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जर्मनीः धुर दक्षिणपंथ से लड़ाई को झटका, एएफडी पार्टी पर सरकारी निगरानी की कोशिशों पर कोर्ट का स्टे

Sat, 06 Mar 2021 02:11 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बॉन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बॉन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 06 Mar 2021 02:11 PM IST
सार

कोर्ट ने जर्मनी के संविधान में दर्ज इस प्रावधान का जिक्र किया कि सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बीएफडब्ल्यू ने एएफडी को संभावित चरमपंथी गुट बताया है। लेकिन जिस तरह उसने ये कदम उठाया, वह उचित नहीं है...

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A German court blocks government order to observation on AFD through the federal intelligence agency BFW
Germany AFD Leaders - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर ड्यूशलैंड (एएफडी) पर निगरानी रखने की सरकार की कोशिश को तगड़ा झटका लगा है। एक जर्मन अदालत ने संघीय खुफिया एजेंसी बीएफडब्ल्यू के जरिए उसकी निगरानी और उसकी जासूसी कराने के सरकार के आदेश को खारिज कर दिया है। इसी हफ्ते की शुरुआत में खबर आई थी कि बीएफडब्ल्यू को एएफडी की निगरानी करने का आदेश दिया गया है। सरकार का आरोप है कि एएफडी धुर-दक्षिणपंथी उग्रवाद फैलाने में जुटी हुई है। एएफडी इस्लाम और आव्रजक विरोधी पार्टी है। उस पर नाजी विचारधारा का समर्थक होने का भी आरोप है।

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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बीएफडब्ल्यू को चरमपंथ विरोधी जो अधिकार मिले हुए हैं, उनके तहत वह एएफडी की जासूसी नहीं कर सकता। पहले बताया गया था कि बीएफडब्ल्यू एएफडी के नेताओं के फोन टैप करेगा और उनकी गतिविधियों पर नजर रखेगा। एएफडी ने इसे कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने एक आपात फैसले में निगरानी के आदेश पर रोक लगा दी है।
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बीएफडब्ल्यू को निगरानी का आदेश दिए जाने के बाद एएफडी के नेता गुन्नार बेक ने वेबसाइट रशियाटुडे.कॉम को दिए एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि ताजा आदेश देश के उनकी पार्टी का सत्ता प्रतिष्ठान के साथ बढ़ रहे टकराव का परिणाम है। उन्होंने कहा था कि सत्ता प्रतिष्ठान उनकी पार्टी को अपने रास्ते की रुकावट मानता है और उसे खत्म करने की कोशिश में जुटा है। बेक ने कहा कि बीएफडब्ल्यू ने ढाई साल पहले ही यह कहा था कि वह एएफडी पर नजर रख रहा है। ऐसा तब हुआ जब एएफडी जर्मन संसद बुन्डेस्टैग में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बन कर उभरी थी। बेक ने कहा- सरकार तब से हमें धमकाती रही है। अब ऐसा लगता है कि उन्होंने धमकी पर अमल का फैसला कर लिया है। वे हमारे निजी जीवन पर हमला कर रहे हैं।
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अब कोर्ट के फैसले से एएफडी को फौरी राहत मिली है। लेकिन इससे जर्मन सरकार और परंपरागत पार्टियों की चिंता बढ़ेगी। बीएफडब्ल्यू के प्रमुख थॉमस हाल्डेनवांग ने कहा है कि इस वक्त दक्षिणपंथी उग्रवाद और दक्षिणपंथी आतंकवाद जर्मनी के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। यही राय चांसलर अंगेला मैर्केल की सरकार और मुख्यधारा विपक्षी पार्टियों की भी है। इसलिए आम समझ यह है कि कोर्ट से झटका लगने के बाद सरकार एएफडी पर नजर रखने के लिए नए उपाय कर सकती है।

कोलोन स्थित कोर्ट ने एएफडी के पक्ष में फैसला पार्टी की इस दलील को स्वीकार करते हुए दिया कि बीएफडब्ल्यू की कार्रवाई से एएफडी की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने जर्मनी के संविधान में दर्ज इस प्रावधान का जिक्र किया कि सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बीएफडब्ल्यू ने एएफडी को संभावित चरमपंथी गुट बताया है। लेकिन जिस तरह उसने ये कदम उठाया, वह उचित नहीं है।


बताया जाता है कि एएफडी को संभावित चरमपंथी गुट की श्रेणी में रखने का फैसला बीएफडब्ल्यू के प्रमुख थॉमस हाल्डनवांग ने पिछले महीने एक बैठक में लिया था। लेकिन एएफडब्लू ने कोर्ट में दलील दी कि बीएफडब्ल्यू का इस्तेमाल उसकी छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है, ताकि उसकी चुनावी संभावनाएं कमजोर की जा सकें। जर्मनी के दो प्रांतों में इसी महीने चुनाव होने वाले हैं। जून से सितंबर के बीच देश के बाकी राज्यों में चुनाव होंगे।

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