हुआ रहा। इस लेटिन अमेरिकी देश की आर्थिक रफ्तार स्थिर जरूर है, लेकिन देश के कुछ हिस्से बेहद गरीबी में हैं।