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कौन हैं गादी आइजेनकोट?: नेतन्याहू के साथ किया काम, फिर क्यों बने सियासी विरोधी; युद्ध में खो चुके हैं बेटा

Sun, 08 Nov 2026 12:06 PM IST
देवेश त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Sun, 08 Nov 2026 12:06 PM IST
सार

इस्राइल की राजनीति में गादी आइजेनकोट तेजी से उभरे हैं। चार दशक से अधिक समय तक सेना में सेवा देने वाले आइजेनकोट 2015 से 2019 तक आईडीएफ प्रमुख रहे। हमास के 7 अक्तूबर 2023 के हमले के बाद वह नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट में शामिल हुए, लेकिन बाद में सरकार की रणनीति और जवाबदेही को लेकर मतभेद के चलते अलग हो गए।

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गादी आइजेनकोट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इस्राइल में सत्ता परिवर्तन की संभावना के बीच राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने विपक्षी नेता और याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजेनकोट को नई सरकार बनाने का पहला मौका दिया है। पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रमुख चुनावी प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आए।
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सरकार बनाने की न्योता मिलने पर आइजेनकोट ने कहा कि अब देश में राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय आ गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि उनकी पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरी उतरे।
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कौन हैं गादी आइजेनकोट?
लंबे समय से मिजराही समुदाय के कई मतदाता नेतन्याहू की लिकुड पार्टी का समर्थन करते रहे हैं। 66 वर्षीय आइजेनकोट का जन्म 19 मई 1960 को तिबेरियास में मोरक्को से आए एक यहूदी प्रवासी परिवार में हुआ था। उनका परिवार आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से था। वह तिबेरियास और इलात में पले-बढ़े।
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  • इस्राइल में अब तक कोई मिजराही प्रधानमंत्री नहीं बना है। अगर आइजेनकोट सरकार बनाने में सफल होते हैं तो यह देश के इतिहास में पहली बार होगा। 
  • आइजेनकोट नौ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं और पांच बच्चों के पिता हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन इस्राइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) में बिताया। 
  • उन्होंने 1978 में गोलानी ब्रिगेड में भर्ती होकर सैन्य करियर शुरू किया। करीब 40 साल के करियर के दौरान वह 2015 से 2019 तक इस्राइल के सेना प्रमुख रहे। इस दौरान बेंजामिन नेतन्याहू प्रधानमंत्री थे।
  • आइजेनकोट ने सेना में अपने करियर की शुरुआत एक सैनिक के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और ऑपरेशनल जिम्मेदारियां संभालीं।
  • वह गोलानी ब्रिगेड के कमांडर, वेस्ट बैंक में यहूदिया और सामरिया डिवीजन के प्रमुख, सेना के ऑपरेशंस विभाग के प्रमुख और उत्तरी कमान के प्रमुख रहे। 2013 में उन्हें सेना का डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया।
  • 16 फरवरी 2015 को तत्कालीन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें इस्राइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) का प्रमुख नियुक्त किया। करीब 41 साल की सैन्य सेवा के बाद उन्होंने सेना से सेवानिवृत्ति ले ली।
नेतन्याहू के साथ काम किया, फिर बन गए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी
आइजेनकोट और नेतन्याहू का रिश्ता काफी पुराना है। नेतन्याहू ने ही उन्हें 2015 में सेना की सर्वोच्च कमान सौंपी थी। लेकिन समय के साथ दोनों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद बढ़ते गए। अक्तूबर 2023 में हमास के हमले के बाद आइजेनकोट नेतन्याहू की आपातकालीन सरकार में शामिल हुए। वह युद्ध कैबिनेट के पर्यवेक्षक सदस्य भी रहे। हालांकि, जून 2024 में उन्होंने और बेनी गैंट्ज ने सरकार छोड़ दी।

