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रिपोर्ट: भारत सहित चार देशों की सख्ती से चीनी हथियारों का निर्यात धीमा
Fri, 10 Sep 2021 01:19 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, बीजिंग।
एजेंसी, बीजिंग।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 10 Sep 2021 01:19 AM IST
सार
विशेषज्ञ माइकल पैक ने बताया कि यह देश चीन से हथियारों का आयात लगभग रोक चुके हैं क्योंकि चीन इनके प्रति आक्रामक विदेश नीति अपना रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत सहित चार देशों के सख्त रुख के बाद चीन के हथियारों के निर्यात में कमी आई है। इसकी वजह एशियाई देशों के प्रति उसकी आक्रामक राजनीति को बताया जा रहा है। इससे पूर्व 2004 से 2013 के दौरान उसने निर्यात तीन गुना बढ़ाया था। साल 2014 से 2018 के दौरान केवल 2.7 प्रतिशत ही वृद्धि हुई।
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स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने इस बारे में रिपोर्ट दी, जिसमें बताया कि 10 प्रमुख हथियार आयातक देशों में से चार भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और वियतनाम ने राजनीतिक वजहों से चीन से आयात पर कठोर निर्णय लिए।
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लड़ाकू ड्रोन से हुआ चीन को फायदा
चीन को सर्वाधिक फायदा अपने यहां बने ड्रोन के निर्यात से हो रहा है। इन्हें वह बीते 10 साल से विकासशील देशों को बेच कर विश्व का सबसे बड़ा लड़ाकू ड्रोन उत्पादक और निर्यातक बन गया है। निकट भविष्य में इन अनमैन्उ कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (यूसीएवी) को युद्ध का परिणाम तय करने वाले शस्त्र माना जा रहा है। यही वजह है कि अमेरिका भी काफी समय बाद वायु रक्षा तकनीक पर फिर से जोर दे रहा है। वह मिसाइलों से लैस रोबोट्स पर भी काम कर रहा है।
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ड्रोन निर्यात में अमेरिका से बहुत भी आगे
- चीन से मिस्र, ईराक, जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अरब देशों को सबसे ज्यादा ड्रोन निर्यात किए।
- 2009 से 2013 तक उसने केवल दो देशों को 10 यूसीएवी निर्यात किए थे, लेकिन 2014 से 2018 तक 13 देशों को 153 यूसीएवी मुहैया करवाए।
- अमेरिका ने 2009-13 में सिर्फ 3 और 2014-18 में भी केवल 5 ही यूसीएवी निर्यात किए। यह सारे ड्रोन भी उसने केवल ब्रिटेन को ही दिए।