ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर, प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने समझौते पर किए हस्ताक्षर
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर होने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। बताया जा रहा है ब्रिटेन ने ईयू से बाहर होने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। डील पर हस्ताक्षर करते हुए जॉनसन ने कहा कि देश के लिए यह शानदार पल है। 2016 के जनमत संग्रह का नतीजा आखिरकार लागू होने वाला है।
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि इससे दोनों (यूके और ईयू) के बीच सालों से हो रही बहस और अलगाव में कमी आएगी। समझौते के बाद जॉनसन सरकार 31 जनवरी तक ब्रेग्जिट डील पूरी कर सकती है। बता दें कि एक दिन पहले ही यूरोपीय संघ के नेताओं ने भी ब्रिटेन को बाहर करने के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे।
31 जनवरी के बाद 11 महीने का ट्रांजिशन पीरियड रखा गया है। इस दौरान ब्रिटेन यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं रहेगा, पर उसके नियमों का पालन करेगा और बजट में योगदान देगा। ट्रांजिशन पीरियड इसलिए रखा गया है ताकि ब्रिटेन और ईयू व्यापार समझौते समेत भविष्य में संबंधों पर बात कर सकें। ट्रांजिशन पीरियड 1 फरवरी से शुरू होगा।
29 जनवरी को ब्रिटिश संसद में यूरोप से बाहर होने के समझौतों पर चर्चा और वोटिंग होगी। यूरोप की संसद में भी इसी दिन यूके को बाहर करने पर वोटिंग होगी, हालांकि यह औपचारिकता ही होगी क्योंकि यूरोप के ज्यादातर नेता ब्रिटेन को ईयू से बाहर करने के फैसले पर हामी भर चुके हैं।
ब्रिटेन की जनता ने 28 देशों के यूरोपीय संघ से जून 2016 में अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद ईयू ने यूके को अलग होने के लिए 31 मार्च 2018 तक का समय दिया। हालांकि, तब ब्रिटिश सांसदों ने यूरोप से बाहर होने की सरकार की शर्तों को नामंजूर कर दिया था।
महारानी की हरी झंडी के बाद ‘ब्रेग्जिट’ को मंजूरी
कई वर्षों तक चली लंबी बहस के बाद अंतत: ब्रिटिश संसद ने यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन के अलग होने वाले ब्रेग्जिट विधेयक को मंजूरी दे दी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने गुरुवार को संसद से पारित किए गए ऐतिहासिक विड्रॉल एग्रीमेंट बिल को कानूनी तौर पर मंजूरी देने की औपचारिकता पूरी कर दी। इसके साथ ही जनवरी के अंत में ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से अलग होना तय हो गया है।
यह कानून 31 जनवरी को ब्रिटिश सरकार को ईयू से बाहर निकलने का कानूनी हक देता है। ब्रेग्जिट सचिव स्टीव बार्कले ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महारानी ने ब्रेग्जिट बिल को अपनी शाही मंजूरी देते हुए ब्रेग्जिट कानून बना दिया है। 31 जनवरी को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
निचला सदन हाउस ऑफ कॉमंस पहले ही ईयू से निकलने से संबंधित इस विधेयक पर मुहर लगा चुका है। ऊपरी सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स में इस बिल पर व्यापक चर्चा हुई और कुछ सुझाव भी पेश किए गए। इसके तहत, यूरोपीय यूनियन के नागरिकों के अधिकार और बाल शरणार्थी से संबंधित कुछ बदलाव थे।
हालांकि, इस बार सदन में चर्चा के दौरान शरणार्थी बच्चों पर बताए गए पांच सुझाव अस्वीकृत कर दिए गए हैं। इस अस्वीकृति पर पूर्व सांसद अल्फ डब्स ने कहा, हाउस ऑफ लॉर्ड्स में जीत के बाद हाउस ऑफ कॉमंस में शरणार्थी बच्चों से संबंधित सुझाव को नामंजूर कर दिया गया, यह निराशाजनक है।