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US: रुढ़िवादी अमेरिकी लेखिका की हुई आलोचना, भारतीय-अमेरिकी हेली और रामास्वामी के खिलाफ की थी नस्लवादी टिप्पणी
Fri, 25 Aug 2023 04:22 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 25 Aug 2023 04:22 PM IST
सार
61 वर्षीय कूल्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने ट्वीट में कहा, ऐसा लगता है कि निक्की और विवेक किसी हिंदू पेशे में शामिल हैं। यह हमारी लड़ाई नहीं है। इसके लिए गुरुवार को उन्हें उस समय आलोचना का सामना करना पड़ा, जब रामास्वामी की वरिष्ठ सलाहकार और संचार निदेशक, ट्रिसिया मैकलॉघलिन ने कहा कि कूल्टर जो चाहें ट्वीट कर सकती हैं।
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अमेरिकी लेखिका ऐन कूल्टर (फाइल फोटो)।
- फोटो : Twitter@AnnCoulter
विस्तार
प्रमुख अमेरिकी रूढ़िवादी मीडिया पंडित और लेखिका ऐन कूल्टर को दो भारतीय मूल की अमेरिकी निक्की हेली और विवेक रामास्वामी के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणी करने और उन्हें "हिंदू पेशा" कहने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। निक्की हेली और विवेक रामास्वामी अमेरिकी राष्ट्रपति पद के दावेदार हैं। अमेरिकी मीडिया ने गुरुवार को बताया कि बुधवार रात पहली रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की बहस के दौरान कोल्टर ने दक्षिण कैरोलिना की पूर्व गवर्नर निक्की हेली और बायोटेक उद्यमी विवेक रामास्वामी के बीच तीखी नोकझोंक को "हिंदुओं का पेशा" बताया।
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61 वर्षीय कूल्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने ट्वीट में कहा, ऐसा लगता है कि निक्की और विवेक किसी हिंदू पेशे में शामिल हैं। यह हमारी लड़ाई नहीं है। इसके लिए गुरुवार को उन्हें उस समय आलोचना का सामना करना पड़ा, जब रामास्वामी की वरिष्ठ सलाहकार और संचार निदेशक, ट्रिसिया मैकलॉघलिन ने कहा कि कूल्टर जो चाहें ट्वीट कर सकती हैं।
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Nikki and Vivek are involved in some Hindu business, it seems. Not our fight.
— Ann Coulter (@AnnCoulter) August 24, 2023
मैकलॉघलिन ने अपने ट्वीट में कहा, ऐन जो चाहे ट्वीट कर सकती है। उन्होंने आगे कहा, विवेक उन्हीं यहूदी-ईसाई मूल्यों को साझा करते हैं और जीते हैं, जिन पर इस देश की स्थापना हुई थी और जिस तरह से विवेक अपना पारिवारिक जीवन जीते हैं, वह उनके अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण है। 38 वर्षीय रामास्वामी हिंदू हैं जबकि 51 वर्षीय हेली एक सिख परिवार में पैदा हुईं और ईसाई हैं, जिसके बारे में वह अपने सार्वजनिक जीवन में मुखर रही हैं।
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मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कूल्टर जिस गरमागरम बहस का जिक्र कर रही थी, वह धर्म के बारे में भी नहीं थी, बल्कि यूक्रेन और इस्राइल को अमेरिकी सहायता के बारे में थी। रूढ़िवादियों और उदारवादियों दोनों ने कूल्टर की टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की है। कूल्टर की नस्लवादी टिप्पणी का जवाब देते हुए एक ट्वीट में बिना सोचे समझे एक व्यक्ति ने कहा, निक्की हेली जन्म से ही सिख थीं और एक ईसाई हैं, आप नस्लवादी ट्रोग्लोडाइट हैं।
"डेसिस डिवाइडेड: द पॉलिटिकल लाइव्स ऑफ साउथ एशियन अमेरिकन्स" की लेखक सांगय मिश्रा ने कहा, पूरी उम्मीद थी कि वह उन पर हमला करेंगी, लेकिन एक धर्म का हवाला देकर श्वेत नस्लवाद का इस्तेमाल करना घृणित है। इस चुनाव चक्र में यह पहली बार नहीं है कि कूल्टर हेली के बारे में नस्लवादी टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रही हैं। इससे पहले फरवरी में कूल्टर ने एक पॉडकास्ट पर बड़े व्यंग्य के साथ हेली को अपने देश वापस जाने के लिए कहा था, जिसके बाद भी उनकी आलोचना की गई थी।
"द मार्क सिमोन शो" पॉडकास्ट पर एक उपस्थिति के दौरान कूल्टर ने कहा था, गायों की पूजा करने से क्या हुआ? वे सभी वहां भूख से मर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि उनके पास एक चूहे का मंदिर है, जहां वे चूहों की पूजा करते हैं? कूल्टर ने हेली को "बिम्बो" और "बेतुका प्राणी" भी कहा है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हेली ने टिप्पणी के अनुरोधों पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।