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घटती आबादी से डरा चीन: दो से ज्यादा बच्चों की इजाजत देने की वकालत, सबल अमेरिका व जवां भारत से खतरा

Sun, 18 Apr 2021 06:29 PM IST
सुरेंद्र जोशी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बीजिंग
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बीजिंग Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 18 Apr 2021 06:29 PM IST
सार

  • एक बच्चा नीति खत्म करने का भी असर नहीं
  • अमेरिका से मुकाबले के लिए नीति बदलना जरूरी

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China scared of dwindling population: Advocacy to allow more than two children, threatens America and young India
भारत चीन अमेरिका - फोटो : फाइल

विस्तार

चीन में अब दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने की इजाजत देने की मांग जोर पकड़ रही है। चीनी सरकार से कहा जा रहा है कि वह जन्म दर घटाने की नीति को उदार बनाए। दरअसल, चीन को अमेरिका की आर्थिक शक्ति व जवां भारत से खतरा नजर आ रहा है। इन दोनों देशों के मुकाबले चीन की कार्यशक्ति घट रही है और उसकी आबादी बूढ़ी होती जा रही है। 
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वन चाइल्ड (सिर्फ एक बच्चे की इजाजत) देने की नीति खत्म करने के बाद भी चीन की समस्या खत्म नहीं हुई है। एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन अमेरिका के साथ आर्थिक रूप से मुकाबले में टिका रहना चाहता है, तो उसे अपनी जनसंख्या नीति बदलनी होगी।
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पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने किया अध्ययन
ये अध्ययन पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने कराया। इसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में जन्म दर लगातार गिर रही है, जबकि आबादी का अधिक से अधिक हिस्सा उम्रदराज होता जा रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना चीन का केंद्रीय बैंक है। इसमें ध्यान दिलाया गया है कि अमेरिका आव्रजन नीति को उदार बना कर अपने यहां कामकाजी उम्र के लोगों को संख्या जरूरी स्तर पर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
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आबादी तीन करोड़ घट जाएगी

अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने आबादी को लेकर जो भविष्यवाणी की है, उसमें चीन की जन्म दर का संभवतः गलत अनुमान लगाया गया है। असल जन्म दर उस अनुमान से कम है। इसलिए अगले 30 वर्षों में चीन की आबादी तीन करोड़ 20 लाख घट जाएगी। 

अमेरिका की पांच करोड़ बढ़ेगी
दूसरी तरफ इसी अवधि में अमेरिका की आबादी पांच करोड़ बढ़ जाएगी। इसका परिणाम यह होगा कि जहां अमेरिका की श्रम शक्ति बढ़ेगी, वहीं चीन की श्रमशक्ति में गिरावट आएगी।  रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि अमेरिका कुशल कर्मियों को आव्रजन के जरिए अपने लाने के लिहाज से हमेशा ही चीन की तुलना में फायदे की स्थिति में रहेगा। बीते हफ्ते जारी हुई इस रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में चीन की 70.6 प्रतिशत आबादी श्रम शक्ति का हिस्सा थी। 

अमेरिका की 65.2 प्रतिशत आबादी वहां की श्रम शक्ति का हिस्सा थी। इस तरह आज चीन को इस मामले में 5.4 प्रतिशत की बढ़त है, लेकिन 2035 तक ये बढ़त घट कर 3.2 फीसदी रह जाएगी। 2050 तक तो अमेरिका इस मामले में चीन पर 1.3 प्रतिशत की बढ़त बना लेगा।  रिपोर्ट एक अहम सवाल उठाया गया है। इसमें कहा गया है-'पिछले चार दशकों में ये अंतर घटाने के लिए चीन ने सस्ते श्रमिकों और अपनी विशाल जनसंख्या पर निर्भर किया। लेकिन अगले 30 साल में हम किस चीज पर निर्भर करेंगे?'
 

2050 में चीन की आबादी होगी 1.40 अरब

अनुमान है कि चीन की आबादी 2030 में अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाएगी। तब चीन की आबादी एक अरब 46 करोड़ होगी। उसके बाद इसमें गिरावट आने लगेगी। 2050 में चीन की आबादी एक अरब 40 करोड़ ही रह जाएगी। साथ ही आबादी में बुजुर्ग लोगों का हिस्सा बढ़ता जाएगा। 

2027 में भारत बनेगा नंबर वन
रिपोर्ट में इस तरफ भी ध्यान दिलाया गया है कि जल्द ही भारत में कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या चीन से ज्यादा हो जाएगी। अनुमान है कि 2027 में चीन से आगे निकलते हुए भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। इन आंकड़ों का जिक्र करते हुए अध्ययनकर्ताओं ने दलील दी है कि चीन को अपनी परिवार नियोजन की नीति में अब अवश्य बदलाव लाना चाहिए। इसके लिए चीन सरकार को बच्चों के जन्म के मामले अब अधिक उदार नीति अपनानी चाहिए। 

महिलाओं को अब अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इस मकसद से सरकार को चाहिए कि वह प्रसूति, बाल स्वास्थ्य देखभाल और स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार करे।  इसके पहले इस साल के आरंभ में चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में कहा था कि 2020 में देश में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या 2019 की तुलना में 15 फीसदी कम रही।

2013 में अपनाई दो बच्चा नीति

चीन में 1970 के दशक में परिवार नियोजन की सख्त नीति अपनाई गई थी, जिसके तहत दंपतियों को एक बच्चा ही रखने की इजाजत दी जाती थी। 2013 में इस नीति को बदला गया, लेकिन अभी भी अधिकतम दो बच्चों की ही इजाजत है।
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