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नेपाल के साथ भारत की बढ़ती निकटता से परेशान हुआ ड्रैगन, चीनी रक्षा मंत्री करेंगे काठमांडू का दौरा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 21 Nov 2020 01:09 PM IST

सार

  • भारत के विदेश सचिव के दौरे के बाद 29 नवंबर को चीनी रक्षा मंत्री पहुंचेंगे काठमांडू
  • नेपाल के कूटनीतिक जानकारों की राय, नेपाल पर प्रभाव बढ़ाने में लगी है भारत और चीन में होड़
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pm modi and oli
pm modi and oli - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार

नेपाल के भारत से सुधरते रिश्तों से परेशान चीन अब एक और हस्तक्षेप की तैयारी में है। यहां के अखबार ‘काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला का नेपाल दौरा पूरा होने के दो ही दिन बाद चीन के रक्षा मंत्री काठमांडू की यात्रा करेंगे। अखबार ने कहा है कि अभी नेपाल या चीन ने आधिकारिक तौर पर इस यात्रा की पुष्टि नहीं की है, लेकिन नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने इसकी जानकारी उसे दी है। इसके मुताबिक चीनी रक्षा मंत्री वेई 29 नवंबर को एक दिन की यात्रा पर नेपाल आएंगे। हर्षवर्धन शृंगला 26 और 27 नवंबर को नेपाल में रहेंगे।
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प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक जब पिछले मंगलवार को काठमांडू स्थित चीन के राजदूत होउ यांकी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मिले, तभी चीनी रक्षा मंत्री के नेपाल दौरे के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया था।



कूटनीतिक जानकार हाल में ये राय जताते रहे हैं कि नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए भारत और चीन के बीच होड़ बढ़ रही है। उनके मुताबिक भारत के साथ सीमा विवाद में उलझा चीन नेपाल की राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य घटनाओं की लगातार निगरानी कर रहा है।

सुरक्षा विश्लेषक गेजा प्रसाद शर्मा के मुताबिक चीन ने हाल में नेपाल के राजनीतिक और कूटनीतिक मामलों में काफी सक्रियता दिखाई है। वह अपनी सैनिक शक्ति का प्रदर्शन भी करता रहा है। शर्मा कांतिपुर अखबार के स्तंभकार भी हैं। उनके मुताबिक भारतीय विदेश सचिव की यात्रा के तुरंत बाद चीनी रक्षा मंत्री का नेपाल आना बेहद अहम घटना है।

हाल में भारत ने नेपाल से अपना संपर्क फिर मजबूत किया है। पिछले दिनों रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख सामंत गोयल और फिर सेनाध्यक्ष मनोज मुकंद नरवाणे ने नेपाल की यात्रा की। उसके बाद शृंगला के वहां जाने का कार्यक्रम बना। इससे ये संदेश गया है कि गुजरे एक साल में भारत-नेपाल संबंधों में जो गिरावट आई थी, उसे अब संभाल लिया गया है।

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी इस बीच अपना रुख बदला है। गुजरे महीनों में उन्होंने लगातार भारत विरोधी बयान दिए थे। उनकी सरकार ने नेपाल का नया नक्शा भी जारी किया था, जिसमें भारत के कई इलाकों को नेपाल में दिखाया गया था। लेकिन बीते विजय दशमी के दिन उन्होंने नेपाल का पुराना नक्शा ट्वीट किया। इसे भारत के प्रति उनके बदले रुख का प्रमाण समझा गया।

वेई फेंगहे चीन की सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं। पिछले साल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल की यात्रा की थी। उसके बाद नेपाल आने वाले वे चीन के सबसे वरिष्ठ अधिकारी होंगे। शी की यात्रा के दौरान नेपाल और चीन ने अपने सबंधों को “रणनीतिक भागीदारी” का दर्जा देने का एलान किया था।

उसके पहले दोनों देश अपने संबंध को “व्यापक भागीदारी” की श्रेणी में रखते थे। उस वक्त शी ने प्रस्ताव रखा था कि दोनों देश रक्षा सहयोग बढ़ाएं। अब कूटनीति के जानकारों की निगाहें यह देखने पर होंगी कि क्या वेई की यात्रा के दौरान इस दिशा में कोई एलान होता है।

यहां के कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी में चल रही खींचतान से चीन खासा परेशान है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के मुताबिक चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटव के तहत बनने वाली परियोजनाओं की अब तक पहचान ना किए जाने के कारण चीन ओली सरकार से नाराज है। नेपाल ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से संबंधित करार पर 2017 में दस्तखत किया था। लेकिन पिछले साढ़े तीन साल में एक भी परियोजना पर काम शुरू नहीं हुआ है।
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