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Canada: कनाडा ने खुफिया रिपोर्ट में माना- खालिस्तानियों से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा; भारत पर फिर लगाया आरोप
Sat, 02 May 2026 10:37 AM IST
Nirmal Kant
एएनआई, ओटावा।
एएनआई, ओटावा।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sat, 02 May 2026 10:37 AM IST
सार
Canada: कनाडा की खुफिया एजेंसी सीएसआईएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि खालिस्तानी तत्व देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं और कुछ देश भी कनाडा की राजनीति में दखल देने की कोशिश करते हैं। रिपोर्ट में एअर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके का जिक्र भी किया गया है। रिपोर्ट में क्या कुछ कहा गया, पढ़िए-
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खालिस्तानियों से कनाडा को खतरा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
कनाडा की सुरक्षा खुफिया सेवा ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में माना गया है कि खालिस्तानी तत्वों से कनाडा को खतरा पैदा हो रहा है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
सीएसआईएस की 2025 की रिपोर्ट कनाडा की संसद में पेश की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में मौजूद खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियां लगातार एक हिंसक चरमपंथी एजेंडा को बढ़ावा देती हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चीन, रूस और भारत ने जासूसी के जरिये कनाडा की अंदरूनी राजनीति में दखल दिया है। ये अकेले देश नहीं हैं जो ऐसा करने की कोशिश करते हैं।
एअर इंडिया उड़ान 182 की घटना जिक्र
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल एअर इंडिया की उड़ान 182 में बम विस्फोट की 40वीं बरसी थी, जिसके संदिग्ध कनाडा आधारित खालिस्तानी चरमपंथी समूहों के सदस्य थे। यह कनाडा के इतिहास का अब तक का सबसे घातक आतंकवादी हमला माना जाता है। इसमें 329 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर कनाडाई नागरिक थे। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कनाडा में खालिस्तानी समूहों से जुड़ा कोई हमला नहीं हुआ।
चरमपंथी समूहों की गतिविधियों से पैदा हो रहा खतरा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसे चरमपंथी समूहों की गतिविधियां कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। इनमें से कुछ लोग कनाडाई नागरिकों से जुड़े हैं और कनाडा की संस्थाओं का उपयोग करके अपने हिंसक एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं। समुदाय के लोगों से पैसे इकट्ठा करते हैं, जिन्हें बाद में हिंसक गतिविधियों में लगाया जाता है।
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भारत समेत इन देशों पर लगाए आरोप
इसमें आगे कहा गया है कि दुनिया में बदलते हालात के बीच चीन, रूस, भारत, ईरान, पाकिस्तान और कुछ अन्य देश कनाडा की राजनीति में दखल देने की कोशिश करते रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि भारत ने कनाडाई नेताओं, पत्रकारों और भारतीय मूल के समुदाय के लोगों से संबंध बनाए हैं, जिससे कनाडा में 'ट्रांसनेशनल रेप्रेशन' यानी सीमा पार दमन की स्थिति बनी है। इसमें निगरानी और दबाव जैसी गतिविधियां शामिल बताई गई हैं। जिनका उद्देश्य भारत सरकार की आलोचना को दबाना और समुदाय में डर पैदा करना है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कनाडा में खालिस्तान समर्थकों की मौजूदगी के कारण इस तरह की गतिविधियों पर निगरानी जरूरी है।
रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि भारत अपनी अंदरूनी स्थिरता के लिए खतरों का सामना करता है, जिसमें खालिस्तान अलगाववाद भी शामिल है। कनाडा में खालिस्तान समर्थन एक कानूनी राजनीतिक गतिविधि है।
ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संकट: अमेरिका ने ईरान के नेतृत्व को क्यों बताया 'गटर के चूहे'? तेहरान ने भी पलटवार किया
कार्नी के पीएम बनने के बाद संबंधों में सुधार
यह रिपोर्ट 2025 की खुफिया आकलन पर आधारित है। लेकिन हाल के समय में इसमें बदलाव के संकेत भी मिले हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद कनाडाई अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें लगता है कि भारत वर्तमान में कनाडा की धरती पर किसी हिंसक अपराध या खतरे से जुड़ा नहीं है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के प्रमुख माइक ड्यूहेम ने भी कहा कि कनाडा के लिए किसी विदेशी एजेंट से कोई सीधा खतरा साबित नहीं हुआ है।
