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China: ताइवान को लेकर अमेरिका के साथ तनाव के बीच PLA का सरकार से आह्वान- जल्द बनाएं युद्धकालीन कानून

Sat, 11 Mar 2023 06:08 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 11 Mar 2023 06:08 PM IST
सार

चीन की संसद में पीएलए के प्रतिनिधियों ने अपने मौजूदा सत्र के दौरान इस तरह के कानून को तत्काल लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के एनपीसी में पीएलए के प्रतिनिधियों की पर्याप्त संख्या है।

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Chinese military pushes for wartime legislation amid escalating tension over Taiwan Report
चीन-ताइवान - फोटो : iStock

विस्तार

ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के  बीच तनाव अब भी कम नहीं हुआ है। इस बीच, चीन की सेना ने सरकार से आह्वान किया है कि वह देश की संप्रभुत्ता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर युद्धकालीन कानून बनाए। 

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हांगकांग स्थित अखबार 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' की खबर के अनुसार, चीन की विधायिका नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के प्रतिनिधियों ने अपने मौजूदा सत्र के दौरान इस तरह के कानून को तत्काल लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के एनपीसी में पीएलए के प्रतिनिधियों की पर्याप्त संख्या है, जिन्हें पार्टी के प्रस्तावों की नियमित मंजूरी के लिए 'रबर स्टैंप' के रूप में जाना जाता है। 
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युद्धकालीन कानून बनाने पर जोर देने वालों में शामिल पीएलए के डिप्टी वू शिहुआ ने कहा कि चीन को सेना के लिए इस कानून को बनाने में तेजी लानी चाहिए। पीएलएप के एक अन्य डिप्टी ये डाबिन ने कहा, युद्ध के समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हमें समय पर और व्यस्थित तरीके से युद्धकालीन कानून का अध्ययन शुरू करना चाहिए। 
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चीन, ताइवान को अपने देश का हिस्सा मानता है। जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र मानता है। चीन की बढ़ती ताकत के कारण ताइवान को संयुक्त राष्ट्र से एक राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं मिल पाई है। प्रांतीय सैन्य जिला शेदोंग के कमांडर झांग लाइक ने सुझाव दिया कि चीन को रिजर्व बलों को मोबिलाइज करने जैसे कानूनों को शुरू करने पर जोर देना चाहिए। अन्य प्रतिनिधियों ने पीएलए के उन विदेशी अभियानों के लिए कानूनी बदलाव लाने का आह्वान किया जिनका हाल के वर्षों में विस्तार हुआ है। इनमें जिबूती में सैन्य अड्डे की स्थापना, अदन की खाड़ी और सोमालिया के जलक्षेत्र में नौसैनिक एस्कॉर्ट मिशन शामिल हैं। 


दक्षिणी थिएटर कमान के पूर्व कमांडर युआन युबाई ने कहा कि बीजिंग को कानूनी अनुसंधान को मजबूत करना चाहिए और चीनी सेना के विदेशी मिशनों की तर्कसंगतता और वैधता में सुधार के लिए राष्ट्रीय रक्षा से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनों का अध्ययन करना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर को लेकर बढ़े तनाव के बीच आई है।

चीन, ताइवान को एक अलग प्रांत के रूप में देखता है और स्व-शासित द्वीप समूह को मुख्य भूमि से जोड़ने कोशिश करता रहा है। वह इसके लिए ताकत का संभावित इस्तेमाल करने से भी इनकार करता है। वहीं इस बीच अमेरिकी सेना और खुफिया अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 2027 के शुरुआत में ताइवान पर संघर्ष हो सकता है। बीजिंग ने दावा किया है कि अमेरिका चीन के खिलाफ ताइवान को मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है और वह इसके खिलाफ मजबूती से कदम उठाना जारी रखेगा। 

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