आइजेनकोट का आरोप था कि सरकार युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति बनाने में नाकाम रही और राजनीतिक हितों को राष्ट्रीय सुरक्षा के फैसलों पर हावी होने दिया जा रहा है। उन्होंने 7 अक्तूबर के हमास हमले से जुड़ी सुरक्षा चूकों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की। उनका मानना है कि सरकार और सुरक्षा तंत्र की विफलताओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सेना में रहते हुआ विवाद
आइजेनकोट के कार्यकाल में इस्राइली सेना के इतिहास की एक विवादित घटना भी हुई। 2016 में सार्जेंट एलोर अजारिया ने हेब्रोन में घायल फलस्तीनी हमलावर को गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। दक्षिणपंथी नेताओं के दबाव के बावजूद आइजेनकोट ने इस मामले में सैन्य जांच और मुकदमे का समर्थन किया। उनका कहना था कि वह सेना के अनुशासन और नैतिक मूल्यों की रक्षा कर रहे हैं।

दिसंबर 2023 में बेटे को युद्ध में खोया
आइजेनकोट की राजनीतिक और निजी जिंदगी पर गाजा युद्ध का गहरा असर पड़ा। दिसंबर 2023 में गाजा में सैन्य अभियान के दौरान उनके बेटे गाल आइजेनकोट की मौत हो गई। इसके अलावा उनके दो भतीजे भी गाजा में लड़ाई के दौरान मारे गए।

परिवार के इन सदस्यों को खोने के बावजूद आइजेनकोट ने राजनीति में सक्रिय रहने का फैसला किया। उनके समर्थक इसे देश की सुरक्षा और भविष्य को लेकर उनकी प्रतिबद्धता से जोड़ते हैं। वहीं, उनकी निजी क्षति ने उन्हें इजरायल में युद्ध और सरकार की जवाबदेही पर होने वाली बहस के केंद्र में ला दिया है।

अप्रैल 2026 में अखबार येदियोत अहरोनोत में लिखे एक लेख में आइजेनकोट ने कहा था, "गाल की कब्र पर मैंने कसम खाई थी कि उसने और उसके दोस्तों ने जो कीमत चुकाई है, चाहे वे उन्हें जानते थे या नहीं, वह व्यर्थ नहीं जाएगी।" उन्होंने इस संकल्प को अपने राजनीतिक मिशन का अहम हिस्सा बताया है।

सेना से राजनीति तक का सफर
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद आइजेनकोट ने सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर काम किया। 2022 में उन्होंने बेनी गैंट्ज की नेशनल यूनिटी पार्टी के साथ राजनीति में कदम रखा और इजरायल की संसद नेसेट के लिए चुने गए। वह संसद की विदेश मामलों और रक्षा समिति से भी जुड़े रहे।

सितंबर 2025 में उन्होंने नेशनल यूनिटी से अलग होकर अपनी नई पार्टी 'याशर' बनाई। हिब्रू भाषा में याशर का अर्थ सीधा या ईमानदार होता है। उनकी पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, 7 अक्टूबर की घटनाओं की जांच और देश में सभी समुदायों के लिए सैन्य या राष्ट्रीय सेवा की व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता देती है।

आइजेनकोट अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी समुदाय के पुरुषों को भी सैन्य सेवा के दायरे में लाने के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि देश की सेवा की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की होनी चाहिए।


फलस्तीनियों को लेकर क्या होगी उनकी नीति?
आइजेनकोट इस्राइल के सुरक्षा प्रतिष्ठान से आते हैं। उनके संभावित गठबंधन सहयोगियों में कुछ दक्षिणपंथी दल भी हो सकते हैं, जो इस्राइल की मौजूदा रणनीतिक दिशा में बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं हैं। गाजा को लेकर आइजेनकोट ने 18 महीने के भीतर हमास का शासन खत्म करने का वादा किया है। इसके लिए वह ट्रंप की युद्धविराम योजना लागू करने या अपने शब्दों में "रचनात्मक" सैन्य अभियानों का सहारा लेने की बात करते हैं।

व्यवहार में नेतन्याहू के घोषित लक्ष्य भी इससे काफी मिलते-जुलते हैं। हालांकि, आइजेनकोट का आरोप है कि "जब तक नेतन्याहू सत्ता में हैं, हमास सत्ता में बना रहेगा।" राजनीति में आने से पहले आइजेनकोट ने चेतावनी दी थी कि वेस्ट बैंक में फलस्तीनियों पर इस्राइल का लगातार नियंत्रण एक द्विराष्ट्रीय देश बनने का खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने इसे "यहूदी राष्ट्र के सपने का अंत" बताया था।
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