Nepal: अखंड भारत’ भित्ति चित्र बना नेपाल में मुद्दा, भारत-विरोधी ताकतों के दबाव में आए पीएम दहल
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ऐसा लगता है कि नेपाल सरकार देश में भारत विरोधी ताकतों की तेज हुई मुहिम के दबाव में आ गई है। उसने अब ‘अखंड भारत’ भित्ति चित्र का मुद्दा आधिकारिक रूप से भारत के सामने उठाने का फैसला किया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत स्थित नेपाली दूतावास से कहा है कि वह इस बारे में भारत के विदेश मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगे।
‘अखंड भारत’ नामक भित्ति चित्र का प्रदर्शन भारतीय संसद के नए भवन में किया गया है। नेपाल की शिकायत है कि उसमें उसके यहां स्थित लुम्बिनी और कपिलवस्तु को भारत में दिखाया गया है। पिछले महीने नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद से नेपाल में भारत विरोधी ताकतों ने इस मुद्दे को गरमाए रखा है। इसके जवाब में काठमांडू के मेयर ने अपने दफ्तर में एक ऐसा नक्शा लगाया, जिसमें कई भारतीय इलाकों को नेपाल का हिस्सा बताया गया है। मेयर ने हाल में फिल्म आदिपुरुष में बोले गए एक डॉयलॉग को मुद्दा बना कर काठमांडू मेट्रोपोलिटन इलाके में तमाम भारतीय फिल्मों को दिखाने पर रोक भी लगा दी है।
अखंड भारत भित्ति चित्र के मामले को सरकारी स्तर पर उठाने के फैसले के बारे में खबर यहां के अखबार काठमांडू पोस्ट ने छापी है। नई दिल्ली में नियुक्त एक नेपाली राजनयिक ने इस अखबार से कहा- ‘भारतीय संसद में लगे भित्ति चित्र के बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश नेपाल सरकार ने हमें सोमवार को भेजा।’
संसद भवन में लगाया गया भित्ति चित्र मौर्य सम्राट अशोक (304-232 ईस्वी पूर्व) के युग का है। इसमें उस समय के भारत के नक्शे का चित्रण है। पिछले 28 मई को संसद से नए भवन के उद्घाटन के समय इस भित्ति चित्र पर सबका ध्यान गया। नेपाली मीडिया में इस बात की चर्चा की गई है कि इस भित्ति चित्र को लेकर नेपाल के साथ-साथ बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी विवाद खड़ा हुआ है। उन दोनों देशों में स्थित कई स्थल भी इस भित्ति चित्र में नजर आते हैं।
नेपाल में इस मामले को सबसे ज्यादा हवा पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनकी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने दी है। पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई भी इस विवाद को भड़काने में जुटे रहे हैं। समझा जाता है कि विपक्ष और कुछ सिविल सोसायटी संगठनों की तरफ से बनाए गए भारत विरोधी माहौल के कारण अब प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की सरकार दबाव में आ गई है। ओली, भट्टराई और अन्य नेता लगातार यह मांग कर रहे थे कि नेपाल सरकार इस मसले को भारत सरकार के सामने उठाए।
प्रधानमंत्री दहल ने इस महीने के आरंभ में भारत की यात्रा की थी। लेकिन उस समय उन्होंने यह मामला नहीं उठाया था। उस समय यह खबर जरूर आई थी कि उन्होंने नेपाली दूतावास को इस बारे मे सूचना इकट्ठा करने का आदेश दिया है। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक दूतावास ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस भित्ति चित्र का वर्तमान से कोई संबंध नहीं है। यह सिर्फ सम्राट अशोक के युग के सांस्कृतिक पहलुओं को दिखाता है। इसके बावजूद अब नेपाल सरकार ने इसे एक कूटनीतिक विवाद बनाने का फैसला किया है।