कोरोना को मात देने में सबसे आगे निकल सकता है चीन, चार वैक्सीन ट्रायल के एडवांस स्टेज में
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अगस्त के महीने में जैसे ही रूस ने सबसे पहले घोषणा की थी कि हमने कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार कर ली है, ऐसे में विश्व भर के लोगों को लगा कि कोरोना को मात देने के लिए रूस सबसे तेजी से काम कर रहा है। लेकिन अब ताजा जानकारी आ रही है कि वैक्सीन रेस में चीन सबसे आगे निकल गया है।
रूस को निराश करने वाली खबर तब आई जब पता चला कि चीन की चार वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण तक पहुंच चुका है। वहीं उसकी कोरोना वैक्सीन का कई देशों में आपात स्थिति में उपयोग भी हो रहा है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक पूरे दुनिया में कुल 11 वैक्सीन ऐसी हैं जिनका ट्रायल तीसरे चरण में पहुंच चुका है। लेकिन इनमें से सबसे अधिक 4 चीन के ही हैं। इसे एक तरह से आखिरी स्टेज भी माना जाता है और इस ट्रायल में काफी वक्त भी लगता है।
जानिए चीन वैक्सीन ट्रायल के मामले में आगे क्यों निकला
चीन की चार वैक्सीन का ट्रायल तीसरे चरण में हैं। वहीं चीन को सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब चारों वैक्सीन को उपयोग के लिए अप्रूवल मिल गया। बता दें कि हाल ही में चीन ने कोविड-19 की वैक्सीन बनाने के लिए को-वैक्स से हाथ मिलाया है। 2021 के अंत तक 200 करोड़ वैक्सीन के डोज को 12 कमजोर देशों को पहुंचाना इसका लक्ष्य है।
वहीं चीन का दावा है कि नवंबर 2020 के अंत तक वह वैक्सीन बनाने में पूर्ण रूप से सफलता पा लेगा। वहीं को-वैक्स योजना के तहत जिन 9 वैक्सीन को कोरोना के इलाज के लिए चुना गया है उसमें से दो चीन की हैं। एक वैक्सीन अमेरिका की, एक साउथ कोरिया, एक ब्रिटेन और एक वैक्सीन ग्लोबल पार्टनरशिप के तहत चुनी गई है।
चीन के ये चार प्रमुख वैक्सीन हैं जिनका ट्रायल पहुंचा तीसरे चरण में
1.साइनोफार्मा और चीन का इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजी साथ मिलकर वैक्सीन बना रही है। इसे चीनी सेना ने इसे सीमित उपयोग के लिए अनुमति प्रदान कर दी है।
2.चीन की कंपनी सिनोवैक बायोटेक की वैक्सीन का फेज-3 ट्रायल शुरू हो चुका है। वहीं इसे इमरजेंसी अप्रूवल मिल चुका है।
3. वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलॉजिकल प्रॉडक्ट्स और साइनोफार्मा कंपनी साथ मिलकर एक और वैक्सीन का निर्माण कर रहा है जिसे यूएई ने इसे इमरजेंसी अप्रूवल दे दिया है।
4.चीन की चौथी वैक्सीन पर बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रॉडक्ट्स काम कर रहा है। इस वैक्सीन को भी इमरजेंसी अप्रूवल मिल चुका है।
वैक्सीन के मामले में भारत कहां पहुंचा
भारत में कोरोना की तीन वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। साल के अंत तक चार और वैक्सीन का ट्रायल तीसरे चरण में पहुंचने की उम्मीद है। वहीं सितंबर के महीने में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन लोकसभा में बताया था कि करीब 30 वैक्सीन बनाने पर काम चल रहा है। भारतीय कंपनियों ने एस्ट्राजेनेका/ऑक्सफोर्ड और रूस की गामेलेया इंस्टीट्यूट से समझौते किए हैं। एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का उत्पादन भारत में सीरम इंस्टीट्यूट करेगी।
- अन्य देशों के वैक्सिन जिनका ट्रायल तीसरे चरण में पहुंचा है
रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन का ट्रायल पहुंचा तीसरे चरण में
रूस के गामेलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा इस वैक्सीन का निर्माण किया जा रहा हैा। इस वैक्सीन का ट्रायल तीसरे चरण में पहुंच चुका है।
ब्रिटेन की एस्ट्राजेनेका वैक्सीन
कंपनी एस्ट्रोजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी मिलकर इस वैक्सीन पर काम कर रहा है और इसका ट्रायल भी तीसरे चरण में पहुंच चुका है।
ऑस्ट्रेलिया की बार्क वैक्सीन
र्धोच चिल्ड्रेन रिसर्च इंस्टीट्यूट बार्क के नाम से वैक्सीन विकसित कर रहा है और इसका ट्रायल भी तीसरे चरण में पहुंच चुका है।
रूस की वैक्सीन रह चुकी है विवादों में
अगस्त के महीने में रूस ने जैसे ही यह दावा किया कि उनके वैज्ञानिकों ने दुनिया में सबसे पहले कोरोना के खिलाफ सुरक्षित वैक्सीन स्पुतनिक-वी तैयार कर ली है। हालांकि इसे लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। डब्ल्यूएचओ सहित दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन के निर्माण में तय मानकों के उल्लंघन की बात कही है। साथ ही इसके गंभीर परिणाम मिलने की चेतावनी भी दी है।