Cambodia-Thailand Ceasefire: कंबोडिया-थाईलैंड के बीच नया शांति समझौता, जानें इसमें ट्रंप की कितनी भूमिका
कंबोडिया और थाईलैंड ने जारी सीमा विवाद के बीच शनिवार दोपहर 12 बजे से तुरंत सीजफायर लागू किया है। सीमा पर हुए संघर्षों में 100 से अधिक लोग मारे गए और 5 लाख से ज्यादा विस्थापित हुए। समझौते में हथियारों का उपयोग रोकने, नागरिक सुरक्षा और मानवीय मदद बढ़ाने का वादा किया गया है।
कंबोडिया और थाईलैंड ने जारी सीमा विवाद के बीच शनिवार दोपहर 12 बजे से तुरंत सीजफायर लागू किया है। सीमा पर हुए संघर्षों में 100 से अधिक लोग मारे गए और 5 लाख से ज्यादा विस्थापित हुए। समझौते में हथियारों का उपयोग रोकने, नागरिक सुरक्षा और मानवीय मदद बढ़ाने का वादा किया गया है।
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कोबंडिया और थाईलैंड के बीच बीते कुछ दिनों से जारी संघर्ष के बीच अब एक अच्छी खबर सामने आ रही है। जहां दोनों देशों ने शनिवार से दोपहर 12 बजे से तुरंत प्रभावी सीजफायर (युद्धविराम) लागू करने का फैसला किया है। यह कदम कंबोडिया और थाईलैंड की साझा सीमा पर हाल ही में हुए हिंसक संघर्षों को कम करने और शांति बहाल करने के लिए उठाया गया है। एशिया का भूले-बिसरे इस संघर्ष में 100 से अधिक लोग मारे गए और करीब पांच लाख लोग विस्थापित हुए।
दोनों देशों ने यह निर्णय तीसरी विशेष सीमा समिति (जीबीसी) की बैठक के बाद लिया, जो प्रुम-बन पाक कार्ड अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी पर हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने शांति और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि विवादों का समाधान विश्वसनीयता, ईमानदारी, निष्पक्षता और आपसी सम्मान के माहौल में होना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर, आसियान चार्टर और दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्रता और सहयोग संधि के सिद्धांतों का पालन करने पर भी जोर दिया।
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टंप ने क्या किया था दावा?
बता दें कि पिछले दिनों थाईलैंड और कंबोडिया के बीच बढ़ते सीमा विवाद को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिनों बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि वह एक फोन कॉल करके थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी संघर्ष को रोक देंगे। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया था कि वह ताकत के दम पर शांति स्थापित कर रहे हैं।
सीजफायर के तहत इन बातों पर सहमति
बैठक में यह भी याद दिलाया गया कि 22 दिसंबर को कुआलालंपुर में हुई विशेष आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शांति और बल का उपयोग न करने का आग्रह किया गया था। सीजफायर के तहत दोनों देशों ने सहमति दी कि सभी प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल रोकना होगा। साथ ही नागरिक इमारतों और सैन्य ठिकानों पर कोई हमला नहीं होगा। दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि अनायास गोलीबारी, सैनिकों की किसी भी तरह की आग या हमला नहीं होना चाहिए।
इसके अलावा दोनों देश औटा कन्वेंशन के तहत खदान निषेध कानूनों का पालन करेंगे और सीमा क्षेत्र में मानवता के लिए खदानें हटाने का काम मिलकर करेंगे। साथ ही साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसी ट्रांसनेशनल क्राइम्स के खिलाफ सहयोग भी बढ़ाया जाएगा। सीजफायर के विश्वास बढ़ाने के कदम के रूप में, 18 कंबोडियाई सैनिकों को 72 घंटे की शांति के बाद लौटाया जाएगा।
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बैठक में शांति सहयोग पर दिया गया जोर
गौरतलब है कि बैठक की अध्यक्षता कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री जनरल टी सीहा और थाईलैंड के रक्षामंत्री जनरल नटाफॉन नार्कफानिट ने की, और आसियान निरीक्षक दल ने भी बैठक में भाग लिया। बैठक में शांति, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया। इस समझौते से आशा है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद शांतिपूर्ण तरीके से हल होंगे और क्षेत्र में स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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