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Bangladesh: बांग्लादेश की जटिलताओं ने बढ़ाई भारत की चिंता; कोई देश क्यों नहीं दे रहा शेख हसीना को शरण?

Tue, 06 Aug 2024 08:59 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 06 Aug 2024 08:59 PM IST
सार

बांग्लादेश में हुए इस सत्ता बेदखली को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद के दोनों सदनों में बयान दिया है। विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, एनएसए अजीत डोभाल से भी मंत्रणा की है।

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Bangladesh's complexities have increased India's concern; Why is no country giving asylum to Sheikh Hasina?
शेख हसीना - फोटो : एएनआई

विस्तार

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा देने और भारत आने के बाद से पड़ोसी देश के अंदरुनी हालात चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। भारत ने स्थिति की गंभीरता को देखकर पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम में सीमा सुरक्षा बल को खास एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं। शेख हसीना भारत से ब्रिटेन, फिनलैंड या फिर खाड़ी देश में शरण लेने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिल पाई है। सूत्र बताते हैं कि दुनिया के एक ताकतवर देश के कारण हसीना को इसमें कामयाबी नहीं मिल पा रही है। वहीं, पूर्व विदेश सचिव श्याम शरण ने शेख हसीना को भारत में शरण देने की वकालत की है।

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बांग्लादेश में हुए इस सत्ता बेदखली को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद के दोनों सदनों में बयान दिया है। विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, एनएसए अजीत डोभाल से भी मंत्रणा की है। भारत बांग्लादेश के हालात पर भी बारीकी से नजर रख रहा है। वहां करीब 19000 हजार भारतीय हैं। इनमें से 9000 के करीब छात्र रहते हैं। हालांकि अनुमान के मुताबिक 5000 से अधिक छात्र भारत आ चुके हैं। इसके अलावा पड़ोसी देश में हिन्दुओं की आबादी 7.95 प्रतिशत(1.30 करोड़ के करीब) है। ऐसे में यदि वहां हालात तेजी से सामान्य न हुए तो भारत पर शरणार्थी के साथ-साथ कई अन्य तरह का दबाव बन सकता है।
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बांग्लादेश से भारत का बहुत करीब का रिश्ता है
भारत के प्रयास से बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग होकर स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य बना था। हालांकि बांग्लादेश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई लगातार सक्रिय रही है। वहां के रजाकार कहे जाने वाले लोग 70 के दशक में भी पाकिस्तान के समर्थक थे। करीब आधा दर्जन कट्टरपंथी संगठनों के तार भी इस्लामाबाद से जुड़े बताए जाते हैं। इसके अलावा बांग्लादेश में चीन का अपना काफी हित है। चीन की नजर लगातार चटगांव पर रहती है। इधर एशिया और हिन्द महासागरीय क्षेत्र में बढ़ रहे चीन के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका भी बांग्लादेश में खासा रुचि ले रहा था। अमेरिका बांग्लादेश में अपनी हवाई पट्टी खोलने की भी अनुमति चाहता था। इसके सामानांतर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहते शेख हसीना ने इस तरह के किसी भी प्रयास को फलीभूत नहीं होने दिया। शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत के साथ हुए समझौते को आगे बढ़ाया और अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ न होने की प्रतिबद्धता दिखाई। भारत भी नहीं चाहता कि उसके पड़ोस में दुनिया की कोई शक्ति अपना कोई आधार बनाए। इसके समानांतर भारत की कोशिश हमेशा अपने मजबूत, स्थायी, संप्रभु और स्वतंत्र पड़ोसी देशों की रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले पड़ोसी की इसी नीति को आगे बढ़ाया। इस तरह से बांग्लादेश से भारत का काफी करीब का रिश्ता रहा है।
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क्यों बढ़ रही भारत की चिंता?
पहली चिंता शेख हसीना और उन्हें शरण देने को लेकर है। शेख हसीना को शरण देने में फायदा और नुकसान दोनों है। फिलहाल नुकसान की संभावना अधिक है, क्योंकि अगले कुछ दिनों में पड़ोसी देश के हालात सामान्य न हुए और हिंसा की स्थिति बनी रही तो चिंता बढ़ेगी। सोमवार को वहां 130 से अधिक लोग मारे गए। अभी तक 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसमें छात्रों की संख्या ठीकठाक है। मंगलवार को भी हिंसा, आगजनी, लूटपाट की घटनाएं हुई हैं। इस स्थिति में बांग्लादेश के आंदोलनकारी वर्ग के  भीतर शेख हसीना को शरण देने के कारण भारत विरोध बढ़ेगा। इसकी प्रतिक्रिया में वहां की कट्टरपंथी ताकतें हिन्दुओं पर अत्याचार बढ़ा सकती हैं। इससे भारत से लगती सीमा पर शरणार्थी भारत की चिंता बढ़ा सकते हैं। इस स्थिति को बढ़ावा देने में पाकिस्तान और चीन की ताकतें आग में घी डालने का काम कर सकती हैं। हलांकि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनैतिक स्थितियों को देखते हुए रूस बांग्लादेश में अमेरिकी दखल नहीं चाहता। बताते हैं प्रधानमंत्री की रूस यात्रा के दौरान क्षेत्रीय चर्चा में बांग्लादेश के हालात पर सूचना के आदान-प्रदान हुए थे। रूस काफी पहले से आशंका जता रहा है कि अमेरिका की ताकतें जल्द ही बांग्लादेश में पूरा जोर लगाकर शेख हसीना को सत्ता से हटा सकती हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका की इस नाराजगी की आशंका को भांपकर ही ब्रिटेन जैसे देश शेख हसीना को अभी शरण देने से संकोच कर रहे हैं। हालांकि बांग्लादेश में ऐसा नहीं है कि वहां शेख हसीना और उनकी पार्टी के समर्थक नहीं हैं। माना जा रहा है कि अंतरिम सरकार के गठन कुछ महीने बाद फिर वातावरण बदल सकता है।

