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क्या है चीन का 'जादुई हथियार' UFWD: खुफिया गतिविधियों ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन, ब्रिटेन-वियतनाम तक जाल, जानें
Fri, 20 Dec 2024 03:00 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 20 Dec 2024 03:00 PM IST
सार
चीन के यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट को लेकर पश्चिमी देशों में हंगामा मचा हुआ है। खासकर ड्रैगन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं और उसके जासूसी तंत्र की पहुंच को देखते हुए। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि हाल ही में ब्रिटिश राजघराने के सदस्य प्रिंस एंड्रयू से एक कथित चीनी जासूस के नजदीकी रिश्तों को लेकर खुलासे हुए हैं।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पास माओ का बनाया जादुई हथियार।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चीन की बढ़ती ताकत के साथ उसकी खुफिया गतिविधियों को लेकर पूरी दुनिया में तनाव की स्थिति रही है। हालांकि, चीन के लिए खुफिया गतिविधियां सिर्फ जासूसी या निगरानी तक सीमित नहीं हैं। बल्कि चीन की एक और ताकत पूरी दुनिया में उसको लेकर हो रही चर्चाओं और उसके प्रोपेगैंडा के प्रबंधन का काम करती है। ड्रैगन की यह ताकत है उसका यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट (UFWD)- जिसे आठ दशक पहले इसके संस्थापक माओ जेदॉन्ग ने चीन का जादुई हथियार तक करार दिया था। अब चीन के मौजूदा राष्ट्रपति इस जादुई हथियार का बेधड़क इस्तेमाल करने में भी जुटे हैं।
बताया गया है कि चीन के यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट को लेकर पश्चिमी देशों में हंगामा मचा हुआ है। खासकर ड्रैगन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं और उसके जासूसी तंत्र की पहुंच को देखते हुए। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि हाल ही में ब्रिटिश राजघराने के सदस्य प्रिंस एंड्रयू से एक कथित चीनी जासूस के नजदीकी रिश्तों को लेकर खुलासे हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रिंस एंड्रयू ने जासूस के तौर पर पहचाने गए क्रिस यांग (यांग तेंग्बो) को एक समय चीन में निवेशकों से बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधि तक करार दे दिया था। जबकि उन्हें यांग के जासूस होने की जानकारी नहीं थी।
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बताया गया है कि चीन के यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट को लेकर पश्चिमी देशों में हंगामा मचा हुआ है। खासकर ड्रैगन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं और उसके जासूसी तंत्र की पहुंच को देखते हुए। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि हाल ही में ब्रिटिश राजघराने के सदस्य प्रिंस एंड्रयू से एक कथित चीनी जासूस के नजदीकी रिश्तों को लेकर खुलासे हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रिंस एंड्रयू ने जासूस के तौर पर पहचाने गए क्रिस यांग (यांग तेंग्बो) को एक समय चीन में निवेशकों से बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधि तक करार दे दिया था। जबकि उन्हें यांग के जासूस होने की जानकारी नहीं थी।
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इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली घटना यह रही कि यांग से जो डिवाइस जब्त किया गया, उसमें प्रिंस एंड्रयू के एक सलाहकार का संदेश भी पाया गया। इसमें लिखा था, "आपके मार्गदर्शन से हमें विंडसर (शाही परिवार का घर) के अंदर-बाहर बिना पकड़ में आए प्रासंगिक लोगों तक पहुंचने का रास्ता मिल गया है।" इसी घटना ने दुनियाभर में सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं कि आखिर कैसे चीन का एक कथित जासूस राजपरिवार तक पहुंच बनाने में सफल रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दुनिया की नजर यूएफडब्ल्यूडी पर पड़ी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक सवाल यह है कि आखिर चीन की यह संस्था काम कैसे करती है? इसका इतिहास क्या है? चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दुनिया में इसका इस्तेमाल किस तरह कर रहे हैं? आइये जानते हैं...
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दुनिया की नजर यूएफडब्ल्यूडी पर पड़ी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक सवाल यह है कि आखिर चीन की यह संस्था काम कैसे करती है? इसका इतिहास क्या है? चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दुनिया में इसका इस्तेमाल किस तरह कर रहे हैं? आइये जानते हैं...
क्या है यूनाइटेड फ्रंड वर्किंग डिपार्टमेंट?
