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Hindi News ›   World ›   China says Dalai Lama's successor needs its approval; Projects Tibet as gateway to South Asia

China: चीन ने तिब्बत को बताया दक्षिण एशिया का प्रवेश द्वार, कहा- दलाई लामा के उत्तराधिकारी को मंजूरी की जरूरत

Fri, 10 Nov 2023 05:08 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 10 Nov 2023 05:08 PM IST
सार

China: मौजूदा दलाई लामा के बारे में चीन ने कहा कि वह किसी भी तरह से एक धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक निर्वासित व्यक्ति हैं, जो लंबे समय से चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों में शामिल हैं और तिब्बत को चीन से विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं।

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China says Dalai Lama's successor needs its approval; Projects Tibet as gateway to South Asia
शी जिनपिंग - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चीन ने शुक्रवार को एक श्वेत पत्र जारी किया है जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तिब्बत क्षेत्र को भारतीय सीमा के पास बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि 88 वर्षीय दलाई लामा का कोई भी उत्तराधिकारी देश के भीतर से होना चाहिए और उनके उत्तराधिकारी को उसकी मंजूरी की जरूरत है।

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श्वेत पत्र में कहा गया, दलाई लामा और पंचेन रिनपोचेस सहित सभी पुनर्जन्मित तिब्बती जीवित बुद्धों की देश के भीतर तलाश की जानी चाहिए। स्वर्ण कलश से लॉटरी निकालने की प्रथा के जरिए फैसला लिया जाना चाहिए और केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त की जानी चाहिए। 

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तिब्बत को झिजांग कहने वाला चीन इस बात को लेकर चिंतित है कि भारत के धर्मशाला में निर्वासन का जीवन बिता रहे 80 वर्षीय दलाई लामा अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करेंगे, जिसका हिमालयी क्षेत्र में गहरा आध्यात्मिक प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि उनकी विरासत तिब्बती लोगों के मन में बसी हुई है।

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हालांकि, बीजिंग का कहना है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को उसकी मंजूरी की जरूरत है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि वह चिंतित है क्योंकि दलाई लामा द्वारा नामित युवक को हटाने के बाद नियुक्त किए गए नंबर दो आध्यात्मिक नेता वर्तमान पंचेन लामा को तिब्बत में ज्यादा तवज्जो नहीं मिल रही है।
 

'नए युग में झिजांग (तिब्बत) के शासन पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की नीतियां: दृष्टिकोण और उपलब्धियां' शीषर्क वाले श्वेत पत्र में तिब्बत में अलगाववाद का मुकाबला करने के लिए की गई कार्रवाई को भी रेखांकित किया गया है।  

इसमें कहा गया है, 'घुसपैठ, तोड़फोड़ और अलगाव के खिलाफ लड़ाई जारी है और झिजांग अलगाववाद से निपटने के लिए सक्रिय रुख अपना रहा है।' श्वेत पत्र में आगे कहा गया, 'दलाई समूह की प्रतिक्रियावादी प्रकृति को उजागर किया गया है और निंदा की गई है, और क्षेत्रीय सरकार सभी रूपों का विरोध करने के लिए सभी जातियों के लोगों पर बारीकी से निर्भर करती है।'

श्वेत पत्र में आगे कहा गया, 'अब इस क्षेत्र के लोगों के दिमाग में यह बात गहराई से बैठ गई है कि एकता और स्थिरता एक आशीर्वाद है, जबकि विभाजन और अशांति आपदा का कारण बनती है। वे देश की एकता, राष्ट्रीय संप्रभुता और जातीय एकजुटता की रक्षा के लिए और अधिक दृढ़ है।' चीन ने तिब्बत के मुद्दों के लिए अमेरिका द्वारा विशेष समन्वयक नियुक्त किए जाने का भी कड़ा विरोध किया है और वॉशिंगटन के इस दावे की आलोचना की है कि बीजिंग को दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन में दखल नहीं देना चाहिए। 

मौजूदा दलाई लामा के बारे में चीन ने इस बात को दोहराया कि वह किसी भी तरह से एक धार्मिक व्यक्ति नहीं  हैं, बल्कि एक राजनीतिक निर्वासित व्यक्ति हैं, जो लंबे समय से चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों में शामिल हैं और तिब्बत को चीन से विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें तिब्बत में तिब्बती बौद्ध धर्म पर किसी भी तरह की कार्रवाई से इनकार करते हुए कहा गया है कि चीन धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता की पूरी गारंटी देता है और मंदारिन के साथ तिब्बती भाषा को बढ़ावा देता है।

पत्र में कहा गया है कि धार्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से किया जाता है। इस क्षेत्र में आज तिब्बती बौद्ध धर्म गतिविधियों के लिए 1,700 से अधिक स्थल, लगभग 46,000 बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणियां, चार मस्जिदें, लगभग 12,000 मूल मुस्लिम और 700 से अधिक विश्वासियों के साथ एक कैथोलिक चर्च है। इसमें तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसे यह दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। चीन ने तिब्बत में भारतीय सीमा क्षेत्रों तक हाई-स्पीड ट्रेनों का निर्माण किया है जो इसे सैनिकों को तेजी से स्थानांतरित करने में सक्षम बनाता है।

अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों को विकसित करने और वहां के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए हैं। गांवों और कस्बों के विकास के लिए योजनाएं और विशिष्ट कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि तिब्बत नेपाल के जरिए रेल और सड़क संपर्क के साथ दक्षिण एशिया का प्रवेश द्वार बनने के लिए कमर कस रहा है। 

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