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West Asia Tensions: इस्राइल ने खामनेई की हत्या कर बरसों पुरानी योजना को दिया अंजाम; सीआईए ने दी सटीक जानकारी
Sun, 01 Mar 2026 11:46 PM IST
Pavan
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: Pavan
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:46 PM IST
सार
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिका-इस्राइल के हमले मारे गए, इसके साथ ही इस्राइल की कई वर्षों की योजना आखिरकार सफल हो गई। वहीं अब इस हमले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए कई महीनों से खामेनेई और कई ईरानी नेताओं की गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए था। पहले हमला रात के अंधेरे में किया जाना था, सटीक जानकारी पर हमले का समय सुबह किया गया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट..
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खामेनेई की गतिविधियों पर नजर रख रहा था CIA
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका और इस्राइल ने सटीक खुफिया साझेदारी कर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य शीर्ष अधिकारियों को मार गिराने में सफलता हासिल की। इस ऑपरेशन में सबसे अहम भूमिका अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) की रही। हालांकि इस घटनाक्रम से बदले की कार्रवाई और बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
संयुक्त हमले से कई महीने पहले से सीआईए खामेनेई के ठिकानों और नियमित गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। इसी दौरान सीआईए को पता चला कि शनिवार सुबह तेहरान के बीचों-बीच एक लीडरशिप कंपाउंड में ईरान के शीर्ष अधिकारियों की बैठक होने वाली है और इसमें खामेनेई खुद शामिल होंगे। सीआईए ने पूरी तरह से सटीक इस खुफिया जानकारी को इस्राइल के साथ साझा किया। इस्राइल ने सीआईए और अपनी खुफिया जानकारी का इस्तेमाल कर पवित्र रमजान महीने के दौरान और ईरान के वर्किंग सप्ताह की शुरुआत में शीर्ष नेताओं की हत्या करने की अपनी वर्षों पुरानी योजना को अंजाम दिया।
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खुफिया जानकारी के बाद हमले का समय बदला गया
अमेरिका और इस्राइल की पहले ईरान पर रात के समय हमला करने की योजना थी लेकिन खामेनेई समेत बड़े अधिकारियों की बैठक के बारे में सीआईए की सटीक खुफिया सूचना के बाद दोनों देशों ने हमले का समय बदलने का निर्णय लिया। ईरान के सर्वोच्च नेता का कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद तीनों एक ही परिसर में स्थित हैं। इसे देखते हुए अमेरिका और इस्राइल ने शनिवार सुबह उस समय हमला किया जब खामेनेई समेत बड़े अधिकारी बैठक में मौजूद थे। हमले का समय बदलने की वजह से अमेरिका और इस्राइल को एक ही झटके में सबसे अहम कामयाबी हासिल हो सकी।
इन नेताओं को बनाया निशाना
इस्राइल को पहले से जानकारी थी कि बैठक में ईरान के कई ताकतवर सैन्य और सुरक्षा अधिकारी शामिल होने वाले हैं। इस्राइल का लक्ष्य था कि इन सभी को एक साथ खत्म किया जाए। इनमें सर्वोच्च नेता खामेनेई, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर, रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह, सैन्य परिषद के प्रमुख एडमिरल अली शमखानी, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स कमांडर सैयद माजिद मौसावी, उप खुफिया मंत्री मोहम्मद शिराजी और अन्य शामिल हैं।
ईरान के शीर्ष नेताओं ने बरती लापरवाही
इस पूरे ऑपरेशन से यह बात भी उजागर हुई कि ईरान के शीर्ष नेताओं ने खुद को बचाने के लिए पर्याप्त सावधानी नहीं बरती जबकि अमेरिका और इस्राइल लगातार संकेत दे रहे थे कि वे युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे नाजुक समय में शीर्ष अधिकारियों का एक ही जगह जुटना और खामेनेई का भी उसी परिसर में मौजूद रहना एक घातक रणनीतिक भूल साबित हुई।
ऐसे अंजाम दिए गए हमले
इस्राइल में सुबह करीब छह बजे लड़ाकू विमान अपने ठिकानों से उड़े। हमले में विमानों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन वे लंबी दूरी की और अत्यंत सटीक मिसाइलों से लैस थे। विमानों के उड़ान भरने के ठीक दो घंटे पांच मिनट बाद तेहरान के समयानुसार सुबह करीब 9:40 बजे मिसाइलें बेहद सुरक्षित सरकारी परिसर पर दागी गईं।
यह भी पढ़ें - PAK Protest: खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में भड़की हिंसा, ईरान समर्थक प्रदर्शनों में अब तक 10 लोगों की मौत
पिछले साल हुई जंग में जुटाई गई जानकारी आई काम
हमले के पहले ही दिन खामेनेई समेत कई बड़े अधिकारियों की हत्या अमेरिका और इस्राइल के बीच करीबी समन्वय और खुफिया साझेदारी का परिणाम है। दोनों देशों ने खासकर सीआईए ने ईरानी सर्वोच्च नेता समेत अन्य शीर्ष नेताओं के बारे में सटीक खुफिया सूचना जुटाई थी। इसकी जड़ें पिछले साल के 12 दिन तक चली जंग में हैं। उस दौरान सीआईए ने यह समझा कि दबाव की स्थिति में खामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) किस तरह से कार्रवाई करते हैं और क्या कदम उठाते हैं।
ईरानी नेतृत्व पर CIA ने बना रखी थी कड़ी नजर
