World Population: साल 1950 से 2022 के बीच तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गई दुनिया की आबादी
World Population: जनसंख्या विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि अब जनसंख्या में हो रही वृद्धि का एक प्रमुख कारण यह है कि लोगों का जीवन काल बढ़ गया है। 2019 में दुनिया में औसत जीवन प्रत्याशा 72 साल थी। 1990 की तुलना में यह नौ वर्ष ज्यादा है। 2050 तक औसत जीवन प्रत्याशा बढ़ कर 77 वर्ष हो जाने का अनुमान है...
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मंगलवार यानी 15 नवंबर को दुनिया की आबादी आठ अरब तक पहुंच गई। इस तरह बीते 72 साल दुनिया की आबादी तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ी है। 1950 में दुनिया की आबादी सिर्फ 2.5 अरब थी। संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया है कि अगर आबादी बढ़ने की मौजूदा दर जारी रही, तो 2030 तक दुनिया की आबादी साढ़े आठ अरब और 2050 तक नौ अरब 70 करोड़ हो जाएगी। यही रफ्तार रही, तो साल 2100 तक दुनिया की आबादी 10 अरब 40 तक पहुंच जाएगी।
वैसे संयुक्त राष्ट्र की गणना के मुताबिक दुनिया में आबादी बढ़ने की रफ्तार घट रही है। इससे 2080 में विश्व जनसंख्या अपने चरम तक पहुंच जाएगी। उसके बाद आबादी में गिरावट शुरू हो सकती है। वैसे दुनिया में 61 देश ऐसे हैं, जिनकी आबादी से अब से 2050 के बीच एक फीसदी गिर जाएगी। जनसंख्या में सबसे ज्यादा गिरावट लातविया, बुल्गारिया, सर्बिया, लिथुआनिया और यूक्रेन में आने का अनुमान है। उन देशों में कुल मिला कर आज की तुलना में जनसंख्या 20 फीसदी तक घट सकती है।
जनसंख्या विशेषज्ञों के मुताबिक आबादी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 1960 के दशक में हुई। उसके बाद गर्भनिरोधकों की उपलब्धता और आम तौर पर समाजों के विकास के कारण जनसंख्या वृद्धि की दर गिरने लगी। खास कर उन महिलाओं में जन्म दर गिरी, जो शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी-पेशा हो गईं। अब दुनिया में प्रति महिला औसत जन्म दर दो बच्चों की है। जबकि 1950 के दशक में यह दर पांच थी। हालांकि जानकारों के मुताबिक ये आंकड़ा अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग है। सब-सहारा अफ्रीका में प्रति महिला जन्म दर आज प्रशांत क्षेत्र की तुलना में चार गुना ज्यादा है।
जनसंख्या विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि अब जनसंख्या में हो रही वृद्धि का एक प्रमुख कारण यह है कि लोगों का जीवन काल बढ़ गया है। 2019 में दुनिया में औसत जीवन प्रत्याशा 72 साल थी। 1990 की तुलना में यह नौ वर्ष ज्यादा है। 2050 तक औसत जीवन प्रत्याशा बढ़ कर 77 वर्ष हो जाने का अनुमान है।
कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में औसत जीवन प्रत्याशा में एक साल की गिरावट आई। बीते वर्ष यह 71 साल थी। औसत जीवन प्रत्याशा के मामले में भी दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में असमानता है। मसलन, धनी देशों की तुलना में आम तौर पर गरीब देशों में लोग सात वर्ष कम जीवित रहते हैं।
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या कुल आबादी में 16 फीसदी हो जाएगी। अभी ये संख्या दस फीसदी है। दुनिया की आधी से भी ज्यादा आबादी अब एशिया में है। दक्षिण एशिया में दुनिया के 26 फीसदी लोग रहते हैं। अगले वर्ष चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। वैसे 2050 तक आबादी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कोंगो, मिस्र, इथियोपिया, भारत, नाईजीरिया, पाकिस्तान, फिलीपींस और तंजानिया में दर्ज होगी। जबकि चीन के बारे में अनुमान लगाया गया है कि वहां आबादी में गिरावट का दौर जारी रहेगा।