फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   27 Rohingya out of cane punishment in Malaysia

मलयेशिया में 27 रोहिंग्या बेंत मारने की सजा से  हुए बाहर, वैश्विक दबाव के बाद उच्च न्यायालय ने सुनाया फैसला

Thu, 23 Jul 2020 05:59 AM IST
अवधेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कुआलालंपुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कुआलालंपुर Published by: अवधेश कुमार Updated Thu, 23 Jul 2020 05:59 AM IST
सार

  • रोहिंग्या शरणार्थियों का मामला पूरी दुनिया में एक बार फिर से गरमा गया
  • वैश्विक दबाव के बाद निचली अदालत के निर्णय पर उच्च न्यायालय ने सुनाया फैसला
  • निचली अदालत ने बिना कानूनी मंजूरी के नौका से आए 40 लोगों को दी सजा

विज्ञापन
27 Rohingya out of cane punishment in Malaysia
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मलयेशिया के उच्च न्यायालय ने बुधवार को म्यांमार के 27 रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को बेंत मारने की सजा से बाहर कर दिया। उनके वकील ने बताया कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा नाराजगी जताने के बाद देश के हाईकोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों को निचली अदालत की सजा से अलग कर दिया है।
विज्ञापन


एक मजिस्ट्रेट अदालत ने पिछले माह रोहिंग्या पुरुषों को कानूनी अनुमति के बिना नौका से मलयेशिया में प्रवेश करने के अपराध में 40 शरणार्थियों को दोषी ठहराया था। सभी 40 को सात महीने की जेल की सजा सुनाई गई और साथ ही उन्हें बेंत से मारने का आदेश भी दिया गया। इसके बाद रोहिंग्या शरणार्थियों का मामला पूरी दुनिया में एक बार फिर से गरमा गया। 
विज्ञापन


अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मलयेशिया की सरकार से आप्रवासन अपराध के आरोपी रोहिंग्या शरणार्थियों को बेंत से मारने की सजा पर रोक लगाने की मांग की। शरणार्थियों के वकील कोलिन एंड्रयू ने बताया कि हाईकोर्ट ने 27 रोहिंग्या पुरुषों के विरुद्ध मामलों की समीक्षा के बाद उन्हें बेंत मारने की सजा से अलग कर दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने फैसला किया कि 27 लोगों के विरुद्ध हिंसा का कोई पूर्व इतिहास नहीं रहा है इसलिए बेंत मारने की सजा अमानवीय होगी। बता दें कि मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी ने सजा का विरोध इसलिए किया था क्योंकि रोहिंग्या शरणार्थी पहले ही म्यांमार में सेना द्वारा उत्पीड़न का शिकार रह चुके हैं और अब प्राकृतिक आपदा का शिकार हैं। 


एमनेस्टी ने की थी रिहाई की मांग

एमनेस्टी इंटरनेशनल की मलयेशिया शोधकर्ता रेचेल छोआ हावर्ड ने कहा कि जिन शरणार्थियों को जेल की सजा के साथ बेंत मारने की सजा मिली है, वे पहले ही म्यांमार में प्रताड़ना का सामना कर चुके हैं। उन्होंने सुरक्षित ठिकाना मिल सके इसलिए मलयेशिया पहुंचने के लिए समुद्री खतरनाक सफर तय किया है। संस्था ने इस सजा को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताते हुए शरणार्थियों की रिहाई की मांग की थी।




 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed