फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   West Bengal ›   Kolkata film festival 2022: director of SIKAISAL said- film takes a dig at our education system

Kolkata film festival 2022: सिकाईसाल’ की निदेशक बोलीं- हमारी शिक्षा व्यवस्था पर करारा तंज कसती है फिल्म

Tue, 20 Dec 2022 02:35 PM IST
Harendra Chaudhary एन. अर्जुन, कोलकाता
एन. अर्जुन, कोलकाता Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 20 Dec 2022 02:35 PM IST
सार

Kolkata film festival 2022: शिकाईसाल फिल्म की लेखिका और डायरेक्टर डॉ. बॉबी शर्मा बरुआ ने कहा, वास्तव में इसमें एक शिक्षक का संघर्ष है। कैसे एक पेड़ के नीचे बच्चों को लेकर एक शिक्षक, शिक्षा की रोशनी जलाने की कोशिश करता है। किस तरह कई शिक्षक ग्रामीण परिवेश में कठिन परिस्थितियों शिक्षा की जोत को थामे हुए हैं...

विज्ञापन
Kolkata film festival 2022: director of SIKAISAL said- film takes a dig at our education system
SIKAISAL - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हमारे देश में आज भी शिक्षा को लेकर बहुत कुछ करना बाकी है। बहुत कुछ होना बाकी है। जब तक हम शिक्षित समाज नहीं बनाएंगे, तब तक हमारी समझ विकसित नहीं और जब तक समझ विकसित नहीं होगी, हमारा संपूर्ण विकास नहीं होगा। यह फिल्म जिसका कि नाम 'शिकाईसाल' है, वह हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर करार प्रहार करती है। मैंने कोशिश की है अपनी व्यवस्था की परतें खोलने की। पता नहीं कितना सफल हो पाई हूं, यह तो दर्शक ही बताएंगे। लेकिन इतना है कि जिस विषय को लेकर मैंने फिल्म बनाई है, वह एक वृहद विषय है। यह कहते हुए चेहरा सुकून से खिल जाता है शिकाईसाल फिल्म की लेखिका और डायरेक्टर डॉ. बॉबी शर्मा बरुआ का। उनकी फिल्म 28वें कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी। अमर उजाला से खास बातचीत में डॉ. बरुआ ने कहा, फिल्म हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर करारा तंज कसती है।

विज्ञापन

एक सवाल के जवाब में डॉ. बरुआ ने कहा, यह फिल्म असम के एक जिले की है, कार्बी आंगलोंग। वहां की तिवी भाषा पर यह फिल्म बनाई है। यह अपनी तरह की एक मात्र फिल्म है। पूरी शूटिंग हमने वहीं पर शूट की। यह बहुत ही पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। इसके साथ ही यह भी कि ग्रामीण लोग बच्चों को पढ़ाने की जगह काम कराते हैं, ताकि परिवार की आय बढ़े और परिवार का जीवन-यापन चलता रहे। लेकिल मुझे लगता है कि पढ़ाई हर इंसान का पहला अधिकार है और वह उसे मिलना चाहिए।

विज्ञापन

डॉ. बरुआ ने कहा, वास्तव में इसमें एक शिक्षक का संघर्ष है। कैसे एक पेड़ के नीचे बच्चों को लेकर एक शिक्षक, शिक्षा की रोशनी जलाने की कोशिश करता है। किस तरह कई शिक्षक ग्रामीण परिवेश में कठिन परिस्थितियों शिक्षा की जोत को थामे हुए हैं। लेकिन मैंने दिखाने की कोशिश की है कि किसी व्यक्ति की मेहनत को, सरकारी तंत्र किस तरह से पंगु बना देता है। फिल्म में एक शिक्षक हैं, जो अपनी मेहनत से गांव के बच्चों को पढ़ाते हैं। किस तरह से बच्चों को एकत्रित करते हैं, एक स्कूल की शुरुआत करते हैं और फिर उसे बढ़ाते हैं। वह स्कूल जब बच्चों से भरने लगता है तो सरकार उसे अपना लेती है। फिर किस तरह से उस अध्यापक के रिटायर्ड होने के बाद उस स्कूल का पतन होने लगता है। कैसे उस स्कूल में बच्चे कम होने लगते हैं। कैसे स्कूल में अध्यापकों की कमी होने से बच्चे फिर स्कूल छोड़ने लगते हैं। इसके बाद फिर कैसे शिक्षक एक बार फिर संघर्ष करता है और अपने स्कूल को बचाते हैं और बच्चों को जोड़ कर फिर से नई शुरुआत करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. बरुआ कहती हैं, अगर मैं अपने फिल्म के माध्यम से कुछ कह पाऊं, तो यह मेरे लिए सौभाग्य होगा क्योंकि बच्चों को शिक्षित किए बिना हम कुछ भी कर लें, उसकी कोई गिनती नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed