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Pakistan: TTP चरमपंथियों से निपटने में पाकिस्तान की मदद करेगा अफगान तालिबान, मुल्ला बरादर ने दिया भरोसा

Thu, 23 Feb 2023 03:57 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 23 Feb 2023 03:57 PM IST
सार

पाकिस्तान के एक अखबार ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने तालिबान के अधिकारियों से साफ कहा है कि अफगानिस्तान स्थित टीटीपी आतंकियों पर लगाम लगाई जानी चाहिए। पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि तालिबानी नेता इस मुद्दे पर सहयोग करने के लिए सहमत हुए हैं।

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Afghan Taliban promises to help Pakistan address growing threat posed by TTP militants
काबुल में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रतिबंधित आतंकी संगठन टीटीपी के हालिया ताबड़तोड़ हमलों और अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच मुख्य सीमा पर लगातार फायरिंग से पाकिस्तान डरा हुआ है। इस बीच, अफगान तालिबान नेताओं ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों से निपटने के लिए पाकिस्तान की मदद करने का वादा किया है। दोनों देशों के बीच यह सहमति रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की एक दिवसीय यात्रा के दौरान बनी है। 

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दरअसल, नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। इनमें, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बीच हमले प्रमुख हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच इस मुद्दे को लेकर संबंध भी बिगड़ रहे थे। सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के नेतृत्व में बुधवार को एक उच्च स्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल काबुल पहुंचा था। 
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बैठक में ये तालिबानी नेता रहे मौजूद
इस प्रतिनिधिमंडल ने तालिबानी शासन के कार्यवाहक उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर, रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद, आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी और विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी से मुलाकात की और आतंकरोधी उपायों समेत सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। 
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आतंक से निपटने के लिए आपसी सहयोग पर बनी सहमति
मुलाकात के दौरान टीटीपी और आईएस के बढ़ते खतरे पर चर्चा की गई। साथ ही दोनों पक्ष आतंकवाद के खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सहयोग करने पर भी सहमत हुए हैं। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भी इसके बारे में जानकारी दी है। पाकिस्तान के एक अखबार ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने तालिबान के अधिकारियों से साफ कहा है कि अफगानिस्तान स्थित टीटीपी आतंकियों पर लगाम लगाई जानी चाहिए। पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि तालिबानी नेता इस मुद्दे पर सहयोग करने के लिए सहमत हुए हैं। शायद उन्हें स्थिति की गंभीरता का एहसास हो गया है। पाकिस्तान के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा ऐसे समय में हो हुआ है, जब उनके पड़ोसी देश के साथ संबंध लगातार बिगड़ रहे हैं। 

पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं ये नेता और अधिकारी
प्रतिनिधिमंडल में आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम, विदेश सचिव असद माजिद, अफगानिस्तान पर विशेष दूत मुहम्मद सादिक और अफगानिस्तान में पाकिस्तान के प्रभारी ओबैद निजामनी शामिल थे।

अफगान मंत्रिपरिषद ने बयान में क्या कहा?
अफगान मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री) की ओर से एक बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। इसमें कहा गया है कि अफगान उप प्रधानमंत्री ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से पाकिस्तान की जेलों में बंद तालिबान के कैदियों को रिहा करने को कहा। उन्होंने तोरखम और चमन के दो प्रमुख बॉर्डर क्रॉसिंग पॉइंट पर ज्यादा सुविधाओं को लेकर भी बात की।  

राजनीतिक और सुरक्षा मामलों से न प्रभावित हो व्यापार: अब्दुल गनी बरादर
बयान में बरादर के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान पड़ोसी हैं और उनके बीच सौहार्दपूर्ण संबंध होने चाहिए। अफगानिस्तान का इस्लामिक अमीरात, पाकिस्तान के साथ वाणिज्यिक और आर्थिक संबंधों का विस्तार चाहता है, क्योंकि इस तरह के संबंध दोनों देशों के हित में हैं। बयान में कहा गया कि राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक मामलों को प्रभावित नहीं करना चाहिए। उसे राजनीति व सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों से अलग रखा जाना चाहिए। 


कराची मुख्यालय पर हमले के बाद हुई यात्रा
यह यात्रा टीटीपी के बंदूकधारियों द्वारा कराची में पुलिस मुख्यालय पर हमला करने के कुछ दिनों बाद हुई है। उस हमले में तीन सुरक्षाकर्मियों सहित चार लोगों की जान चली गई थी। इससे पहले 30 जनवरी को पेशावर की मस्जिद में एक आत्मघाती बम विस्फोट में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। मस्जिद हमले के लिए भी टीटीपी को जिम्मेदार ठहराया गया था। बीते साल, टीटीपी ने औपचारिक रूप से 28 नवंबर को युद्धविराम समाप्त कर दिया था। तब से टीटीपी  द्वारा 58 हमलों का दावा किया गया है, जिसमें 170 लोग मारे गए। इतना ही नहीं, इनमें से कई हमलों की योजना और निर्देशन अफगानिस्तान में स्थित टीटीपी नेतृत्व द्वारा किया गया था। हालांकि, अफगान नेताओं ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है कि टीटीपी ने पाकिस्तान में हमलों के लिए अपने देश की धरती का इस्तेमाल किया।  

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