{"_id":"60520a4b8ebc3e5926537fbe","slug":"before-high-level-bilateral-talks-between-us-and-china-in-anchorage-city-of-the-alaska-both-countries-become-stiff","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलास्का बैठक से पहले माहौल गरमाया, चीन की उम्मीदों पर फिलहाल फिरा पानी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अलास्का बैठक से पहले माहौल गरमाया, चीन की उम्मीदों पर फिलहाल फिरा पानी
Wed, 17 Mar 2021 07:26 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 17 Mar 2021 07:26 PM IST
सार
एंकरेज में ब्लिंकेन और अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान की चीन की पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग जिची और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात होगी। पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ दो घंटों तक फोन पर बात की थी...
विज्ञापन
यूएस और चीन का झंडा
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिकी राज्य अलास्का के एंकरेज शहर में गुरुवार से शुरू होने वाली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के पहले संकेत हैं कि चीन और अमेरिका दोनों ने अपना रुख सख्त कर लिया है। जानकारों का कहना है कि ऐसा लगता है कि दोनों देश चाहते हैं कि बातचीत उनके तय किए खाके में हो। मंगलवार को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने टोक्यो में जापानी नेताओं से बातचीत के समय खास कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ‘चीन के जोर-जबरदस्ती और अस्थिरता पैदा करने वाले व्यवहार’ की चर्चा की।
विज्ञापन
इस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। चीनी विश्लेषकों की राय पर आधारित एक फौरी टिप्पणी में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि ज्यादातर टकराव अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने पैदा किया है। इसलिए इस पर अमेरिका को फिर से विचार करना चाहिए कि इस क्षेत्र में बने नकारात्मक प्रभाव को कैसे कम किया जाए। टिप्पणी में कहा गया कि ऐसा ना होने पर और ज्यादा अस्थिरता पैदा होगी। चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अलास्का बैठक में चीन और अमेरिका को द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लौटाने का मौका मिलेगा। लेकिन उन्होंने कहा-दोनों पक्ष अभी इस पर विचार कर रहे हैं कि बैठक में क्या खास एजेंडा होगा।
विज्ञापन
एंकरेज में ब्लिंकेन और अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान की चीन की पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग जिची और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात होगी। पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ दो घंटों तक फोन पर बात की थी। इससे दोनों देशों का अनबोलापन टूटा। लेकिन इस वार्ता के बारे में दोनों देशों ने जो ब्योरा दिया, उससे जाहिर हुआ कि उनके बीच मतभेद बहुत गहरा है। व्हाइट हाउस से जारी बयान में कहा गया था कि बातचीत के दौरान बाइडन ने चीन की जोर-जबरदस्ती, अनुचित आर्थिक व्यवहार, हांगकांग में कार्रवाई, शिनजियांग प्रांत में मानव अधिकारों के हनन और ताइवान सहित उस इलाके में लगातार बढ़ रहे चीन के अधिकार जताने वाले रुख की चर्चा की। जानकारों का कहना है कि अलास्का में भी अमेरिका ये सारे मुद्दे उठाएगा।
विज्ञापन
बाइडेन-शी वार्ता के बाद चीन की समाचार एजेंसी ने शिन्हुआ ने कहा था कि बाइडन ने इस ओर ध्यान दिलाया कि अमेरिका चीन के साथ खुला और रचनात्मक संवाद बनाने के लिए तैयार है। लेकिन टोक्यो में मंगलवार को हुई वार्ताओं के बाद जारी साझा बयान से ये संकेत मिला कि व्हाइट हाउस ने पिछले महीने बाइडन-शी वार्ता के बाद जो बयान जारी किया था, अमेरिका उसी घोषित लाइन पर चल रहा है। अमेरिकी नजर में कई ऐसे मसले हैं, जिन पर चीन के साथ उसकी सहमति बनने की गुंजाइश कम है।
मंगलवार को ही ऑस्ट्रेलियाई अखबार सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड को दिए एक इंटरव्यू में व्हाइट हाउस के इंडो-पैसिफिक कोऑर्डिनेटर कुर्त कैंपबेल ने कहा कि जब तक चीन ऑस्ट्रेलिया को धमकाना बंद नहीं करता, अमेरिका उससे संबंध सुधारने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ चीन के संबंध पिछले साल से तनावपूर्ण चल रहे हैं। इसकी शुरुआत तब हुई थी, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति की अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की थी।
ताजा अमेरिकी बयानों से चीन में जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद पैदा हुई उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिरता दिख रहा है। अमेरिका ने चीन के इस बयान को भी ठुकरा दिया है कि अलास्का में होने वाली बातचीत दोनों देशों के बीच ‘रणनीतिक वार्ता’ होगी। इस संबंध में आए चीन के बयान पर विदेश मंत्री ब्लिंकेन ने साफ कहा कि यह ‘रणनीतिक वार्ता’ नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई इरादा नहीं है कि इस वार्ता के बाद बातचीत की शृंखला शुरू हो जाएगी। आगे बातचीत का होना चीन के साथ चिंता के मुद्दों पर प्रगति पर निर्भर करता है।
तमाम संकेत ऐसे हैं कि ब्लिंकेन के इस रुख से चीन में असहजता पैदा हुई है। चीन इसे लेकर भी असहज है कि बातचीत का कोई ढांचा तय नहीं किया गया है। अब जापान को अमेरिका ने जो महत्व दिया है, उसे इस बात का संकेत माना गया है कि बाइडन प्रशासन अपनी चीन रणनीति में जापान की बड़ी भूमिका देखता है। ये बात भी चीन को नागवार गुजरी है।