{"_id":"5fa909198ebc3e74f56208f0","slug":"aspirin-medicine-less-the-danger-of-covid-19-death-says-research-patients-who-take-aspirin-may-live","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना से मौत के जोखिम को 44 फीसदी तक कम करती है एस्पिरिन, शोधकर्ताओं का दावा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
कोरोना से मौत के जोखिम को 44 फीसदी तक कम करती है एस्पिरिन, शोधकर्ताओं का दावा
Mon, 09 Nov 2020 02:47 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Mon, 09 Nov 2020 02:47 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना पर जल्द से जल्द से काबू पाने और उसकी रोकथाम को लेकर निर्णायक फैसले लेने के लिए दुनिया के कई क्षेत्रों में लगातार शोध हो रहे हैं। हर शोध में कोरोना वायरस को लेकर अलग-अलग खुलासे होते हैं। ऐसा ही एक खुलासा यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने किया है।
विज्ञापन
शोधकर्ताओं की ओर से की गई रिसर्च में बताया गया है कि दिल की बीमारी से बचने के लिए एस्पिरिन लेने वाले कोरोना मरीजों में मौत का जोखिम बहुत कम होता है। अध्ययन में कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती ऐसे कोरोना मरीज जो दिल की बीमारी से बचाव के लिए एस्पिरिन दवा खा रहे थे, उन्हें आईसीयू में रखने की जरूरत काफी कम पड़ी।
विज्ञापन
यह शोध एनेस्थीसिया और एनाल्जेसिया जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में जानकारी दी गई है कि एस्पिरिन किफायती और आसानी से मिलने वाली दवा है, जो कोरोना की गंभीर दिक्कतों को रोकने में मदद कर सकता है। यूएमएसओएम में एनेस्थिसियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर जोनाथन चाउ ने इस अध्ययन को महत्वपूर्ण खोज बताया है।
विज्ञापन
शोध के लिए डॉक्टर चाउ और उनके सहयोगियों ने औसतन 55 साल की आयु के 412 कोरोना रोगियों के मेडिकल रिकॉर्ड का अध्ययन किया है। इन्हें पिछले कुछ महीनों के दौरान अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इन मरीजों में से लगभग एक चौथाई मरीज दिल की बीमारी से बचने के लिए एस्पिरिन ले रहे थे।
डॉक्टर चाउ ने बताया कि एस्पिरिन के इस्तेमाल से मैकेनिकल वेंटीलेटर पर रखे जाने के जोखिम को 44 फीसदी तक कम किया जा सकता है।