Myanmar: म्यांमार के सीमाई इलाकों में गृह युद्ध तेज, इकॉनमिक कॉरिडोर बना शिकार
म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम मिकोंग डेल्टा क्षेत्र में आते हैं। इन देशों को जोड़ने के लिए 1,700 किलोमीटर लंबे ईस्ट-वेस्ट इकॉनमिक कॉरिडोर के निर्माण का कार्य शुरू किया गया था...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
म्यांमार की थाईलैंड से लगी सीमा पर सेना और सैनिक शासन विरोधी विद्रोहियों के बीच तेज लड़ाई जारी है। इस क्षेत्र में म्यांमार के नस्लीय अल्पसंख्यक समुदाय रहते हैं, जिन्होंने देश की सेना के खिलाफ हथियारबंद बगावत का रास्ता अख्तियार कर रखा है। इस लड़ाई के कारण एक बड़ी आर्थिक विकास परियोजना पर काम ठप हो गया है। इस परियोजना का निर्माण पूरा होने पर म्यांमार के मिकोंग डेल्टा देशों के साथ कारोबार में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम मिकोंग डेल्टा क्षेत्र में आते हैं। इन देशों को जोड़ने के लिए 1,700 किलोमीटर लंबे ईस्ट-वेस्ट इकॉनमिक कॉरिडोर के निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। परियोजना पर काम लगभग पूरा ही होने वाला था, जब दो साल साल पहले म्यांमार में सेना ने निर्वाचित सरकार का तख्ता पलट दिया। उसके बाद नस्लीय अल्पसंख्यक बागियों ने सशस्त्र विद्रोह का रास्ता अपना लिया।
थाईलैंड और म्यांमार के बीच ट्रक परिवहन की सेवा देने वाली एक जापानी कंपनी के कर्मचारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा- ‘अप्रैल में अचानक ट्रक और ड्राइवर मिलना बहुत मुश्किल हो गया।’ पिछले मार्च से समुद्री मार्ग से म्यांमार को सामान भेजने या वहां मंगवाने की लागत में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।
थाईलैंड और म्यांमार के बीच जमीनी रास्ते परिवहन के एक बड़े जरिया के रूप में एशिया हाईवे-1 परियोजना निर्मित की जा रही है। ये सड़क थाईलैंड के मध्य में स्थित माये सोट से म्यांमार में मयावादी तक जाएगी। लेकिन इस इलाके पर करेन नेशनल यूनियन नाम के उग्रवादी संगठन का कब्जा है। करेन नेशनल यूनियन उन 20 नस्लीय उग्रवादी संगठनों में एक है, जिनका म्यांमार की सेना से ‘युद्ध’ चल रहा है।
करेन नेशनल यूनियन और सेना के बीच 2019 में एक समझौता हुआ था। उसमें यूनियन ने कॉरिडोर का निर्माण होने देने पर अपनी सहमति जताई थी। उसके बाद निर्माण कार्य तेज हुआ था। निर्माण में थाईलैंड बड़ी भूमिका निभा रहा था। इस बीच मुख्य मार्गों पर पुल हटाने और बनाने का काम एक जापानी कंपनी कर रही थी।
जानकारों के मुताबिक फरवरी 2021 में म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट के बाद हालात नाटकीय ढंग से बदल गए। करेन नेशनल यूनियन ने फिलहाल जेल में डाली जा चुकीं नेता आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) से हाथ मिला लिया है। उसने एनएलडी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने इलाके में पनाह दे रखी है।
इस वर्ष मार्च-अप्रैल में इस इलाके में लड़ाई तेज हो गई। करेन नेशनल यूनियन ने यहां नौजवानों को लेकर लॉयन बटालियन और कोबरा कॉलम जैसे दस्ते बनाए हैं। इन लोगों ने मार्च में कसीनो (जुआघर), कस्टम दफ्तरों और अन्य सरकारी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए। उसके बाद सेना ने जवाबी कार्रवाई की। बताया जाता है कि सेना की कार्रवाई में बागी गुटों को भारी नुकसान हुआ है। इस कारण इस क्षेत्र के दस हजार से ज्यादा निवासी विस्थापित होकर थाईलैंड चले गए हैँ। उधर ईस्ट-वेस्ट इकॉनमिक कॉरिडोर पर काम बिल्कुल ठप हो गया है।