अभी क्या है भारत की योजना?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अभी शेख हसीना को शरण देने की घोषणा नहीं की है। भारत का कहना है कि शेख हसीना अभी सदमें में हैं। इसलिए वह शेख हसीना को सुरक्षित स्थान (दूसरे देश) पर जाने के लिए कुछ समय दे रहा है। जयशंकर ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि शेख हसीना को भारत ने नहीं बुलाया है। बल्कि वह वहां हिंसा के हालात को देखकर सुरक्षा की दृष्टि से भारत आईं। शेख हसीना के पास बहुत कम समय था। उनका आग्रह था और बांग्लादेश के अधिकारियों ने हवाई सीमा में आने की अनुमति मांगी थी। ऐसे संवेदनशील समय में भारत किसी तरह से बांग्लादेश में अपने विरोध का वातावरण बनने से बच रहा है।


इसके साथ-साथ भारत बांग्लादेश की अथॉरिटी के संपर्क में है। बंग्लादेश की सेना और वहां की अथॉरिटी से भारतीय उच्चायोग और अपने लोगों की सुरक्षा के लिए संपर्क कर रहा है। नई दिल्ली की कोशिश यथा शीघ्र ढाका में नई अंतरिम सरकार के गठन को लेकर है। ताकि पड़ोसी देश में हालात तेजी से सामान्य हो सकें। क्योंकि हिंसा, अस्थिरता और इसके कारण असुरक्षा के चलते भारत को अपने लोगों को बांग्लादेश से सुरक्षित निकालने के कदम पर भी विचार करना पड़ सकता है। यह इतना आसान भी नहीं होगा। दरअसल, मंगलवार को कई घटनाक्रम हुए हैं। बांग्लादेश की पुलिस हड़ताल पर चली गई है। वहां पुलिस ने अपने सुरक्षा की मांग की है। बांग्लादेश में हालात को देखकर वहां के तमाम बड़े सैन्य अफसरों का तबादला किया गया है। कुछ को हटा दिया गया है। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने छात्रों, आंदोलनकारियों की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए तीनों सेना प्रमुखों से चर्चा के बाद वहां की संसद को भंग कर दिया है। बीएनपी की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को रिहा कर दिया है। ताकि विपक्ष को एक नेता मिल सके। जमात-ए-इस्लामी के एक हजार से अधिक हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया है। वहां के एक मंत्री दिल्ली भागना चाहते थे और उन्हें हवाई अड्डे पर ही गिरफ्तार कर लिया गया है।

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