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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में गिंसबर्ग की जगह बैरेट का होगा चयन
Sun, 27 Sep 2020 12:55 AM IST
Jeet Kumar
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस वाशिंगटन।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस वाशिंगटन।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 27 Sep 2020 12:55 AM IST
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : PTI
राष्ट्रपति ट्रंप ने जस्टिस रूथ बदर गिंसबर्ग के निधन के बाद उनकी जगह रूढ़िवादियों की पसंदीदा जज एमी कोनी बैरेट का चयन किया है। यह भी कोशिश की जाएगी कि चुनाव से ठीक पहले सीनेट उनके नाम की पुष्टि कर दे ताकि सुप्रीम कोर्ट में वैचारिक रूप से रिपब्लिकन के पक्षधर जजों का बोलबाला हो जाए। डेमोक्रेटिक अभियान ने ट्रंप की इस कोशिश का पुरजोर विरोध किया है।
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ट्रंप सुप्रीम कोर्ट के लिए नए नामित सदस्य के नाम की घोषणा व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में करेंगे। फिलहाल ट्रंप की पसंद एमी कोनी बैरेट (48) सातवीं सर्किट कोर्ट ऑफ अपील में जज हैं। इनके नाम का प्रस्ताव ट्रंप ने 2017 में भी दिया था जिनके नाम पर अमेरिकी सीनेट में 55-43 वोट भी मिल चुके हैं।
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माना जा रहा है कि बैरेट अमेरिका में ईसाइयों की भी पसंद हैं और उन्हें रिपब्लिकन सीनेटरों का मजबूत समर्थन हासिल है। हालांकि ट्रंप आखिरी वक्त में अपनी योजना बदल भी सकते हैं लेकिन इसकी संभावना कम है। एमी के सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त होने से देश में चल रहे गर्भपात कानून में बदलाव की मांग वाले आंदोलन पर असर पड़ सकता है।
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बता दें कि अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति लाइफटाइम होती है और उनकी सेवानिवृत्ति नहीं होती। इसलिए डेमोक्रेट चाहते हैं कि नई नियुक्ति चुनाव के बाद हो।
ट्रंप इसलिए चाहते हैं अपने पक्ष का जस्टिस
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 9 जज होते हैं। किसी अहम फैसले के वक्त यदि इनकी राय 4-4 में विभाजित हो जाती है तो सरकार द्वारा नियुक्त जज का वोट निर्णायक होता है और माना जाता है कि जज जिस राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है वह उसी के पक्ष में ही फैसला देगा। ऐसे में ट्रंप अगला राष्ट्रपति चुनाव जीतें या हारें, दोनों ही स्थितियों में सुप्रीम कोर्ट का राय उन्हें हर संकट से बचा सकती है।
नए नामांकन से दक्षिण एशियाई नाराज
डेमोक्रेटिक प्रत्याशी के समर्थक संगठन ‘साउथ एशियन फॉर बिडेन’ ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप की पसंद के उम्मीदवार को नामित करने के फैसले की कड़ी निंदा की है।
संगठन की निदेशक नेहा दीवान ने कहा, देशभर में अमेरिकी नागरिक मतपत्र डाल रहे हैं, इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज का नामांकन करना लोकतंत्र के मूल्यों के साथ असंगत है। उन्होंने कहा, इस फैसले से दक्षिण एशियाई लोग नाराज हैं।