Nepal: चीनी नेता ली झांशु ने की ओली, प्रचंड से वार्ता, दोनों देशों के बीच हुए छह समझौते
नेपाल की घरेलू राजनीति में पहले भी चीन का करीबी हस्तक्षेप रहा है। चीन ने सभी कम्युनिस्ट पार्टियों को साथ लाने का प्रयास किया और काफी हद तक कामयाब भी रहा।
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चीन में संसद प्रमुख और राजनीतिक पदानुक्रम में देश के तीसरे नंबर के नेता ली झांशु ने मंगलवार को नेपाल के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। झांशु ने खासतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल प्रचंड से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों व आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। ली-ओली वार्ता में अश्ट लक्ष्मी शाक्य, सुभाष नेमवांग और राजन भट्टाराई भी मौजूद रहे। जबकि प्रचंड के साथ कृष्ण बहादुर महारा, देव गुरुंग भी मौजूद थे। ली और नेपाली स्पीकर सपकोटा में अंतर-संसदीय सहयोग पर एमओयू भी साइन किया गया।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की अक्तूबर में होने वाली 20वीं कांग्रेस और नेपाल में नवंबर में होने वाले आम व प्रादेशिक चुनाव से पहले राष्ट्रपति शी के करीबी चीनी अधिकारी ली झानसू सोमवार को नेपाल के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे। चीन के नेतृत्व में ली तीसरे स्थान पर हैं। मार्च में विदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल यात्रा की थी।
नेपाल में भारत के पूर्व राजदूत रंजीत रे नेपाल की घरेलू राजनीति और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता की दृष्टि से इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। नेपाल के विदेश मंत्री ने भी मार्च में चीन का दौरा किया था। पिछले कुछ माह के दौरान चीन की ओर से उच्च स्तरीय नेताओं के दौरों का सिलसिला चल रहा है।
नेपाल की घरेलू राजनीति में पहले भी चीन का करीबी हस्तक्षेप रहा है। चीन ने सभी कम्युनिस्ट पार्टियों को साथ लाने का प्रयास किया और काफी हद तक कामयाब भी रहा। इसके बाद मतभेद के कारण एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन हो गया।
यह छिपा तथ्य नहीं है कि चीन नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों को साथ लाकर स्थायित्व चाहता है। उनके मुताबिक, अमेरिका भी नेपाल में 50 करोड़ डॉलर की मदद परियोजना चला रहा है। यह भी चीन की आंख की किरकिरी बना हुआ है।
चीनी कांग्रेस-नेपाल संसद के बीच हुए छह समझौते
चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन ली झानसू ने आधिकारिक दौरे के दौरान नेपाल की संसद के साथ छह सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किेए। नेपाल की ओर से प्रतिनिधि सभा के स्पीकर अग्नि प्रसाद सपकोटा ने इस पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के लिए संघीय संसद भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे को विधायी, पर्यवेक्षी और शासन प्रथाओं की जानकारी देंगे। चीन ने अपने महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) का इस समझौते में खासकर जिक्र किया है। समझौते के पांचवें बिंदु के मुताबिक, दोनों देशों की सरकारें बीआरआई समेत एक-दूसरे को प्राथमिकता, आपसी लाभ और प्रतिबद्धता को बढ़ावा देंगी।