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प्रदूषण पीड़ित शहरों के लिए मिसाल बनेगा बार्सिलोना, अगले 10 सालों में शहर से कम की जाएंगी कारें
Thu, 12 Nov 2020 04:40 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बार्सिलोना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बार्सिलोना
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 12 Nov 2020 04:40 PM IST
सार
2016 में तैयार सुपरब्लॉक पॉलिसी को लागू किया जाएगा। उस नीति के तहत सड़कों के बीच में पौधे लगाकर और बेंच बनाकर यातायात को धीमा करने की बात सोची गई थी...
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Barcelona
- फोटो : File Photo
विस्तार
स्पेन के शहर बार्सिलोना में प्रदूषण घटाने और शहर को बढ़ती भीड़-भाड़ से बचाने के लिए एक ऐसी पहल शुरू की गई है, जिससे हो सकता है कि आने वाले वर्षों में इन समस्याओं से गुजर रहे दुनिया के तमाम शहरों को सीख मिले। इस मकसद के लिए बार्सिलोना में दस साल की एक महत्वाकांक्षी योजना पर अमल शुरू कर दिया है। इसके तहत शहरों में चलने वाली कारों की संख्या घटाने, चौराहों पर लोगों के घूमने- फिरने की जगह बढ़ाने और इलाकों को हरा-भरा करने की कोशिश की जाएगी।
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शहर की सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाली सड़कों में से एक आइक्सांपल डिस्ट्रिक्ट है। इसका डिजाइन पिछली सदी के मशहूर इंजीनियर इदेफोन्स सेद्रा ने तैयार किया था। इसे अब ग्रीन जोन घोषित कर दिया गया है। अब यहां रास्तों को पैदल और साइकिल से चलने वाले लोगों के अनुकूल बनाया जा रहा है। सड़क पर 21 सार्वजनिक सर्किल बनाए जा रहे हैं। उन्हें छोटे पार्क की शक्ल दी जाएगी।
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नियोजकों का कहना है कि उनका मकसद कारों पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि सड़क का ढांचा ऐसा बना देना है जिससे कार चलाना आनंददायक ना रह जाए। शहर के उप मेयर जेनेट सांज ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा कि सेद्रा ने पिछली सदी के अनुरूप बार्सिलोना को आधुनिक रूप दिया था। अब हम 21वीं सदी की जरूरतों के मुताबिक इसे ढाल रहे हैं।
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इस योजना पर करीब पौने चार करोड़ यूरो खर्च होने का अनुमान है। ये रकम अगले दस साल में खर्च की जाएगी। इसके तहत 2016 में तैयार सुपरब्लॉक पॉलिसी को लागू किया जाएगा। उस नीति के तहत सड़कों के बीच में पौधे लगाकर और बेंच बनाकर यातायात को धीमा करने की बात सोची गई थी। इस योजना के तहत सड़कों में साइकिल लेन, बच्चों के खेलने की जगह और हरित क्षेत्र बनाए जाएंगे। कार पार्किंग की कई जगहों को पार्कों में तब्दील कर दिया जाएगा।
फिलहाल ये योजना छह स्ट्रीट्स में लागू की जा रही है। 11 अन्य स्ट्रीस्ट में अगले कुछ वर्षों में इस पर अमल होगा। इरादा यह है कि पूरे शहर को अगले कुछ वर्षों के अंदर इस योजना में शामिल कर लिया जाए। बार्सिलोना उन यूरोपीय शहरों में है, जहां प्रति वर्ग किलोमीटर कार घनत्व सबसे ज्यादा है। यहां प्रति वर्ग किलोमीटर पर छह हजार से ज्यादा कारें हैं। वैन और मोटरसाइकिल इसके अतिरिक्त हैं। इन वाहनों के कारण शहर में भीड़ बनी रहती है, साथ ही प्रदूषण भी बढ़ता चला गया है।
बार्सिलोना में लंबे समय से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (प्रदूषक गैस) के उत्सर्जन की मात्रा यूरोपियन यूनियन या विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से तय की गई सीमा से ज्यादा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये सीमा 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तय कर रखी है। बार्सिलोना में ये स्तर 47 माइक्रोग्राम से अधिक बना रहता है।
इसके पहले फ्रांस के पेरिस और इटली के मिलान शहरों में भी प्रदूषण नियंत्रण की ऐसी योजनाएं अपनाई गई हैं। वहां फुटपाथ को चौड़ा किया गया है, सड़कों पर साइकिल लेन उपलब्ध कराए गए हैं और कार पार्किंग की जगहों पर बंद किया गया है। कोरोना महामारी फैलने के बाद ऐसे तमाम प्रयासों में अब ज्यादा संसाधन झोंके जा रहे हैं।
कार इंडस्ट्री ने हर जगह इस तरह के फैसलों का विरोध किया है। लेकिन मीडिया रिपोर्टों से जाहिर होता है कि बार्सिलोना में आम लोग इस पहल से खुश हैं। स्वस्थ जीवन के लिए जीवन की रफ्तार घटाने का सौदा उन्हें मंजूर है।