चीन के इस विभाग को सिर्फ यूनाइटेड फ्रंट के नाम से भी जाना जाता है। यह कम्युनिस्ट गठबंधन का समावेशी रूप रहा है। चीन में दशकों तक चले गृह युद्ध में कम्युनिस्ट पार्टी की जीत के पीछे इस यूनाइटेड फ्रंट की अहम भूमिका रही थी। इसीलिए कम्युनिस्ट चीन के सर्वोच्च नेता माओ जेदॉन्ग ने इसे जादुई हथियार करार दिया था।
1949 में गृह युद्ध खत्म होने के साथ जब कम्युनिस्ट पार्टी का शासन शुरू हुआ तब यूनाइटेड फ्रंट की गतिविधियां कई क्षेत्रों में बंट गईं। हालांकि, चीन में शी जिनपिंग के सत्ता में आते ही पिछले एक दशक में यूनाइटेड फ्रंट ने फिर से पुनर्जागरण देखा है। विशेषज्ञों की मानें तो शी जिनपिंग ने यूनाइटेड फ्रंट को उसी तरह फिर तैयार करने का काम किया है, जिस तरह वह माओ के समय में काम करती थी। लिहाजा यूनाइटेड फ्रंट के जरिए जिनपिंग सभी सामाजिक ताकतों को चीन के हित के लिए जोड़ने का काम कर रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि चीन के बाकी खुफिया तंत्र से उलट UFWD सही मायनों में उतनी खुफिया भी नहीं है। इसकी बकायदा एक वेबसाइट तक है, जिस पर इसकी गतिविधियों को भी लगातार अपडेट किया जाता है। हालांकि, इसके काम का दायरा और इसकी पहुंच के बारे में काफी बातें अस्पष्ट हैं।
चीन के इस विभाग को सिर्फ यूनाइटेड फ्रंट के नाम से भी जाना जाता है। यह कम्युनिस्ट गठबंधन का समावेशी रूप रहा है। चीन में दशकों तक चले गृह युद्ध में कम्युनिस्ट पार्टी की जीत के पीछे इस यूनाइटेड फ्रंट की अहम भूमिका रही थी। इसीलिए कम्युनिस्ट चीन के सर्वोच्च नेता माओ जेदॉन्ग ने इसे जादुई हथियार करार दिया था।
1949 में गृह युद्ध खत्म होने के साथ जब कम्युनिस्ट पार्टी का शासन शुरू हुआ तब यूनाइटेड फ्रंट की गतिविधियां कई क्षेत्रों में बंट गईं। हालांकि, चीन में शी जिनपिंग के सत्ता में आते ही पिछले एक दशक में यूनाइटेड फ्रंट ने फिर से पुनर्जागरण देखा है। विशेषज्ञों की मानें तो शी जिनपिंग ने यूनाइटेड फ्रंट को उसी तरह फिर तैयार करने का काम किया है, जिस तरह वह माओ के समय में काम करती थी। लिहाजा यूनाइटेड फ्रंट के जरिए जिनपिंग सभी सामाजिक ताकतों को चीन के हित के लिए जोड़ने का काम कर रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि चीन के बाकी खुफिया तंत्र से उलट UFWD सही मायनों में उतनी खुफिया भी नहीं है। इसकी बकायदा एक वेबसाइट तक है, जिस पर इसकी गतिविधियों को भी लगातार अपडेट किया जाता है। हालांकि, इसके काम का दायरा और इसकी पहुंच के बारे में काफी बातें अस्पष्ट हैं।
UFWD का कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं शी जिनपिंग?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूएफडब्ल्यूडी की ज्यादातर गतिविधियां घरेलू स्तर पर हैं। हालांकि, इसकी कुछ गतिविधियां विदेशी स्तर पर चीनी लोगों के साथ संपर्क रखना और उन्हें समय समय पर काम के लिए इस्तेमाल करना भी है। इतना ही नहीं यह संस्थान दुनियाभर में चीन के बारे में होने वाली चर्चाओं को प्रभावित करने और संवेदनशील मुद्दों पर नजरिया तय कराने का भी काम करता है। ताइवान के लिए चीन के अभियानों से लेकर तिब्बत और शिनजियांग में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भी यह एजेंसी दुनिया में चर्चाओं को प्रभावित करने में जुटी है।
इसके अलावा यूनाइटेड फ्रंट का एक बड़ा काम विदेशी मीडिया में चीन के बारे में परिप्रेक्ष्य को आकार देने का भी है। यह संस्थान अपने संपर्कों के जरिए विदेश में चीनी सरकार के आलोचकों को निशाना बनाता है और चीन के बड़े और प्रभावी चेहरों को अपने प्रोपेगैंडा में भी शामिल करता है।
