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चीन क्यों छिपा रहा नेपाल-तिब्बत बाढ़ की सच्चाई?: खबरें-वीडियो हटाने का दावा, विदेशी पत्रकारों पर भी पाबंदी
Sun, 30 Aug 2026 09:03 AM IST
Devesh Tripathi
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 30 Aug 2026 09:03 AM IST
सार
नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन में सूचना की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के बनाए कुछ दृश्य कथित तौर पर ऑनलाइन मंचों से गायब किए गए, जबकि विदेशी पत्रकारों को प्रभावित क्षेत्रों और वहां के लोगों तक पहुंच बनाने में बाधाओं का सामना करना पड़ा।
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नेपाल-तिब्बत बाढ़
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद चीन में इससे जुड़ी खबरों और वीडियो को सेंसर किए जाने की खबरें सामने आई हैं। बाढ़ की स्थिति और प्रभावित इलाकों की वास्तविक तस्वीर जानने के लिए पत्रकार स्थानीय लोगों से बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है।
चीन में लोगों को बाढ़ की जानकारी के लिए मुख्य रूप से सरकारी मीडिया पर निर्भर रहना पड़ा है। सरकारी रिपोर्टों में राहत और बचाव कार्यों को प्रमुखता दी गई है, जबकि बाढ़ से हुए नुकसान के स्तर की सीमित जानकारी ही सामने आई है। इस बाढ़ में नेपाल और तिब्बत में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2400 से ज्यादा लोग लापता हैं।
चीन की सरकार पर लगे क्या आरोप?
स्थानीय लोगों की ओर से बनाए गए और ऑनलाइन साझा किए गए कुछ वीडियो कथित तौर पर चीनी सोशल मीडिया मंचों से हटा दिए गए। इनमें तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में एक सीमा चौकी को मिट्टी के मलबे के साथ बहते हुए दिखाने वाला वीडियो भी शामिल है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो चीनी सोशल मीडिया से हटा दिया गया। वहीं, ब्रिटेन के द टेलीग्राफ ने बताया कि चीन के सरकारी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में इस वीडियो की केवल एक तस्वीर का इस्तेमाल किया।
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सरकारी मीडिया में राहत और बचाव कार्यों पर जोर
चीन के सरकारी मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों में बाढ़ प्रभावित इलाकों में चलाए जा रहे राहत और बचाव अभियानों पर जोर दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, चीनी सरकार ने प्रभावित क्षेत्र में सैन्यकर्मियों और अन्य आपातकालीन कर्मचारियों को तैनात किया है। बचाव अभियान में ड्रोन और हेलीकॉप्टर भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक अखबार पीपुल्स डेली ने गुरुवार को बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्यिरोंग में बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया है।
विदेशी पत्रकारों पर लगी कौन सी पाबंदियां?
तिब्बत में बाढ़ से हुए नुकसान की स्वतंत्र जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे विदेशी पत्रकारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उन्हें तिब्बत की यात्रा करने और वहां के लोगों से फोन पर बातचीत करने को लेकर पाबंदियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते नेपाल के बाहर बाढ़ से हुए नुकसान का स्वतंत्र आकलन करना मुश्किल हो गया है। तिब्बत पर चीन का नियंत्रण 1950 के दशक में स्थापित हुआ था। आज भी यह चीन के सबसे अधिक नियंत्रित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है।
'तिब्बत से जुड़ी हर चीज राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखी जाती है'
लंदन स्थित स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज के चीन संस्थान के निदेशक स्टीव त्सांग ने द गार्जियन से कहा कि किसी रिपोर्ट को प्रकाशित करने से पहले बहुत ऊंचे स्तर से मंजूरी जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि तिब्बत से जुड़ी हर चीज को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाता है। उनके अनुसार, ऐसी किसी बात को कहा या रिपोर्ट नहीं किया जाएगा, जिसे उच्च स्तर से मंजूरी नहीं मिली हो।
नेपाल के पूर्व सांसद ने उठाए सवाल
नेपाल की संसद के पूर्व सदस्य राजेंद्र बजगाईं ने भी पारदर्शिता की कमी को लेकर चीन की आलोचना की। उन्होंने द टेलीग्राफ से कहा कि अगर चीन बाढ़ से जुड़े वीडियो हटा रहा है तो इससे यह सवाल उठता है कि आखिर क्या छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सबूत हटाने से सच्चाई सामने लाने में मदद नहीं मिलती, बल्कि इससे लोगों को जायज सवाल पूछने से रोका जाता है।
नेपाल-तिब्बत बाढ़ में 675 लोगों की मौत
नेपाल की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की संयुक्त संख्या 675 हो गई। वहीं, 2498 लोग अब भी लापता हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत में सात लोगों की मौत हुई है और 540 से अधिक लोग लापता हैं।
तिब्बत में लापता लोगों में 261 विदेशी
चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के मुताबिक, तिब्बत में बाढ़ के बाद लापता 546 लोगों में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं। चीनी अधिकारियों ने इस संबंध में संबंधित देशों के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को जानकारी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लापता लोगों में 15 ब्रिटिश नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल के अधिकारियों ने इससे पहले 33 ब्रिटिश नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें से कुछ लोगों के सीमा पार करके तिब्बत जाने की आशंका है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि चीन की ओर से बताए गए 15 ब्रिटिश नागरिकों में नेपाल के आंकड़ों में शामिल कितने लोग हैं।
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चीन में लोगों को बाढ़ की जानकारी के लिए मुख्य रूप से सरकारी मीडिया पर निर्भर रहना पड़ा है। सरकारी रिपोर्टों में राहत और बचाव कार्यों को प्रमुखता दी गई है, जबकि बाढ़ से हुए नुकसान के स्तर की सीमित जानकारी ही सामने आई है। इस बाढ़ में नेपाल और तिब्बत में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2400 से ज्यादा लोग लापता हैं।
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चीन की सरकार पर लगे क्या आरोप?
