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अमेरिका को चेतावनी: एशिया-प्रशांत में भी बढ़ रहा है तनाव, चीन ने बोली धमकी की भाषा

Tue, 08 Mar 2022 07:45 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 08 Mar 2022 07:45 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन बार-बार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह देर-सबेर ताइवान को खुद में मिलाएगा। इसके लिए जरूरत पड़ने पर वह सैनिक ताकत का भी इस्तेमाल करेगा। हालांकि चीन ऐसा करने की जल्दबाजी में नहीं रहा है, लेकिन अनेक पर्यवेक्षकों की राय है कि यूक्रेन पर रूसी हमले से पैदा हुए संकट के बीच सूरत बदल गई है...

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Chinese Foreign Minister Wang Yi warn US for not to try to create a Ukraine-like situation in the Asia-Pacific region
दक्षिण चीन सागर - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन ने ताइवान के मुद्दे पर अपना रुख सख्त कर लिया है। साथ ही उसने संदेश देने की कोशिश की है कि ताइवान की स्थिति की तुलना यूक्रेन से करना उसे पसंद नहीं है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी सोमवार को अमेरिका को ये चेतावनी देते नजर आए कि वह एशिया प्रशांत क्षेत्र में यूक्रेन जैसे हालात पैदा करने की कोशिश ना करे। वांग के इस बयान के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने की संभावना पैदा हो गई है।

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बोला- होगा ताइवान का एकीकरण

चीन की संसद- नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की सालाना बैठक के मौके पर वांग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस मौके पर दिए गए बयान को चीन का नीति वक्तव्य समझा जाता है। चीनी विदेश मंत्री ने कहा- ‘इस क्षेत्र की जनता की शांति, विकास, सहयोग, और परस्पर लाभकारी परिणाम की अपेक्षाओं के खिलाफ अमेरिका की किसी पतित कार्रवाई का नाकाम होना तय है।’ उन्होंने कहा कि ताइवान के साथ सैनिक सहयोग और उसे हथियारों की बिक्री से न सिर्फ ताइवान के लिए खतरनाक स्थिति बनेगी, बल्कि उसके अमेरिका के लिए भी असहनीय नतीजे होंगे। वांग ने बेलाग कहा- ताइवान का आखिरकार अपनी मातृभूमि के साथ एकीकरण होना तय है।

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पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन बार-बार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह देर-सबेर ताइवान को खुद में मिलाएगा। इसके लिए जरूरत पड़ने पर वह सैनिक ताकत का भी इस्तेमाल करेगा। हालांकि चीन ऐसा करने की जल्दबाजी में नहीं रहा है, लेकिन अनेक पर्यवेक्षकों की राय है कि यूक्रेन पर रूसी हमले से पैदा हुए संकट के बीच सूरत बदल गई है। मुमकिन है कि इस संकट के बीच चीन ताइवान का मामला निपटा देने की कोशिश करे।
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उधर अमेरिकी कूटनीति के जानकारों की राय है कि अमेरिका एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) जैसी रणनीति को आगे बढ़ा रहा है। इसका मकसद चीन को घेरना है। इसी रणनीति के तहत क्वैड्रैंगुलर सिक्योरिटी डायलॉग (क्वैड) और ऑकुस का गठन किया गया है। क्वैड में अमेरिका के अलावा जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। ऑकुस ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका का सैन्य गठजोड़ है।

साउथ चाइना सी में सैन्य अभ्यास की शुरुआत

अब चीन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि इस अमेरिकी रणनीति के सामने वह चुप नहीं बैठेगा। उसने पिछले शुक्रवार को एलान किया था कि वह दक्षिण चीन सागर में हफ्ते भर के सैन्य अभ्यास की शुरुआत करने जा रहा है। चीनी टीकाकारों ने कहा है कि इस सैन्य अभ्यास का मकसद यह संदेश देना है कि अमेरिकी चुनौती के मद्देनजर चीन सैन्य ताकत के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेगा। इन टीकाकारों के मुताबिक हाल में ताइवान जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौ सेना की गतिविधियां तेज हो गई हैं। उसी के जवाब में अब चीन अपना सैन्य अभ्यास करने जा रहा है।



इस सिलसिले में अमेरिका स्थित चीन के राजदूत चिन गांग के एक बयान का जिक्र किया गया है। हाल में उन्होंने कहा था- ‘अगर ताइवानी अधिकारियों का अमेरिका की शह के कारण मनोबल बढ़ा है और उन्होंने आजादी की राह अपनाई, तो पूरी संभावना है कि इस मुद्दे पर चीन और अमेरिका के बीच सैनिक टकराव होगा।’ विश्लेषकों ने चीनी विदेश मंत्री के ताजा बयान को इसी सिलसिले में देखा है। उनके मुताबिक यह एशिया प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ने का साफ संकेत है।

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