इस संस्थान के काम करने के तरीके की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, यूएफडब्ल्यूडी खुफिया गतिविधियों में भी शामिल रहता है। हालांकि, इसका पूरा काम खुफिया गतिविधियों से भी ज्यादा है। यह संस्थान न सिर्फ विदेशी सरकार को लेकर गुप्त जानकारी जुटाता है, बल्कि विदेश में रहने वाली चीनी आबादी को चीन के हित में काम करने के लिए भी साथ लाता है। जहां माओ के समय में विदेश में चीन से जुड़े लोगों की संख्या कम थी, वहीं शी जिनपिंग के समय में विदेशी में चीनी मूल के लोगों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। ऐसे में चीनी प्रवासियों के जरिए अपनी सीमा के पार भी प्रभाव स्थापित करने में चीन काफी आगे रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूएफडब्ल्यूडी की ज्यादातर गतिविधियां घरेलू स्तर पर हैं। हालांकि, इसकी कुछ गतिविधियां विदेशी स्तर पर चीनी लोगों के साथ संपर्क रखना और उन्हें समय समय पर काम के लिए इस्तेमाल करना भी है। इतना ही नहीं यह संस्थान दुनियाभर में चीन के बारे में होने वाली चर्चाओं को प्रभावित करने और संवेदनशील मुद्दों पर नजरिया तय कराने का भी काम करता है। ताइवान के लिए चीन के अभियानों से लेकर तिब्बत और शिनजियांग में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भी यह एजेंसी दुनिया में चर्चाओं को प्रभावित करने में जुटी है।
इसके अलावा यूनाइटेड फ्रंट का एक बड़ा काम विदेशी मीडिया में चीन के बारे में परिप्रेक्ष्य को आकार देने का भी है। यह संस्थान अपने संपर्कों के जरिए विदेश में चीनी सरकार के आलोचकों को निशाना बनाता है और चीन के बड़े और प्रभावी चेहरों को अपने प्रोपेगैंडा में भी शामिल करता है।
इस संस्थान के काम करने के तरीके की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, यूएफडब्ल्यूडी खुफिया गतिविधियों में भी शामिल रहता है। हालांकि, इसका पूरा काम खुफिया गतिविधियों से भी ज्यादा है। यह संस्थान न सिर्फ विदेशी सरकार को लेकर गुप्त जानकारी जुटाता है, बल्कि विदेश में रहने वाली चीनी आबादी को चीन के हित में काम करने के लिए भी साथ लाता है। जहां माओ के समय में विदेश में चीन से जुड़े लोगों की संख्या कम थी, वहीं शी जिनपिंग के समय में विदेशी में चीनी मूल के लोगों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। ऐसे में चीनी प्रवासियों के जरिए अपनी सीमा के पार भी प्रभाव स्थापित करने में चीन काफी आगे रहा है।
दलाई लामा से लेकर उइगुरों को लेकर नजरिया बनाने में हाथ
यूएफडब्ल्यूडी विदेश में चीनी समुदाय से जुड़े संस्थानों के जरिए गतिविधियों को अंजाम देता है। इसके सदस्य कई मंचों पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विवादित कामों का बचाव करते नजर आते हैं। इतना ही नहीं, यूनाइटेड फ्रंट की शह पर ही विदेश में कई संगठन कम्युनिस्ट पार्टी के विरोधियों को सेंसर करने का काम करते हैं। इसके अलावा तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का पश्चिमी देशों में विरोध करवाने से जुड़े रहे हैं। चीन में अल्पसंख्यक तिब्बतियों और उइगुरों पर हो रहे जुल्मों का मुद्दा उठाने वाले लोगों को धमकी देने के मामले में भी यूएफडब्ल्यूडी से जुड़े लोगों की साजिश सामने आई है।
यूएफडब्ल्यूडी विदेश में चीनी समुदाय से जुड़े संस्थानों के जरिए गतिविधियों को अंजाम देता है। इसके सदस्य कई मंचों पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विवादित कामों का बचाव करते नजर आते हैं। इतना ही नहीं, यूनाइटेड फ्रंट की शह पर ही विदेश में कई संगठन कम्युनिस्ट पार्टी के विरोधियों को सेंसर करने का काम करते हैं। इसके अलावा तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का पश्चिमी देशों में विरोध करवाने से जुड़े रहे हैं। चीन में अल्पसंख्यक तिब्बतियों और उइगुरों पर हो रहे जुल्मों का मुद्दा उठाने वाले लोगों को धमकी देने के मामले में भी यूएफडब्ल्यूडी से जुड़े लोगों की साजिश सामने आई है।
