अमेरिका में महंगाई: सरकार लाचार, जो बाइडन और जेफ बिजोस में हुई तकरार
जेफ बिजोस ने एक ट्वीट में कहा- ‘व्हाइट हाउस के लिए मुद्रास्फीति इतनी बड़ी समस्या बन गई है कि वहां से लगातार इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। लेकिन यह साफ तौर पर या तो एक गुमराह सोच है, या फिर बाजार कैसे चलता है कि उस बारे में गहरी नासमझी को दिखाता है।’
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बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ से उठाए जा रहे कदमों पर अमेरिका में मतभेद गहराने के संकेत हैं। इस मुद्दे पर बाइडन और अमेजन कंपनी के प्रमुख जेफ बिजोस में खुली तकरार हुई है। बाइडन ने तेल कंपनियों से कहा है कि वे प्राकृतिक गैस की कीमत घटाने के उपाय करें। राष्ट्रपति ने कहा कि गैस की महंगाई इस बात का सबूत है कि बाजार अमेरिकी उपभोक्ता की उम्मीदें तोड़ रहा है।
शनिवार को एक ट्वीट में बाइडन ने कहा था कि तेल कंपनियों को तुरंत दाम घटाने चाहिए। इस पर जेफ बिजोस ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने एक ट्वीट में कहा- ‘व्हाइट हाउस के लिए मुद्रास्फीति इतनी बड़ी समस्या बन गई है कि वहां से लगातार इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। लेकिन यह साफ तौर पर या तो एक गुमराह सोच है, या फिर बाजार कैसे चलता है कि उस बारे में गहरी नासमझी को दिखाता है।’
तेल की कीमत में 15 डॉलर से ज्यादा की गिरावट
रविवार को व्हाइट हाउस ने बिजोस की इस टिप्पणी का जवाब दिया। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ज्यां-पियरे ने ट्वीट किया- ‘पिछले महीने तेल की कीमत में 15 डॉलर से ज्यादा की गिरावट आई। लेकिन अमेरिकी उपभोक्ताओं को मिल रही गैस के दाम में शायद ही कहीं गिरावट देखी गई। यह बाजार का गतिशास्त्र नहीं है। यह वो बाजार है, जो अमेरिकी उपभोक्ताओं की अपेक्षा पर फेल हो रहा है।’
ज्यां-पियरे ने यह भी कहा- ‘अगर आप ऐसा सोचते हों, तो मुझे कोई हैरत नहीं होगी कि तेल और गैस कंपनियां अपनी बाजार संबंधी ताकत का इस्तेमाल रिकॉर्ड मुनाफा कमाने के लिए कर रही हैं। ऐसा अमेरिकी जनता की कीमत पर किया जा रहा है, जबकि अपेक्षा यह रहती है कि अर्थव्यवस्था अमेरिकी आवाम के हित में काम करे।’
विश्लेषकों के मुताबिक व्हाइट हाउस का यह दावा सही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत गिरी है, लेकिन उसका लाभ अमेरिकी उपभोक्ताओं को नहीं मिला है। उधर कंपनियों का कहना है कि ऐसा होना असमान्य नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरी कीमतों का घरेलू बाजार पर असर पड़ने में कुछ वक्त लगना आम बात है। बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि तमाम तेल रिफाइनरी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। इसलिए राष्ट्रपति बाइडन की मांग के मुताबिक उनके लिए ज्यादा उत्पादन कर सप्लाई बढ़ाना संभव नहीं है। समझा जाता है कि सप्लाई बढ़ने से गैस की कीमत गिरेगी।
तेल कंपनियों को दाम घटाने के लिए करें मजबूर
बाजार से जुड़ी एजेंसियों का कहना है कि उपभोक्ता को तेल या गैस किस कीमत पर मिलेगी, इसका संबंध सिर्फ तेल या गैस की लागत से नहीं होता। बाकी चीजों की कीमत तय करना तेल कंपनियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। लेकिन ऐसे तर्कों से तेल कंपनियों की आलोचना कम नहीं हुई है। कई हलकों से सरकार से मांग की जा रही है कि वह अपने अधिकार का इस्तेमाल कर कंपनियों को दाम घटाने पर मजबूर करे।
बाइडन प्रशासन ने तेल और गैस की बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्हें पेट्रोलियम के स्ट्रेटेजिक रिजर्व (सरकारी भंडार) से बाजार के लिए तेल जारी करना, गैस संबंधी पर्यावरणीय नियमों में ढील देना, और कांग्रेस (संसद) से संघीय गैस टैक्स पर फिलहाल रोक लगाने की अपील शामिल हैं। लेकिन इन कोशिशों का कोई खास असर बाजार में नहीं दिखा है।