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Bangladesh: आरक्षण की आग में झुलसे बांग्लादेश की बड़ी कार्रवाई, जमात-ए-इस्लामी और छात्र विंग पर लगाया प्रतिबंध

Thu, 01 Aug 2024 05:39 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 01 Aug 2024 05:39 PM IST
सार

बांग्लादेश ने गुरुवार को जमात-ए-इस्लामी और इसके छात्र शाखा इस्लामी छात्र शिबिर पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई करते हुए प्रतिबंध लगा दिया है। कट्टरपंथी पार्टी द्वारा सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा होने का हवाला देते हुए प्रतिबंध लगाया गया।

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B'desh bans Jamaat-e-Islami and its student wing Islami Chhatra Shibir under anti-terrorism law
हिंसा के बाद बांग्लादेश सरकार की कार्रवाई जारी - फोटो : ANI

विस्तार

पड़ोसी देश बांग्लादेश में राष्ट्रव्यापी अशांति के बाद अब सरकार की तरफ से कार्रवाई की खबरें सुर्खियों में है। बता दें कि सरकार ने कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र विंग पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई करते हुए प्रतिबंध लगाया है।
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सार्वजनिक सुरक्षा प्रभाग ने जारी किया आदेश
बांग्लादेश गृह मंत्रालय के सार्वजनिक सुरक्षा प्रभाग की तरफ से गुरुवार को जारी एक अधिसूचना में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख सहयोगी इस्लामी पार्टी पर प्रतिबंध की पुष्टि की गई। जमात, छात्र शिबिर और अन्य संबद्ध समूहों पर प्रतिबंध आतंकवाद विरोधी अधिनियम की धारा 18(1) के तहत एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से लगाया गया। 
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छात्रों को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया- हसीना
वहीं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने गुरुवार को कहा, उन्होंने छात्रों को अपनी ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। बता दें कि बांग्लादेश सरकार ने मंगलवार को सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर देश भर में छात्रों के घातक विरोध प्रदर्शन के बाद जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। सरकार ने आरोप लगाया कि जमात इस आंदोलन का फायदा उठा रही है, जिसमें कम से कम 150 लोग मारे गए।
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गठबंधन की बैठक के बाद लिया गया फैसला
दरअसल सत्तारूढ़ अवामी लीग के नेतृत्व वाले 14-पार्टी गठबंधन की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है, जिसमें इस हफ्ते की शुरुआत में एक प्रस्ताव पारित किया गया था कि जमात को राजनीति से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। जमात पर प्रतिबंध लगाने का हालिया फैसला 1972 में राजनीतिक उद्देश्यों के लिए धर्म का दुरुपयोग करने के लिए इसके प्रारंभिक प्रतिबंध के 50 साल बाद आया है। सत्तारूढ़ अवामी लीग के शीर्ष नेता ने मुक्ति संग्राम में इसकी भूमिका के कारण जमात पर प्रतिबंध का समर्थन किया है। बता दें कि अदालती फैसलों के कारण अपना पंजीकरण खोने और चुनाव से प्रतिबंधित होने के बावजूद भी जमात देश में सक्रिय रही।

हालिया हिंसा के कारण प्रतिबंध लगाया जा रहा- कानून मंत्री
सार्वजनिक सुरक्षा प्रभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी कथित तौर पर आरक्षण सुधार आंदोलन के विरोध के आसपास हाल ही में हुई हिंसा में शामिल थी, जिसे सरकार ने प्रतिबंध का कारण बताया है। वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कानून मंत्री अनीसुल हक ने मंगलवार को कहा कि कोटा सुधार आंदोलन से जुड़ी हालिया हिंसा के कारण प्रतिबंध लगाया जा रहा है और इसे एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से लागू किया जाएगा।


बांग्लादेश में जुलाई महीने में भड़की थी हिंसा
जुलाई के लगभग पूरे महीने बांग्लादेश में हिंसा की स्थिति बनी रही, जब महीने की शुरुआत में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन जल्द ही प्रधानमंत्री हसीना और उनकी सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गए। सरकार ने नौकरी कोटा के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सेना को बुलाया, क्योंकि इस हिंसा में कम से कम 150 लोग मारे गए और पुलिसकर्मियों समेत कई हजार लोग घायल हो गए और प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा था।
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