{"_id":"619ecc079260087cdb5dcbd0","slug":"afghanistan-100-days-of-taliban-rule-complete-but-not-recognized-even-efforts-to-build-relations-with-neighboring-countries-are-not-successful","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफगानिस्तान : तालिबान के 100 दिन पूरे, पर मान्यता नहीं, पड़ोसी देशों से रिश्ते बनाने की कोशिशें भी कामयाब नहीं","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अफगानिस्तान : तालिबान के 100 दिन पूरे, पर मान्यता नहीं, पड़ोसी देशों से रिश्ते बनाने की कोशिशें भी कामयाब नहीं
Thu, 25 Nov 2021 05:04 AM IST
योगेश साहू
एजेंसी, काबुल (अफगानिस्तान)।
एजेंसी, काबुल (अफगानिस्तान)।
Published by: योगेश साहू
Updated Thu, 25 Nov 2021 05:04 AM IST
सार
अफगान सरकार की उम्मीदों के विपरीत इन बैठकों में इस्लामी सरकार को मान्यता देने के मुद्दे पर विचार नहीं किया गया। इसके बजाय इन बैठकों का मुद्दा समावेशी सरकार, मानवाधिकार, विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता, शिक्षा के अधिकार, अफगान महिलाओं को रोजगार और लड़कियों को शिक्षा का अधिकार दिलाना रहा।
विज्ञापन
Afghanistan Foreign Minister Amir Khan Muttaqi
- फोटो : Twitter@zainab_moh14
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के 100 दिन पूरे हो गए हैं। इस दौरान उसने यह सबक भी सीख लिया है कि किसी शासन को हटाकर देश पर कब्जा करना आसान है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाना नहीं।
विज्ञापन
अफगानिस्तान की नई सरकार का मुखिया मावलाई हबीबुल्ला अखंदजादा है। टोलो न्यूज के मुताबिक, इस दौरान आमिर खान मुत्तकी के नेतृत्व में अफगान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता पाने के कूटनीतिक प्रयास कई बार किए, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इस्लामी मुल्क के अधिकारी क्षेत्र के कई देशों में गए।
विज्ञापन
जवाब में करीब छह देशों के प्रतिनिधियों ने अफगानिस्तान की यात्रा कर उसके अधिकारियों से वार्ता की। इधर, ईरान, पाकिस्तान, भारत, रूस और चीन ने अफगानिस्तान के भविष्य पर बैठकों का आयोजन किया। जी-20 के नेताओं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अलग सत्र में अफगानिस्तान मुद्दे पर विचार किया।
विज्ञापन
अफगान सरकार की उम्मीदों के विपरीत इन बैठकों में इस्लामी सरकार को मान्यता देने के मुद्दे पर विचार नहीं किया गया। इसके बजाय इन बैठकों का मुद्दा समावेशी सरकार, मानवाधिकार, विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता, शिक्षा के अधिकार, अफगान महिलाओं को रोजगार और लड़कियों को शिक्षा का अधिकार दिलाना रहा।
साथ ही कहा गया कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंक के लिए न हो। इस दौरान इस्लामी सरकार की विदेश नीति और कूटनीतिक रिश्ते केवल कुछ पड़ोसी और क्षेत्रीय मुल्कों तक सीमित रहे। विदेश मंत्रालय के पूर्व सलाहकार फखरुद्दीन क्वारीजादा ने कहा कि दुनिया को इंतजार है कि तालिबान अपने पुराने वायदों पर खरा उतरता है या नहीं।
11 देशों ने खोले दूतावास
फिलहाल सूचना आई है कि 11 देशों ईरान, पाकिस्तान, चीन, रूस, तुर्की, कतर, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाखिस्तान, किर्गिस्तान, इटली और संयुक्त अरब अमीरात ने अफगानिस्तान में अपने दूतावास खोले हैं।
अफगान संकट के समावेशी हल की जरूरत : शृंगला
भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि अफगान संकट का बातचीत के जरिए समावेशी राजनीतिक हल निकालने की जरूरत है। साथ ही कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी दूसरे देश को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने कहा, भारत अफगान मुद्दे पर चिंतित सभी देशों के संपर्क में है। हालांकि, यह भी देखना होगा कि इस मुश्किल परिस्थिति में किस तरह बेहतर ढंग से आगे बढ़ा जा सकता है। उद्योग परिसंघ के सत्र में शृंगला बोले, भारत अपने क्षेत्र में नई सामरिक हकीकत को लेकर कमजोर स्थिति में नहीं हैं।