इससे पहले द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि हमलों से पहले सीआईए ने ईरानी नेतृत्व की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी थी। हालांकि, अमेरिकी या इस्राइली अधिकारियों की ओर से इस ऑपरेशन के बारे में आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है। ऐसे में यह खुलासा पश्चिम एशिया की स्थिति को और संवेदनशील बना सकता है। फिलहाल, ईरान की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।
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संयुक्त हमले से कई महीने पहले से सीआईए खामेनेई के ठिकानों और नियमित गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। इसी दौरान सीआईए को पता चला कि शनिवार सुबह तेहरान के बीचों-बीच एक लीडरशिप कंपाउंड में ईरान के शीर्ष अधिकारियों की बैठक होने वाली है और इसमें खामेनेई खुद शामिल होंगे। सीआईए ने पूरी तरह से सटीक इस खुफिया जानकारी को इस्राइल के साथ साझा किया। इस्राइल ने सीआईए और अपनी खुफिया जानकारी का इस्तेमाल कर पवित्र रमजान महीने के दौरान और ईरान के वर्किंग सप्ताह की शुरुआत में शीर्ष नेताओं की हत्या करने की अपनी वर्षों पुरानी योजना को अंजाम दिया।
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खुफिया जानकारी के बाद हमले का समय बदला गया
अमेरिका और इस्राइल की पहले ईरान पर रात के समय हमला करने की योजना थी लेकिन खामेनेई समेत बड़े अधिकारियों की बैठक के बारे में सीआईए की सटीक खुफिया सूचना के बाद दोनों देशों ने हमले का समय बदलने का निर्णय लिया। ईरान के सर्वोच्च नेता का कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद तीनों एक ही परिसर में स्थित हैं। इसे देखते हुए अमेरिका और इस्राइल ने शनिवार सुबह उस समय हमला किया जब खामेनेई समेत बड़े अधिकारी बैठक में मौजूद थे। हमले का समय बदलने की वजह से अमेरिका और इस्राइल को एक ही झटके में सबसे अहम कामयाबी हासिल हो सकी।
इन नेताओं को बनाया निशाना
इस्राइल को पहले से जानकारी थी कि बैठक में ईरान के कई ताकतवर सैन्य और सुरक्षा अधिकारी शामिल होने वाले हैं। इस्राइल का लक्ष्य था कि इन सभी को एक साथ खत्म किया जाए। इनमें सर्वोच्च नेता खामेनेई, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर, रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह, सैन्य परिषद के प्रमुख एडमिरल अली शमखानी, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स कमांडर सैयद माजिद मौसावी, उप खुफिया मंत्री मोहम्मद शिराजी और अन्य शामिल हैं।
ईरान के शीर्ष नेताओं ने बरती लापरवाही
इस पूरे ऑपरेशन से यह बात भी उजागर हुई कि ईरान के शीर्ष नेताओं ने खुद को बचाने के लिए पर्याप्त सावधानी नहीं बरती जबकि अमेरिका और इस्राइल लगातार संकेत दे रहे थे कि वे युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे नाजुक समय में शीर्ष अधिकारियों का एक ही जगह जुटना और खामेनेई का भी उसी परिसर में मौजूद रहना एक घातक रणनीतिक भूल साबित हुई।
ऐसे अंजाम दिए गए हमले
इस्राइल में सुबह करीब छह बजे लड़ाकू विमान अपने ठिकानों से उड़े। हमले में विमानों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन वे लंबी दूरी की और अत्यंत सटीक मिसाइलों से लैस थे। विमानों के उड़ान भरने के ठीक दो घंटे पांच मिनट बाद तेहरान के समयानुसार सुबह करीब 9:40 बजे मिसाइलें बेहद सुरक्षित सरकारी परिसर पर दागी गईं।
- हमले के वक्त ईरान के वरिष्ठ अधिकारी परिसर की एक इमारत में थे जबकि खामेनेई पास की दूसरी इमारत में थे।
- खामेनेई के ठिकाने की पहचान होते ही इस्राइली लड़ाकू विमानों ने उस परिसर पर 30 बम गिराए।
- ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी, आईआरएनए ने दो शीर्ष सैन्य अधिकारियों रियर एडमिरल शमखानी और मेजर जनरल पाकपुर के मारे जाने की पुष्टि की।
- ऑपरेशन की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, ईरान के टॉप इंटेलिजेंस ऑफिसर बच गए, लेकिन ईरान की इंटेलिजेंस एजेंसियों के सीनियर रैंक के लोग मारे गए।
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पिछले साल हुई जंग में जुटाई गई जानकारी आई काम
हमले के पहले ही दिन खामेनेई समेत कई बड़े अधिकारियों की हत्या अमेरिका और इस्राइल के बीच करीबी समन्वय और खुफिया साझेदारी का परिणाम है। दोनों देशों ने खासकर सीआईए ने ईरानी सर्वोच्च नेता समेत अन्य शीर्ष नेताओं के बारे में सटीक खुफिया सूचना जुटाई थी। इसकी जड़ें पिछले साल के 12 दिन तक चली जंग में हैं। उस दौरान सीआईए ने यह समझा कि दबाव की स्थिति में खामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) किस तरह से कार्रवाई करते हैं और क्या कदम उठाते हैं।
ईरानी नेतृत्व पर CIA ने बना रखी थी कड़ी नजर
इससे पहले द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि हमलों से पहले सीआईए ने ईरानी नेतृत्व की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी थी। हालांकि, अमेरिकी या इस्राइली अधिकारियों की ओर से इस ऑपरेशन के बारे में आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है। ऐसे में यह खुलासा पश्चिम एशिया की स्थिति को और संवेदनशील बना सकता है। फिलहाल, ईरान की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।
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