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Bangladesh: अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस को बड़ी राहत, अदालत ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में बरी किया

Sun, 11 Aug 2024 11:04 PM IST
मिथिलेश नौटियाल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Sun, 11 Aug 2024 11:04 PM IST
सार

मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ लेने के बाद भ्रष्टाचार रोधी अदालत ने बड़ा फैसला लिया है। यूनुस को भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में बरी कर दिया गया है।

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Bangladesh interim govt's chief adviser Muhammad Yunus acquitted in graft case
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस (फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस को भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में बरी कर दिया गया है। यूनुस के बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ लेने के बाद भ्रष्टाचार रोधी अदालत ने यह फैसला लिया है। ढाका की विशेष अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद रबीउल आलम ने भ्रष्टाचार निरोधक आयोग के आवेदन को स्वीकार कर लिया। आयोग की तरफ से इस आवेदन को अदालत में दायर किया गया था। आवेदन में आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 494 के तहत मामले के अभियोजन को वापस लेने की मांग की गई थी।

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श्रम कानून उल्लंघन मामले में भी बरी हुए थे यूनुस 
इससे पहले सात अगस्त को ढाका की एक अदालत ने मोहम्मद यूनुस को श्रम कानून उल्लंघन मामले में बरी कर दिया था।। यूनुस के साथ साथ ग्रामीण टेलीकॉम के तीन शीर्ष अधिकारियों अशरफुल हसन, एम शाहजहां और नूरजहां बेगम को भी बरी किया गया था। आपको बता दें कि 84 वर्षीय अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली थी। इसके अलावा नूरजहां बेगम भी इस 16 सदस्यीय सलाहकार समिति की सदस्य हैं। वे बांग्लादेश के कामकाज चलाने में मोहम्मद यूनुस का सहयोग करेंगीं। यूनुस का शेख हसीना सरकार के साथ लंबे समय से विवाद चलता रहा। वर्ष 2008 में जब शेख हसीना सत्ता में आईं तो अधिकारियों ने यूनुस के खिलाफ जांच शुरू की थी।
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यूनुस को सुनाई गई थी छह महीने की सजा
वर्ष 2011 में बांग्लादेश के अधिकारियों ने ग्रामीण बैंक की गतिविधियों की जांच शुरू की। इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में यूनुस को ग्रामीण बैंक के प्रबंध निदेशक के पद से हटाया गया। जनवरी महीने में श्रम कानून के उल्लंघन के आरोप में मोहम्मद यूनुस को छह महीने जेल की सजा सुनाई गई थी। कुछ लोगों का मानना है कि यूनुस ने वर्ष 2007 में राजनीतिक पार्टी के गठन का एलान किया था और वजह से शेख हसीना नाराज हो गई थीं।
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