स्थानीय लोगों की ओर से बनाए गए और ऑनलाइन साझा किए गए कुछ वीडियो कथित तौर पर चीनी सोशल मीडिया मंचों से हटा दिए गए। इनमें तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में एक सीमा चौकी को मिट्टी के मलबे के साथ बहते हुए दिखाने वाला वीडियो भी शामिल है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो चीनी सोशल मीडिया से हटा दिया गया। वहीं, ब्रिटेन के द टेलीग्राफ ने बताया कि चीन के सरकारी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में इस वीडियो की केवल एक तस्वीर का इस्तेमाल किया।
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सरकारी मीडिया में राहत और बचाव कार्यों पर जोर
चीन के सरकारी मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों में बाढ़ प्रभावित इलाकों में चलाए जा रहे राहत और बचाव अभियानों पर जोर दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, चीनी सरकार ने प्रभावित क्षेत्र में सैन्यकर्मियों और अन्य आपातकालीन कर्मचारियों को तैनात किया है। बचाव अभियान में ड्रोन और हेलीकॉप्टर भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक अखबार पीपुल्स डेली ने गुरुवार को बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्यिरोंग में बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया है।
विदेशी पत्रकारों पर लगी कौन सी पाबंदियां?
तिब्बत में बाढ़ से हुए नुकसान की स्वतंत्र जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे विदेशी पत्रकारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उन्हें तिब्बत की यात्रा करने और वहां के लोगों से फोन पर बातचीत करने को लेकर पाबंदियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते नेपाल के बाहर बाढ़ से हुए नुकसान का स्वतंत्र आकलन करना मुश्किल हो गया है। तिब्बत पर चीन का नियंत्रण 1950 के दशक में स्थापित हुआ था। आज भी यह चीन के सबसे अधिक नियंत्रित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है।
'तिब्बत से जुड़ी हर चीज राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखी जाती है'
लंदन स्थित स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज के चीन संस्थान के निदेशक स्टीव त्सांग ने द गार्जियन से कहा कि किसी रिपोर्ट को प्रकाशित करने से पहले बहुत ऊंचे स्तर से मंजूरी जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि तिब्बत से जुड़ी हर चीज को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाता है। उनके अनुसार, ऐसी किसी बात को कहा या रिपोर्ट नहीं किया जाएगा, जिसे उच्च स्तर से मंजूरी नहीं मिली हो।
नेपाल के पूर्व सांसद ने उठाए सवाल
नेपाल की संसद के पूर्व सदस्य राजेंद्र बजगाईं ने भी पारदर्शिता की कमी को लेकर चीन की आलोचना की। उन्होंने द टेलीग्राफ से कहा कि अगर चीन बाढ़ से जुड़े वीडियो हटा रहा है तो इससे यह सवाल उठता है कि आखिर क्या छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सबूत हटाने से सच्चाई सामने लाने में मदद नहीं मिलती, बल्कि इससे लोगों को जायज सवाल पूछने से रोका जाता है।
नेपाल-तिब्बत बाढ़ में 675 लोगों की मौत
नेपाल की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की संयुक्त संख्या 675 हो गई। वहीं, 2498 लोग अब भी लापता हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत में सात लोगों की मौत हुई है और 540 से अधिक लोग लापता हैं।
तिब्बत में लापता लोगों में 261 विदेशी
चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के मुताबिक, तिब्बत में बाढ़ के बाद लापता 546 लोगों में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं। चीनी अधिकारियों ने इस संबंध में संबंधित देशों के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को जानकारी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लापता लोगों में 15 ब्रिटिश नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल के अधिकारियों ने इससे पहले 33 ब्रिटिश नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें से कुछ लोगों के सीमा पार करके तिब्बत जाने की आशंका है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि चीन की ओर से बताए गए 15 ब्रिटिश नागरिकों में नेपाल के आंकड़ों में शामिल कितने लोग हैं।