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समानता, सामाजिक न्याय के लिए अथक प्रयासों ने आंबेडकर को महान बनाया: संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 14 Apr 2018 07:56 PM IST
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B. R. Ambedkar
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संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि वंचित व पिछड़े वर्ग को राजनीतिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भीमराव आंबेडकर की तरफ से किए गए ‘अथक प्रयासों’ ने दुनिया में उन्हें एक महान ‘प्रवर्तक’ बनाया। संयुक्त राष्ट्र के 2030 विकास एजेंडे में समानता और सामाजिक न्याय की उनकी दृष्टि की छाप झलकती है।
आंबेडकर के 127वें जयंती के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की तरफ से संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अपने संबोधन में डेवलपमेंट प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेटर अकीम स्टेनर ने कहा कि सतत विकास आंबेडकर की ‘समतावादी दृष्टि’ का मूल मर्म था।
उन्होंने कहा, ‘आंबेडकर समझते थे कि समाज में बढ़ती असमानता राष्ट्र और लोगों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण के लिए बुनियादी चुनौतियां पैदा करती है।
स्टेनर ने कहा, ‘वंचित व दलित समुदायों को राजनीतिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाने, ताकि श्रमिकों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार हो और समाज के हर एक व्यक्ति को शिक्षा मिले। इस दिशा में उनकी तरफ से किए गए अथक प्रयासों ने उन्हें भारत और अन्य देशों में एक प्रवर्तक के रूप में पहचान दी।’
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आंबेडकर के 127वें जयंती के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की तरफ से संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अपने संबोधन में डेवलपमेंट प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेटर अकीम स्टेनर ने कहा कि सतत विकास आंबेडकर की ‘समतावादी दृष्टि’ का मूल मर्म था।
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उन्होंने कहा, ‘आंबेडकर समझते थे कि समाज में बढ़ती असमानता राष्ट्र और लोगों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण के लिए बुनियादी चुनौतियां पैदा करती है।
स्टेनर ने कहा, ‘वंचित व दलित समुदायों को राजनीतिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाने, ताकि श्रमिकों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार हो और समाज के हर एक व्यक्ति को शिक्षा मिले। इस दिशा में उनकी तरफ से किए गए अथक प्रयासों ने उन्हें भारत और अन्य देशों में एक प्रवर्तक के रूप में पहचान दी।’
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