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अमेरिका: पेगासस निर्माता एनएसओ ने खर्च किए करोड़ों डॉलर, ओबामा, ट्रंप, बाइडन के अफसरों बनाया पैसा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 20 Jul 2021 05:38 PM IST

सार

इस्राइली कंपनी एनएसओ ने अमेरिका में अपने जासूसी सॉफ्टवेयर का बड़ा बाजार तैयार करने के लिए करोड़ों डॉलर झोंके थे। उसने अमेरिकी सरकार के अधिकारियों व लॉबिस्टों की सेवाएं लीं और बदले में उनकी जेबें भरीं। इसके बावजूद उसे कामयाबी नहीं मिली।
 
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whatsapp pegasus attack - फोटो : youtube
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विस्तार

जासूसी सॉफ्टवेयर बनाने वाली इस्राइली कंपनी एनएसओ ग्रुप और उसकी सहयोगी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए। उन्होंने इसके लिए सरकारी अधिकारियों के सामने भव्य प्रजेंटेशन दिए और महंगे लॉबिस्टों की सेवा ली थी।  
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इसका ब्योरा अखबार 'द वाशिंगटन पोस्ट' में छपा है। पोस्ट के मुताबिक ऐसा लगता है कि एनएसओ कंपनी की कोशिश अमेरिका में सफल नहीं हो सकी। लेकिन इस क्रम में वाशिंगटन स्थित कंसल्टेंट्स, वकीलों, लॉबिस्ट्स और दूसरे प्रमुख व्यक्तियों ने खूब पैसा बनाया। इन लोगों में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन प्रशासनों में ताकतवर पदों पर रहे हैं। ये बात खुद एनएसओ कंपनी के दस्तावेजों से सामने आई है।


जासूसी उपकरणों के पक्ष में बनाया माहौल
अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों को एनएसओ या उससे संबंधित कंपनियों ने भुगतान किया, उनमें गृह और न्याय मंत्रालयों के पूर्व प्रमुख भी शामिल हैं। उनके अलावा वाशिंगटन स्थित मशहूर विधि और जन संपर्क कंपनियां भी फायदा उठाने वालों में शामिल हैं। जिन लोगों ने कंपनी से पैसा लिया, उन्होंने सरकार के सामने एनएसओ के जासूसी उपकरण को आतंकवादियों और मानव तस्करों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण हथियार बना कर उसके पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।

एनएसओ पर वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार अदनान खशोगी के हत्यारों की मदद करने का आरोप रहा है। लेकिन ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि लॉबिस्ट्स और पब्लिक रिलेशंस कंपनियों ने एनएसओ की छवि सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई। अखबार ने अपनी रिपोर्ट में समाचार एजेंसी रॉयटर की तरफ से पिछले साल आई एक खबर का भी जिक्र किया है, जिसमें बताया गया था कि एनएसओ ने अमेरिकी नागरिकों की जासूसी में भूमिका निभाई। बताया गया था कि एफबीआई के एजेंट इस मामले की जांच कर रहे हैं हालांकि एफबीआई ने इस मामले में संपर्क करने पर वॉशिंगटन पोस्ट से कुछ भी कहने से इनकार किया। 

जीवन रक्षा मिशन में ली मदद
उधर एनएसओ कंपनी ने वाशिंगटन पोस्ट से कहा कि उसने अपने 'जीवन रक्षा मिशन' के क्रम में अमेरिकी वकीलों की मदद ली थी, लेकिन उसने अपने ग्राहकों और अमेरिका में उसके संपर्क में आए लोगों के बारे में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया।

लॉ फर्म ने 75 हजार डॉलर लेकर किया अनुबंध
वाशिंगटन पोस्ट का कहना है कि एनएसओ अभी भी अमेरिका में अपने सॉफ्टवेयर बेचने के अवसर की तलाश में है। अमेरिकी न्याय मंत्रालय के दस्तावेजों से मालूम हुआ है कि लॉ फर्म पिल्सबरी विनथ्रॉप शॉ पिटमैन ने एनएसओ से छह महीने का एक अनुबंध किया, जिसके लिए उसे 75 हजार डॉलर का भुगतान किया गया। बताया जाता है कि एनएसओ ने ये रकम 'संभावित बिजनेस पार्टनरों' के बारे में सलाह देने के लिए चुकाई है।

2014 में एनएसओ ने की थी उपकरण बेचने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक एनएसओ ने 2014 में अपने जासूसी उपकरण अमेरिका में बेचने की पहल की थी। तब उसने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और पुलिस के अधिकारियों से संपर्क किया था। इसके लिए उसने वेस्टब्रिज टेक्नोलॉजीज नाम की अलग से कंपनी बनाई थी। उस दौरान कई अमेरिकी राज्यों के अधिकारियों से उसने संपर्क किया। ये बात डेलावेयर, मैरीलैंड और वर्जिनिया राज्यों के सरकारी दस्तावेजों से सामने आई है। लेकिन वाशिंगटन पोस्ट का कहना है कि एनएसओ को अमेरिका के अंदर कोई ठेका नहीं मिला, हालांकि इसके लिए उसने कोशिश जारी रखी हुई है। 

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