भारत और कनाडा के संबंध हाल के वर्षों में काफी खराब हो गए थे। दरअसल, कनाडा ने खालिस्तानी तत्वों को लेकर नरमी दिखाई। कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने भारत सरकार पर आरोप लगाया था कि उसके एजेंट कथित रूप से उसकी हत्या में शामिल हो सकते हैं। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखा गया था। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया था और इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया था।
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रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
सीएसआईएस की 2025 की रिपोर्ट कनाडा की संसद में पेश की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में मौजूद खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियां लगातार एक हिंसक चरमपंथी एजेंडा को बढ़ावा देती हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चीन, रूस और भारत ने जासूसी के जरिये कनाडा की अंदरूनी राजनीति में दखल दिया है। ये अकेले देश नहीं हैं जो ऐसा करने की कोशिश करते हैं।
एअर इंडिया उड़ान 182 की घटना जिक्र
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल एअर इंडिया की उड़ान 182 में बम विस्फोट की 40वीं बरसी थी, जिसके संदिग्ध कनाडा आधारित खालिस्तानी चरमपंथी समूहों के सदस्य थे। यह कनाडा के इतिहास का अब तक का सबसे घातक आतंकवादी हमला माना जाता है। इसमें 329 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर कनाडाई नागरिक थे। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कनाडा में खालिस्तानी समूहों से जुड़ा कोई हमला नहीं हुआ।
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चरमपंथी समूहों की गतिविधियों से पैदा हो रहा खतरा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसे चरमपंथी समूहों की गतिविधियां कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। इनमें से कुछ लोग कनाडाई नागरिकों से जुड़े हैं और कनाडा की संस्थाओं का उपयोग करके अपने हिंसक एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं। समुदाय के लोगों से पैसे इकट्ठा करते हैं, जिन्हें बाद में हिंसक गतिविधियों में लगाया जाता है।
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भारत समेत इन देशों पर लगाए आरोप
इसमें आगे कहा गया है कि दुनिया में बदलते हालात के बीच चीन, रूस, भारत, ईरान, पाकिस्तान और कुछ अन्य देश कनाडा की राजनीति में दखल देने की कोशिश करते रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि भारत ने कनाडाई नेताओं, पत्रकारों और भारतीय मूल के समुदाय के लोगों से संबंध बनाए हैं, जिससे कनाडा में 'ट्रांसनेशनल रेप्रेशन' यानी सीमा पार दमन की स्थिति बनी है। इसमें निगरानी और दबाव जैसी गतिविधियां शामिल बताई गई हैं। जिनका उद्देश्य भारत सरकार की आलोचना को दबाना और समुदाय में डर पैदा करना है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कनाडा में खालिस्तान समर्थकों की मौजूदगी के कारण इस तरह की गतिविधियों पर निगरानी जरूरी है।
रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि भारत अपनी अंदरूनी स्थिरता के लिए खतरों का सामना करता है, जिसमें खालिस्तान अलगाववाद भी शामिल है। कनाडा में खालिस्तान समर्थन एक कानूनी राजनीतिक गतिविधि है।
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कार्नी के पीएम बनने के बाद संबंधों में सुधार
यह रिपोर्ट 2025 की खुफिया आकलन पर आधारित है। लेकिन हाल के समय में इसमें बदलाव के संकेत भी मिले हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद कनाडाई अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें लगता है कि भारत वर्तमान में कनाडा की धरती पर किसी हिंसक अपराध या खतरे से जुड़ा नहीं है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के प्रमुख माइक ड्यूहेम ने भी कहा कि कनाडा के लिए किसी विदेशी एजेंट से कोई सीधा खतरा साबित नहीं हुआ है।
भारत और कनाडा के संबंध हाल के वर्षों में काफी खराब हो गए थे। दरअसल, कनाडा ने खालिस्तानी तत्वों को लेकर नरमी दिखाई। कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने भारत सरकार पर आरोप लगाया था कि उसके एजेंट कथित रूप से उसकी हत्या में शामिल हो सकते हैं। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखा गया था। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया था और इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया था।