भविष्य की टेक्नोलॉजी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की होड़ में अमेरिका से बहुत आगे निकला चीन
विशेषज्ञों का कहना है कि डाटा पॉयजनिंग, स्पूफिंग और डीप फेक्स जैसे कई नई तरह के खतरे अस्तित्व में आ गए हैं, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से अंजाम दिया जाता है। इसलिए इस तकनीक की उपेक्षा अपने लिए खतरा मोल लेते हुए ही की जा सकती है...
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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में काम कर चुके एक वरिष्ठ सॉफ्ट विशेषज्ञ की इस टिप्पणी ने पश्चिमी राजधानियों में चिंता बढ़ा दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के मामले में चीन अमेरिका से बहुत आगे निकल गया है। आज के दौर में एआई को निर्णायक महत्व की टेक्नोलॉजी माना जाता है। ये आम समझ है कि भविष्य में अर्थव्यवस्था के साथ-साथ युद्धों में सबसे अधिक निर्णायक यही तकनीक होगी। इसीलिए दुनियाभर में- खास कर विकसित देशों में इस टेक्नोलॉजी में आगे निकलने की होड़ लगी हुई है।
जर्मनी की वेबसाइट डीडब्ल्यू.कॉम की एक खबर के मुताबिक हाल में अमेरिका और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच बनी ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (टीटीसी) की पहली बैठक हुई थी। उसमें एआई एजेंडे में सबसे ऊपर थी। वहां अधिकारियों ने इस पर चर्चा की थी कि अमेरिका और ईयू एआई के क्षेत्र में क्या साझा प्रयास कर सकते हैँ। उधर इसी महीने अमेरिका सरकार के संयुक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर के निदेशक ने दो टूक कहा कि एआई ढांचा और नेटवर्क ‘हथियार’ हैं और इन्हें इसी रूप में देखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डाटा पॉयजनिंग, स्पूफिंग और डीप फेक्स जैसे कई नई तरह के खतरे अस्तित्व में आ गए हैं, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से अंजाम दिया जाता है। इसलिए इस तकनीक की उपेक्षा अपने लिए खतरा मोल लेते हुए ही की जा सकती है। जानकारों के मुताबिक भविष्य में एआई का इस्तेमाल साइबर हमलों के लिए भी होगा, जिससे किसी दूसरे देश के महत्वपूर्ण आर्थिक और रक्षा नेटवर्कों को निष्क्रिय किया जा सकेगा।
बीते जून में अमेरिकी सीनेट ने यूनाइटेड स्टेट्स इनोवेशन एंड कॉम्पिटीशन एक्ट पारित किया था। उसका मकसद सेमीकंडक्टर और कुछ दूसरी तकनीकों के साथ-साथ एआई विकास भी है। इस कार्य के लिए 250 अरब डॉलर का बजट अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने मंजूर किया है। तब भी कुछ विशेषज्ञों ने कहा था कि इस मामले में अमेरिका अब जागा है, जबकि चीन इसमें काफी बढ़त बना चुका है। दरअसल, ये बात तब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी स्वीकार की थी। उन्होंने कहा था- ‘हमारे सामने 21वीं में विजयी रहने की होड़ है, जिसमें पहला गोला दागा जा चुका है।’
ताजा चर्चा पेंटागन के सॉफ्टवेयर प्रमुख रह चुके निकोलस चेलियान के बयान से छिड़ी है। चेलियान का एक इंटरव्यू ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स में छपा है। उसमें उन्होंने कहा कि चीन एआई के मामले में बहुत आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा- ‘अगले 15 से 20 साल तक हमारे लिए चीन का मुकाबला करने की कोई संभावना नहीं है।’ उन्होंने मौजूदा हालात को एक ऐसी स्थिति बताया, जिसमें कौन विजेता है, इसका फैसला हो चुका है। उन्होंने कहा- ‘मेरी राय में चीन और अमेरिका के बीच की होड़ खत्म हो चुकी है।’
चेलियान ने कहा कि उनकी राय में चीन का दुनिया में दबदबा इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग (मशीन के स्वतः सीखने), और साइबर क्षमताओं के क्षेत्र में तरक्की की है। जबकि उन्होंने अमेरिका की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को अमेरिका सरकार के कुछ विभागों के मामले में ‘किंडर गार्डेन स्तर का’ बताया। चेलियान ने हाल ही में अमेरिका में टेक्नोलॉजी परिवर्तन के क्षेत्र में धीमी रफ्तार पर अपना विरोध जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद उन्होंने अपनी राय पहली बार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताई है।