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Pakistan-Afghanistan War: अफगान हमले में लश्कर व ISKP का साझा ठिकाना तबाह, पाकिस्तान के सुरघर में ड्रोन हमला
Sat, 28 Feb 2026 10:24 PM IST
Nirmal Kant
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली।
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sat, 28 Feb 2026 10:24 PM IST
सार
Pakistan-Afghanistan War: पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़े तनाव के बीच अफगान सेना ने डूरंड लाइन पर जवाबी कार्रवाई करते हुए खैबर जिले में आतंकी ठिकाने को निशाना बनाया। ड्रोन और मोर्टार से किए गए इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा और आईएसकेपी का संयुक्त अड्डा तबाह हुआ है, जिससे पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। पढ़ें रिपोर्ट-
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पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी मौजूदा संघर्ष में अफगान सेना ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तानी सेना के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के खैबर जिले के सुरघर इलाके में अफगानिस्तान को एक बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यहां लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) का एक संयुक्त ठिकाना तबाह कर दिया गया।
इस ऑपरेशन की खास बात इसमें इस्तेमाल की गई तकनीक रही। यह हमला एक अत्याधुनिक कॉटसैक प्लेटफॉर्म से लैस ड्रोन के जरिए किया गया, जिसमें मोर्टार लगा हुआ था। इस हमले ने आतंकियों के केंद्र को मलबे में तब्दील कर दिया, जहां से अफगानिस्तान पर हमले की योजना बनाई जा रही थी।
अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह ऑपरेशन भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 9 बजे से देर रात 1 बजे तक चला। इस दौरान डूरंड लाइन के कई मोर्चों पर एक साथ हमला बोला गया। पक्तिया-कुर्रम, कुनार-बाजौर, नांगरहार-तोरखम और खोस्त-मीरानशाह और पक्तिका-दक्षिण वजीरिस्तान से सटे इलाकों में कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
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अफगानिस्तान के मुताबिक, इस हमले का मुख्य लक्ष्य डूरंड लाइन के साथ पाकिस्तान की सैन्य अवसंरचना को निशाना बनाना था। जवाब में पाकिस्तान ने भी तोपखाने से गोलाबारी की, जिससे पूरे इलाके में तनाव चरम पर है। अफगानिस्तान ने साफ किया है कि यह कार्रवाई उसकी संप्रभुता के उल्लंघन का जवाब है।
ये भी पढ़ें: क्या जंग बदल देगी समीकरण?: पाकिस्तानी वफादारी ट्रंप से, हिमायत ईरान की, जानिए अमेरिका के साथ कौन और तटस्थ कौन
तालिबान बनाम आईएसकेपी
आईएसकेपी और तालिबान के बीच कट्टर दुश्मनी है। तालिबान का लक्ष्य केवल अफगानिस्तान के भीतर इस्लामी शासन की स्थापना रहा है। वहीं आईएसकेपी एक वैश्विक खिलाफत का सपना देखता है।
आईएसकेपी तालिबान की सत्ता को चुनौती देने के लिए आईएसआई की शह पर नागरिकों और मस्जिदों पर आत्मघाती हमले करता है। पाकिस्तान आईएसकेपी का उपयोग बलूच अलगाववादियों को कमजोर करने के लिए भी कर रहा है। हाल के महीनों में आईएसकेपी ने काबुल में विदेशी नागरिकों के खिलाफ हमले किए हैं, जिनका उद्देश्य तालिबान के अंतरराष्ट्रीय संबंध खराब करना और विदेशी निवेश रोकना है। काबुल में सत्ता संभालने के बाद तालिबान के खुफिया विभाग ने आईएसकेपी के ठिकानों पर कड़ाई से कार्रवाई की है।
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इस ऑपरेशन की खास बात इसमें इस्तेमाल की गई तकनीक रही। यह हमला एक अत्याधुनिक कॉटसैक प्लेटफॉर्म से लैस ड्रोन के जरिए किया गया, जिसमें मोर्टार लगा हुआ था। इस हमले ने आतंकियों के केंद्र को मलबे में तब्दील कर दिया, जहां से अफगानिस्तान पर हमले की योजना बनाई जा रही थी।
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अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह ऑपरेशन भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 9 बजे से देर रात 1 बजे तक चला। इस दौरान डूरंड लाइन के कई मोर्चों पर एक साथ हमला बोला गया। पक्तिया-कुर्रम, कुनार-बाजौर, नांगरहार-तोरखम और खोस्त-मीरानशाह और पक्तिका-दक्षिण वजीरिस्तान से सटे इलाकों में कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
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अफगानिस्तान के मुताबिक, इस हमले का मुख्य लक्ष्य डूरंड लाइन के साथ पाकिस्तान की सैन्य अवसंरचना को निशाना बनाना था। जवाब में पाकिस्तान ने भी तोपखाने से गोलाबारी की, जिससे पूरे इलाके में तनाव चरम पर है। अफगानिस्तान ने साफ किया है कि यह कार्रवाई उसकी संप्रभुता के उल्लंघन का जवाब है।
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तालिबान बनाम आईएसकेपी
आईएसकेपी और तालिबान के बीच कट्टर दुश्मनी है। तालिबान का लक्ष्य केवल अफगानिस्तान के भीतर इस्लामी शासन की स्थापना रहा है। वहीं आईएसकेपी एक वैश्विक खिलाफत का सपना देखता है।
आईएसकेपी तालिबान की सत्ता को चुनौती देने के लिए आईएसआई की शह पर नागरिकों और मस्जिदों पर आत्मघाती हमले करता है। पाकिस्तान आईएसकेपी का उपयोग बलूच अलगाववादियों को कमजोर करने के लिए भी कर रहा है। हाल के महीनों में आईएसकेपी ने काबुल में विदेशी नागरिकों के खिलाफ हमले किए हैं, जिनका उद्देश्य तालिबान के अंतरराष्ट्रीय संबंध खराब करना और विदेशी निवेश रोकना है। काबुल में सत्ता संभालने के बाद तालिबान के खुफिया विभाग ने आईएसकेपी के ठिकानों पर कड़ाई से कार्रवाई की है।