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बांग्लादेश: शेख हसीना ने पेश की अपनी ‘शांति दूत’ की छवि, जारी किया ढाका घोषणापत्र

Mon, 06 Dec 2021 05:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 06 Dec 2021 05:58 PM IST
सार

शेख हसीना ने कहा कि अपने पास सीमित संसाधन होने के बावजूद बांग्लादेश ने म्यांमार से विस्थापित हजारों रोहिंग्या मुसलमानों को पनाह दी है। इसके अलावा उसने हमेशा फिलस्तीन के लोगों की न्यायोचित मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- ‘हमें इस बात का गर्व है कि हमने संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षण कार्यों में सबसे ज्यादा सैनिक भेजे हैं। हमने आतंकवाद और हिंसका उग्रवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई है।’

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Bangladesh PM Sheikh Hasina presents her peace messenger image, releases Dhaka Declaration
बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

बांग्लादेश में विपक्ष के साथ जारी टकराव के बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद ने अब दुनिया में अपनी छवि शांति दूत के रूप में बनाने की कोशिश की है। इस क्रम में उन्होंने उन घटनाओं को भी अपनी उपलब्धि के रूप में पेश किया है, जिसे लेकर देश के अंदर ध्रुवीकरण बढ़ता गया है। शेख हसीना ने बांग्लादेश की आजादी की 50वीं सालगिरह और अपने पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के जन्मशती वर्ष के मौके पर यहां अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन का आयोजन किया। उसे संबोधित करते हुए उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि वह अपने संसाधन हथियारों पर खर्च करने के बजाय उनका निवेश टिकाऊ विकास की योजनाओं में करे।

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विश्व शांति सम्मेलन में दिए अपने भाषण में शेख हसीना वाजेद ने इस बात का भी जिक्र किया कि 2008 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने बंगबंधु के हत्यारों को मृत्युदंड देने के न्यायिक फैसले पर अमल किया और ‘युद्ध अपराधियों’ के खिलाफ मुकदमों की शुरुआत की। बांग्लादेश में युद्ध अपराधी उन लोगों को माना जाता है, जिन्होंने 1971 के बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश के लोगों पर उस समय जो अत्याचार किए, उनमें ये लोग उनके सहायक बने।

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विपक्षी दलों के नेताओं पर युद्ध अपराध के मुकदमे

युद्ध अपराध के ज्यादातर आरोप इस्लामी संगठनों से जुड़े लोगों पर लगे हैं। ये संगठन अब मोटे तौर पर प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के साथ हैं। बीएनपी ने युद्ध अपराध के मुकदमों को राजनीतिक विरोधियों के दमन के रूप में पेश किया है। इसको लेकर बांग्लादेश में मतभेद बढ़ते चले गए हैं। इसीलिए शेख हसीना ने जब अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इन मुकदमों का जिक्र किया, तो पर्यवेक्षकों का उस पर खास ध्यान गया।

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शेख हसीना ने कहा कि अपने पास सीमित संसाधन होने के बावजूद बांग्लादेश ने म्यांमार से विस्थापित हजारों रोहिंग्या मुसलमानों को पनाह दी है। इसके अलावा उसने हमेशा फिलस्तीन के लोगों की न्यायोचित मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- ‘हमें इस बात का गर्व है कि हमने संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षण कार्यों में सबसे ज्यादा सैनिक भेजे हैं। हमने आतंकवाद और हिंसका उग्रवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई है।’ शेख हसीना ने यह दावा भी किया कि बांग्लादेश अब सामाजिक-आर्थिक विकास का एक रोल म़ॉडल बन गया है।

रविवार को शांति सम्मेलन की समाप्ति 16 सूत्रीय ढाका घोषणापत्र को जारी करने के साथ हुई। ये सम्मेलन दो दिन चला। ढाका घोषणापत्र में लोकतंत्र, सुशासन, और कानून के राज को विश्व शांति और स्थिरता के लिए निर्णायक पहलू बताया गया है। इसमें उपनिवेशवाद, और किसी भी बहाने से सत्ता के गैर-कानूनी हरण की निंदा की गई।


साथ ही ढाका घोषणापत्र में कहा गया- ‘हम आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा करते हैं। हिंसक चरमपंथ पर नियंत्रण के लिए समुदायों के साथ मिल करने का महत्त्व हम समझते हैं। हमें आपराधिक नेटवर्कों के अनगिनत शिकारों के पक्ष में अपनी साझा शक्ति को एकजुट करते हुए खड़ा होना चाहिए।’

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