प्रिंस एंड्रयू मामले के अलावा विदेश में कहां-कहां दिखा है चीन के UFWD का प्रभाव
गौरतलब है कि चीन की किसी देश में अंदरूनी घुसपैठ का मामला सिर्फ प्रिंस एंड्रयू और वांग तेंग्बो तक सीमित नहीं है। इससे पहले 2022 में ब्रिटेन की घरेलू खुफिया एजेंसी ने एक चीनी मूल की वकील क्रिस्टीन ली को पकड़ा था। आरोप था कि यूएफडब्ल्यूडी ने उन्हें ब्रिटेन में प्रभावशाली लोगों से संपर्क और रिश्ते बनाने का जिम्मा दिया था।
इतना ही नहीं 2023 में बॉस्टन में एक चाइनीज रेस्तरां चलाने वाले चीनी मूल के अमेरिकी नागरिक लियांग लितांग को गिरफ्तार किया गया था। उस पर अपने इलाके में चीन से भाग कर आए विरोधियों के बारे में यूएफडब्ल्यूडी के जासूसों को जानकारी देने का आरोप था।
सितंबर, 2023 में न्यूयॉर्क के गवर्नर दफ्तर की एक पूर्व सहायिका लिंडा सुन को पकड़ा गया था। उन पर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर चीनी सरकार के हित में काम करने का आरोप लगा था। आरोप था कि उन्होंने कुछ फायदों- जैसे पर्यटन के बदले चीन के यूएनडब्ल्यूडी की मदद की। खुद चीनी मीडिया ने बताया कि वह 2017 में यूएफडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मिली थीं, जिन्होंने लिंडा को अमेरिका-चीन की दोस्ती में मार्गदर्शक के तौर पर काम करने को कहा था।
गौरतलब है कि चीन की किसी देश में अंदरूनी घुसपैठ का मामला सिर्फ प्रिंस एंड्रयू और वांग तेंग्बो तक सीमित नहीं है। इससे पहले 2022 में ब्रिटेन की घरेलू खुफिया एजेंसी ने एक चीनी मूल की वकील क्रिस्टीन ली को पकड़ा था। आरोप था कि यूएफडब्ल्यूडी ने उन्हें ब्रिटेन में प्रभावशाली लोगों से संपर्क और रिश्ते बनाने का जिम्मा दिया था।
इतना ही नहीं 2023 में बॉस्टन में एक चाइनीज रेस्तरां चलाने वाले चीनी मूल के अमेरिकी नागरिक लियांग लितांग को गिरफ्तार किया गया था। उस पर अपने इलाके में चीन से भाग कर आए विरोधियों के बारे में यूएफडब्ल्यूडी के जासूसों को जानकारी देने का आरोप था।
सितंबर, 2023 में न्यूयॉर्क के गवर्नर दफ्तर की एक पूर्व सहायिका लिंडा सुन को पकड़ा गया था। उन पर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर चीनी सरकार के हित में काम करने का आरोप लगा था। आरोप था कि उन्होंने कुछ फायदों- जैसे पर्यटन के बदले चीन के यूएनडब्ल्यूडी की मदद की। खुद चीनी मीडिया ने बताया कि वह 2017 में यूएफडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मिली थीं, जिन्होंने लिंडा को अमेरिका-चीन की दोस्ती में मार्गदर्शक के तौर पर काम करने को कहा था।
चीनी नागरिकों को मजबूर करता है कानून
जहां ज्यादातर देश अपने नागरिकों के प्रभाव और अपनी जासूसी गतिविधियों को अलग-अलग रखते हैं, वहीं चीन ने इस महीन रेखा को धुंधला कर दिया है। खासकर चीन की तरफ से 2017 में एक कानून पारित करने के बाद से। इस कानून के तहत चीन से जुड़े किसी भी व्यक्ति, कंपनी या संस्था को उसकी खुफिया जांचों में सहयोग करना ही पड़ेगा। इसके तहत वे चीनी सरकार से जानकारी साझा करने के लिए भी बाध्य हैं। इस कानून के चलते ही चीन विदेश में कार्यरत अपने किसी भी नागरिक, कंपनी या संस्था के गलत इस्तेमाल की क्षमता भी रखता है।
जहां ज्यादातर देश अपने नागरिकों के प्रभाव और अपनी जासूसी गतिविधियों को अलग-अलग रखते हैं, वहीं चीन ने इस महीन रेखा को धुंधला कर दिया है। खासकर चीन की तरफ से 2017 में एक कानून पारित करने के बाद से। इस कानून के तहत चीन से जुड़े किसी भी व्यक्ति, कंपनी या संस्था को उसकी खुफिया जांचों में सहयोग करना ही पड़ेगा। इसके तहत वे चीनी सरकार से जानकारी साझा करने के लिए भी बाध्य हैं। इस कानून के चलते ही चीन विदेश में कार्यरत अपने किसी भी नागरिक, कंपनी या संस्था के गलत इस्तेमाल की क्षमता भी रखता है।