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Malaysia: संघर्षविराम के बाद थाईलैंड और कंबोडिया के अधिकारियों की मलयेशिया में बैठक, तनाव कम की कोशिशें तेज
Mon, 04 Aug 2025 05:56 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कुआला लंपुर।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कुआला लंपुर।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 04 Aug 2025 05:56 PM IST
सार
Malaysia: थाईलैंड के अधिकारियों ने संघर्षविराम के बाद पहली बार मलयेशिया में बैठक की। सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। बाद में अमेरिका के दबाव में संघर्षविराम लागू किया गया। बैठक में दोनों देशों ने भविष्य में झड़पों को रोकने के लिए जरूरी नियम तय करने पर चर्चा की।
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थाईलैंड और कंबोडिया के राष्ट्रीय ध्वज
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
थाईलैंड और कंबोडिया के अधिकारियों ने सोमवार को मलयेशिया में पहली बार आमने-सामने बैठक की। पिछले हफ्ते दोनों देशों के बीच घातक सीमा संघर्ष के बाद संघर्षविराम लागू हुआ था। उसके बाद यह पहली औपचारिक बैठक थी। इस संघर्ष में कई दर्जन लोगों की जान गई और 2.6 लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए।
चार दिन तक चलने वाली सामान्य सीमा समिति की यह बैठक पहले कंबोडिया में होनी थी। लेकिन बाद में दोनों देशों ने एक तटस्थ स्थान के तौर पर मलयेशिया में मिलने पर सहमति बनाई। मलयेशिया इस साल आसियान का अध्यक्ष भी और पिछले महीने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है।
ये भी पढ़ें: स्कॉटलैंड में गर्मियों के तूफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त, ट्रेनें रद्द; प्रशासन ने जारी की चेतावनी
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28 जुलाई को संघर्षविराम तब लागू हुआ, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों को आर्थिक दबाव में लेकर चेतावनी दी कि अगर संघर्ष बंद नहीं हुआ, तो अमेरिका उनके साथ कोई व्यापार समझौता नहीं करेगा। संघर्षविराम के बाद एक अगस्त को अमेरिका ने इन देशों से आयात होने वाले सामान पर टैरिफ 36 फीसदी से घटाकर 19% कर दिया।
आज बातचीत का मुख्य उद्देश्य यह था कि भविष्य में दोबारा कोई झड़प न हो, इसके लिए नियम तय किए जाएं। सीमा विवाद वाले इलाकों पर पुराने दावों को इस चर्चा का हिस्सा नहीं बनाया गया। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सदियों से शत्रुता है। एक समय दोनों शक्तिशाली साम्राज्य हुआ करते थे। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) ने प्रेह विहार मंदिर वाली जमीन पर कंबोडिया का हक बताया था, जिससे थाईलैंड नाराज हुआ। इसके बाद भी कई सीमा क्षेत्र ऐसे रहे, जिन्हें दोनों देश अपना बताते रहे।
ये भी पढ़ें: भारतीय मूल की मथुरा श्रीधरन ओहायो की नई सॉलिसिटर जनरल नियुक्त, बिंदी को लेकर हुईं ट्रोल
2011 में प्रेह विहार में फिर से संघर्ष भड़क गया था। 2013 में आईसीजे ने पहले वाले फैसले को दोहराया, जिससे थाईलैंड और नाराज हुआ। इस साल मई में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत के बाद हालात और बिगड़े। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर व्यापारिक और राजनयिक प्रतिबंध लगा दिए। पिछले महीने जब थाई सैनिक लैंड माइंस से घायल हुए और थाईलैंड ने इसके लिए कंबोडिया को दोषी ठहराया, तब हालात और बिगड़ गए। दोनों देशों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई और हर पक्ष ने दूसरे को दोषी ठहराया।
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चार दिन तक चलने वाली सामान्य सीमा समिति की यह बैठक पहले कंबोडिया में होनी थी। लेकिन बाद में दोनों देशों ने एक तटस्थ स्थान के तौर पर मलयेशिया में मिलने पर सहमति बनाई। मलयेशिया इस साल आसियान का अध्यक्ष भी और पिछले महीने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है।
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28 जुलाई को संघर्षविराम तब लागू हुआ, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों को आर्थिक दबाव में लेकर चेतावनी दी कि अगर संघर्ष बंद नहीं हुआ, तो अमेरिका उनके साथ कोई व्यापार समझौता नहीं करेगा। संघर्षविराम के बाद एक अगस्त को अमेरिका ने इन देशों से आयात होने वाले सामान पर टैरिफ 36 फीसदी से घटाकर 19% कर दिया।
आज बातचीत का मुख्य उद्देश्य यह था कि भविष्य में दोबारा कोई झड़प न हो, इसके लिए नियम तय किए जाएं। सीमा विवाद वाले इलाकों पर पुराने दावों को इस चर्चा का हिस्सा नहीं बनाया गया। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सदियों से शत्रुता है। एक समय दोनों शक्तिशाली साम्राज्य हुआ करते थे। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) ने प्रेह विहार मंदिर वाली जमीन पर कंबोडिया का हक बताया था, जिससे थाईलैंड नाराज हुआ। इसके बाद भी कई सीमा क्षेत्र ऐसे रहे, जिन्हें दोनों देश अपना बताते रहे।
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2011 में प्रेह विहार में फिर से संघर्ष भड़क गया था। 2013 में आईसीजे ने पहले वाले फैसले को दोहराया, जिससे थाईलैंड और नाराज हुआ। इस साल मई में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत के बाद हालात और बिगड़े। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर व्यापारिक और राजनयिक प्रतिबंध लगा दिए। पिछले महीने जब थाई सैनिक लैंड माइंस से घायल हुए और थाईलैंड ने इसके लिए कंबोडिया को दोषी ठहराया, तब हालात और बिगड़ गए। दोनों देशों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई और हर पक्ष ने दूसरे को दोषी ठहराया।
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