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यूक्रेन युद्ध के छह महीनेः आखिर क्या है पुतिन की लोकप्रियता जारी रहने का राज? 80 फीसदी आबादी अभी समर्थन में

Thu, 25 Aug 2022 03:06 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 25 Aug 2022 03:06 PM IST
सार

युद्ध के छह महीना पूरा होने के मौके पर स्वतंत्र सर्वे एजेंसी लेवाडा सेंटर ने एक सर्वे रिपोर्ट जारी की। उसके मुताबिक रूस की 80 फीसदी आबादी पुतिन के समर्थन में है। बीते जून में डब्लूसीआईओएम नाम की एक एजेंसी के सर्वे में पुतिन की एप्रूवल रेटिंग (उनके काम संतुष्ट लोगों की संख्या) 72 प्रतिशत बताई गई थी।

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After all, what is the secret to the continuation of Putin popularity, 80 percent of the population is still i
a - फोटो : twitter @@KremlinRussia_E

विस्तार

यूक्रेन में जारी रूस की विशेष  सैन्य कार्रवाई के छह महीने बुधवार को पूरे हो गए। इस अवधि में दुनिया का ध्यान इसी संकट पर टिका रहा है। युद्ध के कारण यूक्रेन के हजारों सैनिक और सैकड़ों आम लोग मारे गए हैं। वहां लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। मारियूपोल नाम के शहर का लगभग वजूद ही मिट गया है। पश्चिमी अनुमानों के मुताबिक इस दौरान रूस के 70,000 से 80,000 सैनिक मारे गए हैं। रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दुनिया के कई हिस्से महंगाई और ईंधन संकट में फंसते चले गए हैं। लेकिन इन सबका रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की सत्ता पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।

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रूस की 80 फीसदी आबादी अभी भी पुतिन के समर्थन में 
युद्ध के छह महीना पूरा होने के मौके पर स्वतंत्र सर्वे एजेंसी लेवाडा सेंटर ने एक सर्वे रिपोर्ट जारी की। उसके मुताबिक रूस की 80 फीसदी आबादी पुतिन के समर्थन में है। बीते जून में डब्लूसीआईओएम नाम की एक एजेंसी के सर्वे में पुतिन की एप्रूवल रेटिंग (उनके काम संतुष्ट लोगों की संख्या) 72 प्रतिशत बताई गई थी। इसका मतलब है कि बीते दो महीनों रूस में पुतिन के लिए जन समर्थन बढ़ा है। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन के मुताबिक रूस में सूचना के मुक्त प्रवाह पर रोक है। लेकिन यह कहना गलत होगा कि रूस के लोगों को युद्ध में हुए नुकसान की पर्याप्त सूचना नहीं मिली है। स्वतंत्र वेबसाइट मेडियाजोना ने युद्ध के दौरान सैनिकों की हुई मौत और दूसरे नुकसान की खबरें रूसी जनता की दी है। युद्ध की शुरुआत के तुरंत बाद रूस में कई जगहों पर युद्ध विरोधी प्रदर्शन हुए थे। तब खबर आई थी कि इऩ प्रदर्शनों के दौरान 16 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। फेक न्यूज देने के आरोप में 75 आपराधिक मामले भी तब दर्ज किए गए थे। लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति पर रूस सरकार ने काबू पा लिया। 
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पुतिन की लोकप्रियता जारी रहने के पीछे कारण
पुतिन की लोकप्रियता जारी रहने का एक बड़ा कारण यह माना गया है कि पश्चिमी देशों ने अपने सख्त प्रतिबंधों से रूसी अर्थव्यवस्था को जिस तरह पंगु बना देने का लक्ष्य रखा था, वह पूरा नहीं हुआ। असल में रूस प्रतिबंधों को बखूबी झेल गया है। उलटे इन प्रतिबंधों के कारण यूरोप और अमेरिका में महंगाई से परेशानी बढ़ी है। यूरोप को ईंधन के अभाव का भी सामना करना पड़ रहा है।  सीएनएन के विश्लेषक क्लेयर सिबैस्टियन ने अपनी एक टिप्पणी में लिखा है कि पुतिन और उनके अधिकारी वर्षों से ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार करने में जुटे हुए थे, जिस पर प्रतिबंधों का ज्यादा असर ना हो। उन्होंने देश के अंदर ही आयातित वस्तुओं के विकल्प उत्पादित करने का ढांचा तैयार कर लिया। वित्तीय अलगाव की स्थिति में भुगतान जारी रखने के लिए उन्होंने अपना पेमेंट सिस्टम भी बना रखा था। जानकारों के मुताबिक इस दौरान चीन और भारत जैसे देशों ने रूसी आयात बढ़ा कर भी पुतिन को मुश्किल से उबारा है।  अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और दूसरे पश्चिमी नेताओँ को उम्मीद थी कि प्रतिबंधों के कारण रूसी उपभोक्ता मुश्किल में फंस जाएंगे। इससे नाराज होकर वे पुतिन सरकार के खिलाफ बगावत कर देंगे। लेकिन छह महीने बाद ऐसा लगता है कि उनका ये आकलन मोटे तौर पर गलत साबित हुआ है।

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